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  • राजधानी में कनलोग वार्ड की सड़क बहाल हुई

    राजधानी में कनलोग वार्ड की सड़क बहाल हुई

    राजधानी शिमला में रविवार को कनलोग वार्ड में भूस्खलन के कारण बंद पड़ी सडक़ को खोलने का कार्य किया गया। इस दौरान नगर निगम महापौर सुरेंद्र चौहान, उप महापौर उमा कौशल व शहर के करीब 250 लोग मौजूद रहे। वहीं मौके पर कारसेवा व लोगों की मदद से सडक़ को बहाल करने का कार्य किया गया। इसकी शुरुआत सुबह 11 बजे से की गई। इस सडक़ को कारसेवा के लिए सुचारू करने का प्रयास किया गया।

    गौरतलब है कि शहर में बारिश के कारण जगह-जगह भूस्खलन हुआ। इससे कई रास्ते, सडक़ें और डंगे गिर गए। जिसके बाद अब नगर निगम महापौर सुरेंद्र चौहान ने कारसेवा या लोगों की मदद से क्षतिग्रस्त रास्तों व सडक़ों को ठीक करने का बीड़ा उठाया है। जिसकी शुरुआत रविवार को कनलोग वार्ड से की गई। रविवार को अवकाश होने के कारण कार्य को करने से लोगों को भी परेशानी नहीं हुई। वहीं लोगों को बंद सडक़ या रास्ते से परेशानी न हो, यही वजह है कि इस कार्य को करने के लिए रविवार का दिन चुना गया है।

    नगर निगम का कहना है कि अभी निगम के पास इतना बजट उपलब्ध नहीं है कि पूरे शहर की क्षतिग्रस्त सडक़ों को दुरूस्त किया जा सके वहीं जो फंड बचा था उसके टेंडर भी लगा दिए गए हैं। ऐसे में जो सडक़ें और रास्ते बिल्कुल खस्ताहाल हो गए हैं उनका पुना निर्माण किया जाना है । ऐसे में इसके लिए निगम ने भी प्रदेश सरकार से बजट मांगा है। जब तक बजट नहीं आ जाता है तब तक नगर निगम स्वयं लोगों की मदद से शहर के लोगों की सुविधा के लिए स्वयं सडक़ों और रास्तों को दुरूस्त करने वाला है। इससे पहले बीते मंगलवार को नगर निगम महापौर सुरेंद्र चौहान ने कनलोग वार्ड से पार्षद आलोक पठानिया के साथ मिलकर यहां का दौरा किया था। इस दौरान रविवार को इस कार्य को करने का फैसला लिया गया था। नगर निगम के महापौर सुरेंद्र चौहान ने कहा था कि 200 के करीब लोग इस कार्य में जुटेंगे। मशीनों से लेकर अन्य सामग्री भी लगाई जाएगी। मूल रूप से जल्द ही लोगों को सडक़ व रास्तों की सुविधा मिल सके। इसका लक्ष्य भी रविवार का ही रखा गया है।

    नगर निगम के महापौर सुरेंद्र चौहान ने बताया कि शहर में अवरूद्ध सडक़ों को बहाल करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए कारसेवा और लोगों की मदद ली जा रही है। कनलोग से इसकी शुरुआत की गई है। यहां बंद पड़ी सडक़ को खोलने के लिए 250 के करीब लोगों की मदद ली गई है।

     

     

  • शिमला के कनलोग में आखिरकार पकड़ा गया तेंदुआ

    शिमला के कनलोग में आखिरकार पकड़ा गया तेंदुआ

    जंगल में अपने आतंक से छोटे वन्यजीवों का शिकार करने वाले जानवर जब इंसानों की बस्ती में आ जाते हैं, तो दहशत फैलते देर नहीं लगती। पर अब यह दहशत ख़तम होगई है क्यूंकि वन्यप्राणी प्रभाग वन विभाग हिमाचल प्रदेश ने अभी अभी शिमला के कनलोग क्षेत्र से एक तेंदुए को पकड़ने में सफलता प्राप्त की है। इसकी जानकारी प्रधान मुख्य अरण्यपाल अजय श्रीवातसवा ने crazynewsindia के साथ साझा की।

    प्रारंभिक सूचना के अनुसार रात करीब साढ़े आठ बजे फील्ड स्टाफ ने सूचना दी थी कि एक पिंजरे में कोई जानवर बंद हो गया है। बाद में जब टॉर्च से इसे चेक किया गया तो पता चला कि यह तेंदुआ है।

    इसके बाद आला अफसरों को सूचना दी गई। रात करीब नौ बजे वन विभाग के अफसर मौके पर पहुंचे। ट्रैंक्यूलाइजर गन लिए एक टीम भी मौके पर पहुंची और तेंदुए को बेहोश किया गया। वन विभाग के सूत्रों के अनुसार यह तेंदुआ बड़ा है और पिंजरे में लगाए गए मांस के लिए यहां आया था। हालांकि, यह वही तेंदुआ है जिसने कनलोग और डाउनडेल से दो बच्चों को उठाया था, इसकी अभी पहचान नहीं हुई है। वन विभाग के अनुसार इस तेंदुए को पकड़कर अभी रेस्क्यू सेंटर टूटीकंडी ले जाया गया है। वहां आगामी कार्रवाई होगी।

    वन विभाग के सूत्रों के अनुसार इस पिंजरे के पास पहले भी तेंदुए की मूवमेंट देखी गई थी। ऐसे में उम्मीद थी कि यह तेंदुआ दोबारा यहां लौटेगा। इससे पहले देर शाम करीब आठ बजे वन विभाग के पीसीसीएफ अजय श्रीवास्तव टीम के साथ मौके पर गए थे। पीसीसीएफ ने इस जगह का भी निरीक्षण किया था और फील्ड स्टाफ को नियमित पिंजरा चेक करने को कहा। पीसीसीएफ के लौटने के करीब आधे घंटे बाद रात करीब साढ़े आठ बजे तेंदुआ इस पिंजरे में फंस गया।

    वन विभाग के पीसीसीएफ अजय श्रीवास्तव ने बताया कि कनलोग के जंगल से एक तेंदुए को पकड़ लिया गया है। इसे रेस्क्यू सेंटर ले जाया गया है। अभी बताना मुश्किल है कि इसी तेंदुए ने बच्चों को उठाया है या नहीं। इसकी पहचान के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा।

    अतिरिक्त प्रधान मुख्यअरण्यपाल अनिल ठाकुर  एवं मुख्य अरण्यपाल शिमला सोम दत्त शर्मा के नेतृत्व में पिछले दो हफ़्तों से काम कर रही टीम को आज सफलता प्राप्त हुई है, श्रीवास्तवा ने कहा।

    बता दे दिवाली की रात को शहर के ओल्ड बस के नीचे डाउनटेल बस्ती से तेंदुआ (Leopard in shimla) एक पांच साल के बच्चे को उठाकर ले गया था. यहां पर तेंदुए की दहशत बरकार है. अब पता चला है कि यहां एक नहीं, पांच तेंदुए घूम रहे हैं. इनमें तीन बच्चे और नर और मादा तेंदुआ है. डाउनटेल के अलावा, कनलोग में ये तेंदुए स्पॉट हुए हैं. रविवार को ये तेंदुए कैमरे में कैद हुए हैं.दरअसल, कनलोग में पांच अगस्त को सात साल की बच्ची को तेंदुए ले गया था. उसके बाद यहां लगाए गए ट्रैप कैमरों लगाए गए थे. तीन महीने पहले भी यहां मादा तेंदुआ तीन बच्चों के साथ दिखी थी, लेकिन उस समय शावक छोटे थे और अब ये शावक बड़े हो गए हैं.

  • कनलोग के जंगल में पांच तेंदुए घूम रहे , कैमरा में हुए ट्रैप

    कनलोग के जंगल में पांच तेंदुए घूम रहे , कैमरा में हुए ट्रैप

    राजधानी के कनलोग-डाउनडेल के जंगल में एक नहीं, बल्कि पांच तेंदुए घूम रहे हैं। इनमें तीन तेंदुए छोटे हैं और इनकी उम्र करीब पांच से सात महीने है। वन विभाग की ओर से इस क्षेत्र में लगाए गए ट्रैप कैमरों में पांच तेंदुओं की मूवमेंट देखी गई है। इनमें एक मादा तेंदुआ भी है। इसके साथ तीन बच्चे घूम रहे हैं।

    पांच अगस्त को कनलोग से जब छह साल की बच्ची को तेंदुए ने उठाया था, उस वक्त यहां लगाए गए ट्रैप कैमरों में भी यह मादा तेंदुआ तीन बच्चों के साथ दिखी थी। उस समय इसके शावक छोटे थे। लेकिन अब ये बड़े हो गए हैं। हालांकि, अभी ये अकेले शिकार नहीं कर पाते और मादा तेंदुआ के साथ ही घूम रहे हैं।  वन विभाग के अनुसार एक और तेंदुए की मूवमेंट भी कैमरों से पता चली है। यह तेंदुआ काफी बड़ा है।

    कनलोग में लगाए गए पिंजरे के पास भी यह तेंदुआ पहुंचा था और इसके पंजों के निशान से अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह काफी बड़ा है। वन विभाग का कहना है कि अब तक पांच तेंदुओं की मूवमेंट पता चली है।  इनकी संख्या ज्यादा भी हो सकती है। विभाग का कहना है कि अभी सभी तेंदुओं को पकड़ने की कोशिश की जा रही है। हैरानी की बात यह भी है कि इन पांचों में से एक भी पिंजरे में नहीं आया है।

    आदमखोर तेंदुए को पकड़ने के लिए शिमला पहुंची केंद्रीय वन्यजीव विभाग की टीम ने सोमवार को कनलोग के जंगल का निरीक्षण किया। इस दौरान जंगल में लगाए गए पिंजरों की लोकेशन बदली गई है। वन विभाग ने कनलोग और डाउनडेल एरिया में करीब आधा दर्जन पिंजरे लगाए हैं। अभी पिंजरों की संख्या नहीं बढ़ाई जा रही, लेकिन कुछ नए ट्रैप कैमरे लगाए जा रहे हैं। एपीसीसीएफ अनिल ठाकुर ने बताया कि केंद्रीय टीम ने जंगल का दौरा किया है। पिंजरों की लोकेशन बदली जा रही है।

    वन विभाग का कहना है कि तेंदुआ एक बार खाने के बाद कई दिन तक रह सकता है। इसीलिए यह पिंजरे के पास आकर भी लौट गया। लेकिन अगले दो तीन दिन बड़े अहम है।