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  • हाईकोर्ट के फैसले की धज्जियां उड़ा कर दिव्यांगों से फीस वसूल रहे मेडिकल एवं तकनीकी कॉलेज

    हाईकोर्ट के फैसले की धज्जियां उड़ा कर दिव्यांगों से फीस वसूल रहे मेडिकल एवं तकनीकी कॉलेज

    उमंग के अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव ने कहा – अदालत की अवमानना का केस करेंगे

    शिमला, 18 अक्टूबर। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले की धज्जियां उड़ाकर शिमला के इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज, कांगड़ा के टांडा स्थित राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज एवं अन्य मेडिकल कॉलेजों में दिव्यांग विद्यार्थियों से फीस वसूली जा रही है।

    दिव्यांगों के लिए कार्य कर रही संस्था उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव ने बताया कि उन्होंने इस बारे में प्रदेश के मुख्य सचिव को पत्र भेज कर तुरंत संज्ञान लेने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि यदि 15 दिन के भीतर संबंधित मेडिकल कॉलेजों ने दिव्यांग बच्चों की फीस वापस नहीं की तो वह हाईकोर्ट में अदालत की अवमानना का केस दायर करेंगे। अजय श्रीवास्तव ने कहा कि उनकी जनहित याचिका पर 4 जून 2015 को जस्टिस राजीव शर्मा और जस्टिस तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने अपनी फैसले में स्पष्ट कहा था कि दिव्यांग विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय स्तर तक निशुल्क शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार है। हाईकोर्ट ने कहा था कि विश्वविद्यालय स्तर तक दिव्यांग बच्चों से कोई भी फीस वसूल नहीं की जाएगी। अदालत के फैसले में टांडा मेडिकल कॉलेज और आईजीएमसी शिमला का तो साफ़ तौर पर उल्लेख है।

    इसके बावजूद जून 2015 के बाद 9 वर्षों में मेडिकल कॉलेज इंजीनियरिंग कॉलेज सैकड़ों दिव्यांग विद्यार्थियों से गैरकानूनी ढंग से फीस वसूल चुके हैं।
    उन्होंने कहा कि वे समय-समय पर टांडा मेडिकल कॉलेज और आईजीएमसी शिमला के प्रबंधन के ध्यान में हाईकोर्ट का फैसला ला चुके हैं। इसके बावजूद हाईकोर्ट के आदेशों का खुला उल्लंघन करके एमबीबीएस एवं अन्य कक्षाओं के विद्यार्थियों को फीस देने पर मजबूर किया जा रहा है।
    अजय श्रीवास्तव ने कहा कि प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों समेत सभी चिकित्सा एवं तकनीकी शिक्षण संस्थानों में दिव्यांग विद्यार्थियों को हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक मुफ्त शिक्षा दी जानी चाहिए। इसके बावजूद सरकारी मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, पॉलिटेक्निक, नर्सिंग कॉलेज, और इंडस्ट्रियल ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट (आईटीआई) आदि संस्थान दिव्यांग बच्चों से फीस चार्ज कर रहे हैं। यह बेहद गंभीर मामला है

  • एमएमयू में 103 करोड़ की अतिरिक्त फीस वसूली का मामला पहुंचा हाईकोर्ट

    एमएमयू में 103 करोड़ की अतिरिक्त फीस वसूली का मामला पहुंचा हाईकोर्ट

    महर्षि मार्कंडेश्वर विश्वविद्यालय (एमएमयू) और उससे संबद्ध मार्कंडेश्वर मेडिकल कॉलेज कुमारहट्टी के करीब 1200 विद्यार्थियों से 103 करोड़ रुपये की अतिरिक्त फीस वसूली का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। वीरवार को मामले की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान कोर्ट ने फिलहाल विश्वविद्यालय प्रबंधन को कोई राहत नहीं दी है। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और सीबी बारोवालिया की खंडपीठ ने निजी शिक्षण संस्थान विनियामक आयोग के अध्यक्ष से निजी परिचय का हवाला देकर सुनवाई से इनकार कर दिया है। अब मुख्य न्यायाधीश एए सैयद की स्वीकृति के बाद दूसरी खंडपीठ के पास मामले की सुनवाई होगी।

    आयोग की अदालत ने मामले का निपटारा करते हुए कहा था कि वर्ष 2012 से 2020 की अवधि के दौरान करीब 1200 एमबीबीएस प्रशिक्षुओं से एमएमयू ने 103,96,53,000 रुपये की अतिरिक्त ट्यूशन फीस वसूली। आयोग ने इन सभी प्रशिक्षुओं से अतिरिक्त फीस वसूली को विवि से वापस लेने के लिए आवेदन करने के लिए कहा था। मार्कंडेश्वर मेडिकल कॉलेज कुमारहट्टी पर आयोग ने 45 लाख का जुर्माना भी लगाया है।

    आयोग के इस फैसले को विश्वविद्यालय ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। याचिका में आरोप लगाया है कि आयोग के आदेशों पर पूर्ण कोरम के हस्ताक्षर नहीं थे। आयोग के अधिवक्ता नरेश कौल ने अदालत को बताया कि आयोग के एक सदस्य शशिकांत शर्मा ने इस पर हस्ताक्षर नहीं किए, क्योंकि उनकी बेटी भी विश्वविद्यालय में नामांकित थी।

     

    यह था मामला

    वर्ष 2013-14 बैच की एमबीबीएस छात्रा निवेदिता राव व यामिनी की शिकायत पर आयोग ने मार्कंडेश्वर मेडिकल कॉलेज कुमारहट्टी पर 45 लाख का जुर्माना लगाया है। शिकायत थी कि उन्होंने अतिरिक्त ट्यूशन फीस की वसूली को लेकर विरोध किया था, लेकिन उन्हें यह कहकर धमकाया गया कि फीस जमा न करने पर डिग्री पूरी नहीं होने दी जाएगी।

  • HPU ने घोषित किया बीटैक 7वें सैमेस्टर की परीक्षाओं का परिणाम

    HPU ने घोषित किया बीटैक 7वें सैमेस्टर की परीक्षाओं का परिणाम

    हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय ने बीटैक 7वें सैमेस्टर की परीक्षाओं का परिणाम घोषित कर दिया है। यह परीक्षाएं मार्च माह में हुईं थी। परिणाम घोषित कर विश्वविद्यालय की वैबसाइट पर उपलब्ध करवा दिया है।

    उधर, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के यूनिवर्सिटी इंस्टीच्यूट ऑफ टैक्नोलॉजी (यूआईटी) ने परीक्षा फीस बढ़ाने का निर्णय वापस ले लिया है। अब विद्यार्थियों को पूर्व में निर्धारित परीक्षा फीस ही चुकानी होगी। इसके तहत विद्यार्थी अब परीक्षा फीस के तौर पर 2 हजार रुपए प्रति सैमेस्टर ही देंगे। इसके अलावा रिवैल्यूएशन की फीस 500 रुपए प्रति सब्जैक्ट ही देनी होगी। बता दें कि बीते जून माह में यूआईटी ने वर्ष 2014 की अधिसूचना का हवाला देते हुए परीक्षा फीस बढ़ाने का निर्णय लिया था। इस निर्णय के तहत विद्यार्थियों को 2 हजार प्रति सैमेस्टर सहित 500 रुपए प्रति प्रैक्टीकल सब्जैक्ट के हिसाब से अतिरिक्त फीस देनी पड़नी थी, जिससे परीक्षा फीस के तौर पर विद्यार्थियों को 4500 रुपए से 5 हजार रुपए प्रति सैमेस्टर देने पड़ जाने थे। विद्यार्थियों इसका विरोध किया, जिसके बाद कुलपति प्रो. सत प्रकाश बंसल ने कमेटी का गठन किया था।

    मामले का अध्ययन कर कमेटी ने फीस वृद्धि न करने की सिफारिश दी और कुलपति द्वारा स्वीकृति प्रदान करने के बाद विद्यार्थियों को राहत मिली है।

  • निजी स्कूलों में फीस जमा कराने की अन्तिम तिथि 30 अप्रैल  तक बढ़ाई गई

    निजी स्कूलों में फीस जमा कराने की अन्तिम तिथि 30 अप्रैल तक बढ़ाई गई

    हिमाचल प्रदेश उच्च शिक्षा विभाग के एक प्रवक्ता आज यहां जानकारी दी कि विभाग ने स्कूल फीस जमा कराने की अन्तिम तिथि को बिना किसी विलम्ब शुल्क से 30 अप्रैल,  2020 तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि सम्बन्धित निजी स्कूलों के प्रबन्धन को इस बारे में अभिभावकों को सूचना देने के लिए आवश्यक कदम उठाने होंगे।

    उन्होंने कहा कि विभाग के ध्यान में आया है कि राज्य में कार्यरत कुछ निजी स्कूलों ने स्कूल फीस जमा करवाने की अन्तिम तिथि 30 मार्च, 2020 निर्धारित की है।  कोविड-19 के कारण उत्पन्न परिस्थितियों के दृष्टिगत अभिभावकों के लिए स्कूलों द्वारा निर्धारित उक्त तिथि तक स्कूल फीस जमा करवाना सम्भव नहीं है इसलिए फीस जमा करवाने की अन्तिम तिथि बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।

    यह आदेश हिमाचल प्रदेश में कार्यरत सभी बोर्डों से सम्बद्ध निजी स्कूलों में लागू होंगे।