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  • हिमाचल प्रदेश सरकार ने छह आईपीएस अधिकारियों को पदोन्नत किया गया

    हिमाचल प्रदेश सरकार ने छह आईपीएस अधिकारियों को पदोन्नत किया गया

    शिमला

    हिमाचल प्रदेश सरकार ने छह आईपीएस अधिकारियों को पदोन्नत किया है, जबकि तीन अधिकारियों को सिलेक्शन ग्रेड लेवल 13 का लाभ दिया गया है। केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर चल रहे वर्ष 1999 बैच के आईपीएस अधिकारी ज्ञानेश्वर सिंह ठाकुर को एडीजीपी पद पर पदोन्नत किया गया है।

    उन्हें दिल्ली में गृह मंत्रालय ने गोल्ड मेडल से नवाजा है। अभी वह केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर एनसीबी में डिप्टी डायरेक्टर जनरल ऑपरेशन के पद पर सेवाएं दे रहे हैं। आईपीएस अधिकारी अशोक कुमार, डीआईजी उत्तरी रेंज धर्मशाला अभिषेक दुल्लर और डीआईजी एवं प्रिंसिपल पीटीसी डरोह बिमल गुप्ता को आईजी पद पर पदोन्नत किया गया है। सरकार ने स्क्रीनिंग कमेटी की सिफारिश पर एवं मिशन पर चल रही वर्ष 2010 बैच की आईपीएस एसपी शुभ्रा तिवारी और एसपी जेल रंजन चौहान को डीआईजी पद पर पदोन्नत किया है, वहीं सिरमौर के पुलिस अधीक्षक रमन कुमार मीणा, स्टेट विजिलेंस साउथ रेंज शिमला की पुलिस अधीक्षक अंजू आरा और स्टेट विजिलेंस एसआईयू शिमला के पुलिस अधीक्षक ओमापति जमवाल को सिलेक्शन ग्रेड लेवल 13 प्रदान किया गया।

  • गुड़िया मामले में नया ट्विस्ट: कांस्टेबल की गवाही ने बढ़ाई पूर्व IG जैदी समेत 9 पुलिसकर्मियों की मुश्किलें

    गुड़िया मामले में नया ट्विस्ट: कांस्टेबल की गवाही ने बढ़ाई पूर्व IG जैदी समेत 9 पुलिसकर्मियों की मुश्किलें

    चंडीगढ़/शिमला: हिमाचल प्रदेश के बहुचर्चित रेप केस गुड़िया मामले में अब पुलिसकर्मियों की मुश्किलें बढ़ने जा रही हैं। बता दें कि घटना के बाद एक अभियुक्त की पुलिस कस्टडी में मौत हो गई थी।

    पुलिस कस्टडी में जिस अभियुक्त की मौत हुई थी, उसका नाम सूरज था। पुलिसकर्मियों ने घटना के बाद उसे गिरफ्तार किया था। मामले में 9 पुलिसकर्मियों को नामजद किया गया है। पूरे प्रकरण में सबसे अहम कांस्टेबल दिनेश के बयान दर्ज किए गए हैं।

    चंडीगढ़ जिला अदालत की स्पेशल सीबीआइ कोर्ट में  कड़ी सुरक्षा के बीच कांस्टेबल दिनेश को अदालत में पेश किया गया। दिनेश ने कहा कि उसने अपने बयान में बताया था कि 6 जुलाई 2017 जब की यह घटना हुई थी तो वह उस समय कोटखाई थाने में ही तैनात था।

    उस रात 4 से 5 पुलिसकर्मी नाबालिग के दुष्कर्म और हत्या मामले की जांच में जुटे थे और उन्होंने जांच के दौरान कुछ आरोपितों को भी पकड़ा था। आरोपितों में सूरज भी शामिल था। उसी रात को डीएसपी मनोज जोशी, थाना प्रभारी राजेंद्र सिंह और कुछ अन्य पुलिसकर्मी सूरज को पूछताछ के लिए थाने की पहली मंजिल पर ले गए।

    वहां से सूरज के चीखने-चिल्लाने की काफी आवाजें आ रही थी। थोड़ी ही देर बाद सूरज के चिल्लाने की आवज बंद हो गई। कुछ देर बाद पुलिसकर्मी मोहन लाल, सूरत और रंजीत आरोपित सूरज को बेसुध हालत में उठाकर नीचे ला रहे थे।

    इसके बाद उन्होंने सूरज को अस्पताल पहुंचाया। घटना वाली रात को ही पता चला कि सूरज की मौत हो गई। दिनेश ने कहा कि क्योंकि वह उसी थाने में तैनात था तो ऐसे में उसे किसी को भी इस बारे में बात न करने के लिए कहा गया था। इस केस में कांस्टेबल दिनेश की गवाही काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।