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  • स्कूल तय करें छोटे बच्चों को स्कूल बुलाना है या नहीं

    स्कूल तय करें छोटे बच्चों को स्कूल बुलाना है या नहीं

    शिमला : प्रदेश में अभिभावकों द्वारा छोटे बच्चों को स्कूल बुलाने और क्लास लगाने का विरोध करने के बाद संशय की स्थिति बन गई है। छोटे बच्चे यानि कि प्राइमरी स्तर के बच्चों को स्कूल बुलाना है या नहीं इसका फैसला हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग ने स्कूलों पर ही छोड़ दिया है। 9 नवंबर को लिए गए फैसले में शिक्षा विभाग ने संशोधन किया है। निजी स्कूल पेरेंट्स टीचर एसोसिएशन से चर्चा कर इस संदर्भ में आगामी फैसला ले सकते हैं। लेकिन इन स्कूलों को ऑनलाइन कक्षाओं का क्रम जारी रखना होगा। शिमला शहर के निजी स्कूलों के अभिभावकों की ओर से छोटी कक्षाओं के बच्चों को स्कूल बुलाने का विरोध जताया गया था। इस संबंध में उपायुक्त शिमला की ओर से सरकार को पत्र लिखा गया था।

  • कसुंपटी विस के स्कूलों में बच्चों की 60 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज  

    कसुंपटी विस के स्कूलों में बच्चों की 60 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज  

    करीब साढ़े तीन माह के अंतराल के उपरांत सूबे के स्कूलों में सोमवार को रौनक लौटनी शुरू हो गई है । कोरोना महामारी के संक्रमण के फैलने के  भय से  सरकार द्वारा शिक्षण संस्थानों को बंद कर दिया गया था । कसुंपटी विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न स्कूलों से प्राप्त जानकारी के अनुसार  स्कूलों में सोमवार को करीब 60 प्रतिशत विद्यार्थियों की उपस्थिति दर्ज की गई । स्कूलों के खुलने से जहां बच्चे काफी प्रसन्न दिखाए दिए वहीं पर अभिभावकों ने राहत की सांस ली । सरकार द्वारा जारी एसओपी का स्कूलों में पूर्ण रूप से पालन किया जा रहा है । थर्मल स्क्रीनिंग के उपरांत ही बच्चों को स्कूल में प्रवेश करने की अनुमति  दी गई। क्षेत्र के स्कूलों में बच्चे मास्क लगाकर स्कूल पहंूचे । सरकार ने प्रथम चरण में प्रयोगात्मक तौर पर  दसवीं से 12 कक्षा तक के विद्यार्थियों को स्कूल बुलाने का निर्णय लिया है । कोटी स्कूल के प्रधानाचार्य बनवारी लाल, चियोग स्कूल के प्रिंसीपल डॉ0 संदीप शर्मा ने बताया कि स्कूल खुलने के  प्रथम दिन करीब 60 प्रतिशत बच्चों की उपस्थिति रिकार्ड की गई । बताया कि आने वाले दिनों में  सभी बच्चें स्कूल में प्रवेश ले लेंगे । बताया कि स्कूलों में पढ़ाई का महौल धीरे धीरे लौट आएगा ।  अंभिभावकों का कहना है कि करीब दो वर्षों से बच्चे घर पर काफी परेशान हो गए थे । नियमित पढ़ाई के बिना  इनका भविष्य अंधकारमंय हो गया था । इनका कहना है बिना परीक्षा दिए अगली कक्षा के लिए प्रोमोट करने से मेधावी बच्चों काफी निरूत्साहित हुए हैं। अनेक अभिभावकों ने बताया कि ऑनलाईन क्लासें लगाने से बच्चों को ज्यादा समझ नहीं आ पाता । इनका कहना है कि काफी बच्चे स्मार्ट फोन के आदि हो चुके हैं । पढ़ाई करने की बजाए बच्चों द्वारा  ऑनलाईन गेम इत्यादि खेलने में अपना अधिकांश समय बर्बाद कर दिया जाता रहा है ।