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  • लंदन बुक फेयर में एस आर हरनोट की पुस्तकें प्रदर्शित

    लंदन बुक फेयर में एस आर हरनोट की पुस्तकें प्रदर्शित

     

    लंदन,12 मार्च

     

    हिमाचल निवासी प्रख्यात लेखक एस.आर. हरनोट की दो बहु चर्चित पुस्तकें….उपन्यास “नदी रंग जैसी लड़की” और कहानी संग्रह “कीलें” वाणी प्रकाशन दिल्ली द्वारा लंदन पुस्तक मेले में प्रमुखता से प्रदर्शित की गई है। हरनोट को दोनों पुस्तकें वाणी प्रकाशन ने ये पुस्तकें अंतरराष्ट्रीय अधिकार कैटलॉग के एक भाग के रूप में प्रस्तुत मेले में शामिल की है। लंदन पुस्तक मेला एक बी-2-बी बाज़ार है जिसमें वाणी ने सर्वश्रेष्ठ भारतीय साहित्य की पुस्तकों को विश्व के प्रकाशकों को पुस्तकों के साथ प्रस्तुत किया है। यह जानकारी वाणी प्रकाशन समूह की सीईओ अदिति माहेश्वरी गोयल ने लंदन से जारी एक प्रैस नोट द्वारा दी गई है। उन्होंने कहा कि एस आर हरनोट जैसे प्रख्यात लेखक को छापना वाणी प्रकाशन के लिए बड़ी बात है और हरनोट की दोनों पुस्तकें पाठकों में अत्यंत लोकप्रिय हैं।

     

    अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेला लंदन में हिमाचल प्रदेश के लेखक की पुस्तकों की प्रस्तुति हरनोट के लिए ही बड़ा सम्मान नहीं है बल्कि हिमाचल के लिए भी गौरव की बात है। उपरोक्त दोनों किताबें वाणी प्रकाशन ने वर्ष 2020 और 2022 में प्रकाशित की थी जिनके कई संस्करण निकल चुके हैं और देश के कई विश्वविद्यालयों में इन्हें पीएचडी और एमफिल शोध में शामिल किया गया है। इनकी कहानियां कई विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जा रही है। फिल्म अभिनेता और फिल्म निर्देशक आर्यन हरनोट ने कीलें कहानी पर “कील” नाम से लघु फिल्म का निर्माण किया है जिसे कई पुरस्कार मिले हैं। हाल ही में इस फिल्म की स्क्रीनिंग दादा साहब फालके अंतरराष्ट्रीय फिल्म उत्सव मुंबई में भी हुई है।

     

    अदिति माहेश्वरी गोयल ने जानकारी दी कि वाणी प्रकाशन समूह का यह प्रयास है कि विश्व पटल पर भारतीय लेखकों को प्रस्तुत किया जाए जिनमें हरनोट भी प्रमुख हिंदी लेखक हैं।

     

     

  • मुंबई में एस आर हरनोट की बहुचर्चित कहानी “आभी” का पाठ और संवाद

    मुंबई में एस आर हरनोट की बहुचर्चित कहानी “आभी” का पाठ और संवाद

    मुंबई

    चित्रनगरी संवाद मंच मुम्बई के सृजन संवाद में रविवार 11 फरवरी की शाम को आयोजित कार्यक्रम में शिमला से पधारे सुप्रसिद्ध कथाकार एस आर हरनोट ने कहानी पाठ किया। इस कहानी में ‘आभी’ नामक एक ऐसी चिड़िया की दास्तान थी जो हर समय पर्यावरण को सुरक्षित रखने के काम में सक्रिय रहती है। वह जंगल की रखवाली करती है और झील के जल में अगर कोई एक तिनका भी नज़र आए तो अपनी चोंच से उसे उठाकर बाहर रख देती है। आज के पर्यटक कैसे पहाड़ों में कचरा फैला रहे हैं और कैसे जंगल की शांति भंग कर रहे हैं इसका महत्वपूर्ण चित्रण इस कहानी में था।

    यह कहानी सुनकर श्रोता समुदाय मंत्रमुग्ध हो गया। प्रतिष्ठित कवि हूबनाथ पांडेय ने कहां कि आज सिर्फ़ ख़ुद को बचाने की चिंता लोगों में दिखाई पड़ती है लेकिन इस कहानी में पूरे पर्यावरण को बचाने की ईमानदार कोशिश है। हूबनाथ जी ने पर्यावरण पर अपनी एक कविता भी सुनाई। सोशल एक्टीविस्ट कुसुम त्रिपाठी ने पर्यावरण पर बहुत महत्वपूर्ण वक्तव्य दिया। विकास के नाम पर हो रहे कार्यों का आदिवासी जीवन पर क्या असर पड़ रहा है इस पर उन्होंने विस्तार से प्रकाश डाला।

    संस्था के संयोजक और संचालक कवि देवमणि पांडेय ने कहा कि हरनोट जी की कहानियां पहाड़ के जीवन के चित्र इतने मार्मिक तरीक़े से सामने रखती हैं कि वे हमेशा के लिए हमारी स्मृति का हिस्सा बन जाती हैं। आभी भी ऐसी ही एक अविस्मरणीय कहानी है। पांडेय जी ने बताया कि चित्रनगरी संवाद मंच में हर रविवार जो साहित्यक आयोजन होते हैं उनमें देश के बहुत से बड़े लेखकों पर कार्यक्रम केंद्रित होते हैं। आज उसी कड़ी में एस आर हरनोट जी की उपस्थिति हमें गौरवान्वित कर रही है।

     

    कथाकार हरनोट का परिचय डॉ मधुबाला शुक्ला ने विस्तार से दिया। उन्होंने कहा कि यह हम सभी के लिए बेहद प्रसन्नता की बात है कि कई साहित्य सम्मानों से विभूषित लेखक हरनोट जी हमारे बीच हैं जिनकी कहानियां मुंबई यूनिवर्सिटी के साथ ही देश की कई अन्य यूनिवर्सिटीज में पढ़ाई जा रही हैं। उनके साहित्य पर 21 एमफिल और 11 पीएचडी हो चुकी हैं। वर्ष 2024 में इलाहाबाद, मुंबई, लखनऊ और मध्य प्रदेश रीवा विश्वविद्यालयों में पीएचडी के पंजीकरण हुए हैं।

     

    शुरुआत में हरनोट जी ने अपनी लेखन यात्रा के बारे में श्रोताओं से संवाद किया और पर्यावरण पर कुछ कविताएं भी सुनाईं। हरनोट जी ने कहा कि उनकी लेखन यात्रा काफी संघर्षपूर्ण रही जो रोजी रोटी के लिए नौकरी, पढ़ाई और सामाजिक कार्यों के साथ आज तक चली आ रही है। उन्होंने बताया कि पहाड़ और समाज के हर विषय को उन्होंने कहानियों में अभिव्यक्त किया है। उन्होंने इस तथ्य को रेखांकित किया कि आज विकास के नाम पर जो कुछ हो रहा है उससे जंगल और नदियों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। इसीलिए समय-समय पर हमें भीषण प्राकृतिक विभीषिका का सामना करना पड़ता है।

     

    क्योंकि हरनोट की कहानी “आभी” पर्यावरण और वन माफिया पर केंद्रित थी इसलिए ढाई घंटे का यह कार्यक्रम पर्यावरण विषय पर ही केंद्रित था। इस कार्यक्रम में जानेमाने कवि आलोचक अनूप सेठी, पत्रकार विवेक अग्रवाल और उपन्यासकार कथाकार गंगाराम राजी के साथ मुंबई के चालीस से अधिक लेखक और छात्र उपस्थित थे।

     

    प्रकृति और पर्यावरण पर केंद्रित कविताओं का पाठ डॉ कनकलता तिवारी, सत्यभामा सिंह, नंदिता माजी, अन्नपूर्णा गुप्ता ‘सरगम’, सीमा त्रिवेदी, बिट्टू जैन ‘सना’, डॉ दमयंती शर्मा, आशु शर्मा,अभिनेत्री शाइस्ता ख़ान और अभिनेता सौरभ मौजूद थे। विश्वभानु, मदन गोपाल गुप्ता, महेश साहू और यशपाल सिंह ‘यश’ ने किया। संचालक देवमणि पांडेय ने अपनी हिमाचल यात्रा के समय लिखी कविताएं सुनाईं।

  • हिमालय साहित्य मंच का भव्य आयोजन: राज्यपाल द्वारा पांच महिला रचनाकारों का सम्मान

    हिमालय साहित्य मंच का भव्य आयोजन: राज्यपाल द्वारा पांच महिला रचनाकारों का सम्मान

    शिमला 9 दिसम्बर, 2023

    हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल श्री शिव प्रसाद शुक्ल द्वारा ऐतिहासिक शिमला गेयटी थियेटर में हिमालय साहित्य एवं संस्कृति मंच द्वारा आयोजित साहित्य सम्मान समारोह में पांच महिला रचनाकारों को सम्मानित किया गया। सम्मानित रचनाकारों में वरिष्ठ लेखिका डॉ.नलिनी विभा ‘नाज़ली‘, डॉ.प्रेरणा ठाकरे, डॉ. देवकन्या ठाकुर, दीप्ति सारस्वत ‘प्रतिमा‘ और डॉ.देविना अक्षयवर शमिल हैं।

    राज्यपाल के साथ पूर्व आई.ए.एस अधिकारी व लेखक श्रीनिवास जोशी और सम्मानित रचनाकारों ने मंच सांझा किया। साहित्य सम्मान से अलंकृत होने के बाद सभी रचनाकारों ने रचना पाठ भी किए। यह जानकारी प्रख्यात लेखक व हिमालय साहित्य मंच के अध्यक्ष एस.आर.हरनोट ने आज शिमला में एक प्रैस नोट जारी कर मीडिया को दी।यह जानकारी प्रख्यात लेखक व हिमालय साहित्य मंच के अध्यक्ष एस.आर.हरनोट ने आज शिमला में एक प्रैस नोट जारी कर मीडिया को दी।

     

    इस आयोजन के मुख्य अतिथि राज्यपाल श्री शिव प्रसाद शुक्ल ने कहा कि हिमालय साहित्य मंच द्वारा आयोजित ‘महिला रचनाकार सम्मान समारोह‘ कई अर्थों मंें महत्वपूर्ण है। नारी के सम्मान में संस्कृत में एक श्लोक है–यस्य पूज्यंते नार्यस्तु तत्र रमन्ते देवताः अर्थात जहां नारी की पूजा होती है, वहां देवता निवास करते हैं। एक घर से लेकर सृष्टि की अवधारणा तक, केन्द्र में नारी ही है। मुझे प्रसन्नता है कि वर्तमान में नारी न केवल पितृसत्ता के दायरे से बाहर आ रही है बल्कि उसने पुरूषों के बराबर अपने को स्थापित किया है। यही कारण है कि हिन्दी साहित्य में आज स्त्री विमर्श प्रमुखता से विद्यमान है। हिमालय मंच विशेषकर मंच के अध्यक्ष एस.आर.हरनोट, जो न केवल एक जानेमाने लेखक ही है बल्कि सामाजिक कार्यकर्ता भी है, बधाई के पात्र हैं कि आज का यह साहित्यिक उत्सव ‘‘नारी सम्मान‘‘ को समर्पित किया है। इनमें वरिष्ठ और युवा महिला रचनाकार शामिल हैं। मैं सम्मानित पांचों महिला रचनाकारों को दिल की गहराईयों से बधाई और शुभकामनाएं देता हूं और आप सभी के उज्जवल भविष्य की कामना भी करता हूं। उन्होंने ने अपने उदबोधन में कहा कि एक लेखक अपने साहित्य के साथ साथ अपनी संस्कृति और परम्पराओं को बचाने के लिए बड़ा काम कर सकता है और उसे करना भी चाहिए। जहां अच्छा हो रहा है उसकी प्रशंसा जरूरी है और जहां आपको कोई शोषण अन्याय दिख रहा है वहां बोलना जरूरी है। एस आर हरनोट इसके उदाहरण हैं। हिमालय मंच पिछले कई सालों से साहित्य संस्कृति और पर्यावरण के लिए समर्पित है यह बहुत अच्छी बात है। इस सम्मान सत्र का मंच संचालन हिमाचल अकादमी के पूर्व सचिव व लेखक डॉ.कर्म सिंह द्वारा कुशलता से किया गया।

    हरनोट ने बताया कि सम्मान समारोह के पूर्व सत्र में एक बजे से चार बजे तक कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें शिमला सहित राज्य और बाहर के कई स्थानों से लेखक कवि सम्मिलत हुए जिन्होंने अपनी रचनाएं पढ़ीं। इस सत्र की अध्यक्षता उच्च अध्ययन संस्थान शिमला में बतौर नेशनल फेैलो काम कर रहे डॉ.आनंद कुमार ने की जबकि विशिष्ट अतिथि डॉ.हेमराज कौशिक, डॉ मस्त राम और डॉ.सत्य नारायण स्नेही थे।

     

    हिमालय मंच के अध्यक्ष ने जानकारी दी कि वरिष्ठ लेखिका डॉ.नलिनी विभा ‘नाज़ली‘ का नाम एक शायरा/गज़लकार के रूप में देश भर में प्रख्यात है। उनके अब तक 13 गज़ल संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं जिनमें दो पुस्तकें बच्चों के लिए भी शामिल हैं। हाल ही में उनका ग़ज़लों का वृहद् ग्रन्थ ‘दीवान-ए-नाज़ली‘ प्रकाशित हुआ है जिसमें उनकी पांच सौ के क़रीब ग़जलें संग्रहीत हैं। नाजली जी को प्रदेश ओर देश के अनेक पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। डॉ.प्ररेणा ठाकरे की मूल भाषा मलयालम है जबकि वे पिछले लगभग 25 सालों से हिन्दी की मंचीय कविता में बेहद सक्रिय हैं और अपने प्रदेश में एक सैलेब्रिटी की तरह लोकप्रिय हैं।हिन्दी साहित्य में पी.एच.डी डॉ0 प्रेरणा ठाकरे मध्य प्रदेश के नीमच में एक सरकारी कॉलेज में हिन्दी की अतिथि आचार्य हैं। उनकी अबतक कविता और गज़लों की चार और कहानी की एक पुस्तक प्रकाशित हैं। वे कई राज्य सम्मानों से अलंकृत हैं। डॉ.देव कन्या ठाकुर हिन्दी साहित्य और फिल्म निर्माण में सक्रिय हैं। अब तक अंग्रेजी और हिन्दी में पांच पुस्तकें प्रकाशित हैं और हिमाचल के कई दुर्लभ विषयों में कई फिल्मों का निर्माण कर चुकी है जिन्हें कई राज्य और राष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं। पिछले कई सालों से देवकन्या ठाकुर शिमला अंतराष्ट्रीय फिल्म फैस्टिवल का सफल संचालन कर रही है। दीप्ति सारस्वत ‘प्रतिमा‘ लेखन के साथ अध्यापन में रहते हुए हिन्दी की सेवा कर रही है।उनकी अब चार कविता और एक कहानी पुस्तक प्रकाशित हो चुकी है। साथ ही डिजिटल मीडिया में सकिक्र हैं। डॉ. देविना अक्षयवर मूल रूप से मोरिशस की निवासी हैं लेकिन जे.एन.यू में पीएचडी की उपाधि प्राप्त करने के बाद उन्होंने स्थायी निवास शिमला हिमाचल बना लिया है। वे फ्रैंच भाषा की विद्वान भी हैं। इन दिनों शिमला के प्रतिष्ठित कॉलेज सैंट बीड्स में हिन्दी की सहायक प्रोफेसर हैं। प्रवासी साहित्य को लेकर उनका अध्ययन हैं और वे कविता, कहानी और आलोचना में समान रूप से अपनी भूमिका निभा रही हैं। ऐसी चार युवा प्रतिभाओं को सम्मानित करने पर हिमालय मंच गौरवान्वित महसूस करता है।

  • प्रख्याल लेखिका व पत्रकार गीताश्री द्वारा एस.आर हरनोट की चार पुस्तकों का लोकापर्ण

    प्रख्याल लेखिका व पत्रकार गीताश्री द्वारा एस.आर हरनोट की चार पुस्तकों का लोकापर्ण

    हिमाचल के ऐतिहासिक गेयटी थियेटर सभागार में प्रख्यात लेखिका और पत्रकार गीताश्री ने जानेमाने लेखक एस.आर हरनोट की रचनाशीलता पर प्रकाशित तीन आलोचना पुस्तकों और एक कहानी संकलन का लोकार्पण किया। इस अवसर पर विशेष अतिथि के रूप में चर्चित लेखिका कवयित्री अणु शक्ति सिंह और संगीतकार आलोचक सुनैनी शर्मा भी उपस्थित रही।

     

    अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में गीताश्री ने कहा कि किसी लेखक की चार किताबें एक साथ लोकार्पित हों, ये एक बड़ी उपलब्धि है। हमारे समय के सजग, समर्थ कथाकार एस.आर.हरनोट का रचना संसार विपुल है और वे साहित्य -संपदा से संपन्न लेखक हैं जिनके सरोकार बड़े गहरे हैं जिनकी चिंतन दृष्टि इतिहास बोध से आती है. एक अन्वेषक की दृष्टि ही रचना को गांभीर्य और सार्थक बनाती है जो हरनोट में भरपूर मौजूद है। गीताश्री ने कहा कि हरनोट एक साहसिक लेखक है और जब समय “झूठ का दिग्विजय समय हो” तो ये चुनौतियां बड़ी हो जाती है। उन्होंने हरनोट की कहानियों के बहाने लेखकों और पत्रकारों पर हो रहे सियासी हमलों को लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा बताते हुए कहा कि ईमानदार और साहसी कलमगार की जुबान और कलम हमेशा लिखती और बोलती रहेगी। उन्होंने हरनोट की कहानियों में इको फेमीनिसम, प्रकृति, स्त्री और दलित विमर्श से लेकर पहाड़ी समाज और संस्कृति की बात करते हुए कहा कि यह बड़ी बात है कि हरनोट लेखक के साथ एक सोशियल और लिटरेरी एक्टिविस्ट भी है जिसे हर लेखक को होना चाहिए। हरनोट की निडरता और बेबाकी कई बार अचंभित करती है।

     

    अन्य वक्ताओं में अणु शक्ति सिंह ने जहां हरनोट की कहानियों पर विस्तार से बात की वहां कवि आलोचक जगदीश बाली ने ‘हरनोट एक शिनाख़्त पुस्तक‘ पर चर्चा की और उस बहाने नामवर सिंह, कमलेश्वर, दूधनाथ सिंह, विनोद शाही, सूरज पालीवाल, रोहिणी अग्रवाल, प्रशांत रमन रवि से लेकर श्रीनिवास श्रीकांत तक की अलोचकीय टिप्पणियों के उद्धरण दिए। । संगीतकार और लेखिका सुनैनी शर्मा ने हरनोट के उपन्यास नदी रंग जैसी लड़की पर अपना वक्तव्य दिया। डॉ.देविना अक्षयवर ने हरनोट के कहानी संग्रह ‘भागादेवी का चायघर‘ पर बहुत सार्थक और सशक्त वक्तव्य दिया जिसकी खूब सराहना हुई। डॉ.कर्म सिंह, पूर्व सचिव अकादमी ने हिमाचय मंच और हरनोट के व्यक्तित्व पर विस्तार से चर्चा की। और उनकी साहित्यिक यात्रा के कई अनूठे अनुभवों को साझा किया। मंच का कुशल संचालन करते हुए डॉ.स्नेही ने हरनोट के व्यक्तित्व और कृतित्व पर कविता रूप में एक बहुत सार्थक वक्तव्य भी दिया। डॉक्टर देव कन्या ठाकुर ने हिमालय मंच और हरनोट के साहित्य के लिए दिए जा रहे योगदान पर बात करते हुए सभी उपस्थित लेखकों और श्रोताओं का धन्यवाद किया। एस आर हरनोट की कहानियों पर हाल ही में पीएचडी की उपाधि प्राप्त डॉ. अभिद्विता गौतम ने भी कहानियों पर सार्थक वक्तव्य दिया और बिस्तर बताया कि उन्होंने हरनोट की कहानियां शोध के लिए क्यों चुनी।

     

    लोकार्पित पुस्तकों में प्रलेक प्रकाशन मुम्बई से प्रकाशित ‘एस.आर.हरनोट एक शिनाख़्त‘‘ आलोचना पुस्तक की परिकल्पना जितेन्द्र पात्रो की है जबकि संपादन प्रख्यात आलोचक डॉ. स्मृति शुक्ल ने किया है। पांच सौ पैंतीस पृष्ठ की इस पुस्तक में देश के जानेमाने लगभग 40 आलोचकों के आलेख प्रकाशित है जिसका फॉरवर्ड प्रसिद्ध आलोचक और पहल के संपादक ज्ञानरंजन ने लिखा है। दूसरी लोकार्पित पुस्तक ‘सजग कथाकार हरनोट‘ शीर्षक से देहरादून के प्रकाशक ‘समय साक्ष्य‘ ने प्रकाशित की है जिसका संपादन वरिष्ठ आलोचक और सेतु साहित्यिक पत्रिका के संपादक डॉ.देवेन्द्र गुप्ता ने किया है। तीसरी पुस्तक अंग्रेजी में ऑथर प्रैस दिल्ली ने छापी है जिसे डॉ.अभ्युदिता गौतम ने लिखा है। यह उनके पीएचडी थिसिज का सार भी है। उन्होंने अपना पीएचडी शोध हरनोट की अंग्रेजी में अनुवादित कहानी पुस्तक ‘केट्स टॉक‘ पर किया है जिसे प्रो0 मीनाक्षी एफ पॉल और डॉ.खेमराज शर्मा ने संपादित किया है और लंदन से कैम्ब्रिज स्कॉलर्ज प्रैस ने इसे प्रकाशित किया है। चौथी पुस्तक हरनोट का कहानी संग्रह ‘‘भागा देवी का चायघर‘‘ शीर्षक से थी जिसमें उनकी पहाड़ की संघर्षशील स्त्रियों पर नौ कहानियां संकलित है।

    इस अवसर पर इंदौरा से कार्यक्रम में पधारी सामाजिक कार्यकर्ता रचना पठानिया का स्वागत सम्मान मफलर टोपी पहनाकर किया गया। उपस्थित लेखकों बुद्धिजीवियों का धन्यवाद डॉक्टर देव कन्या ठाकुर द्वारा किया गया।

     

    पठानकोट इंदौरा जैसे दूरस्थ शहर से कार्यक्रम में पधारी युवा सोशियल एक्टिविस्ट का भी सम्मान किया गया।

     

    कार्यक्रम के समापन पर विशेषकर गीताश्री के आग्रह पर आर्यन हरनोट द्वारा निर्देशित और निर्मित लघु फिल्म कील को भी दिखाया गया जो हरनोट की कहानी कीलें पर आधारित है जिसकी सभी ने खूब प्रशंसा की।

     

    खचाखच भरे गेयटी सभागार में जहां शहर के वरिष्ठ और युवा लेखक पत्रकार बुद्धिजीवी शामिल थे वहां स्कूलों और विश्वविद्यालयों के छात्रों सहित उनके पंचायत क्षेत्र से भी बहुत से चाहने वाले मौजूद रहे। बहुत से लेखक श्रोता अन्त तक खड़े रहकर कार्यक्रम आनंद लेते रहे न। उपस्थित लेखकों में उच्च अध्ययन संस्थान शिमला के नेशनल फैलो प्रो. आनंद कुमार, पत्रकार प्रशांत मोहन, श्रीनिवास जोशी, डॉक्टर ओ सी हांडा, मीनाक्षी एफ पॉल, राकेश कुमार सिंह, नेम चंद अजनबी, ओम प्रकाश शर्मा, डॉक्टर विजयलक्ष्मी नेगी, शीला हरनोट, आर्यन हरनोट, जगत प्रसाद शास्त्री, रमेश, जगदीश गौतम, रीना भारद्वाज, डॉक्टर मस्त राम शर्मा, दीप्ति सारस्वत, वंदना राणा, नीता अग्रवाल, दिनेश शर्मा, आशुतोष, दिनेश गुप्ता, मिनर्वा बुक शॉप के मालिक साहित्य अनुरागी अग्रवाल जी, बीरेंद्र शर्मा, अश्वनी शर्मा, डॉक्टर विकास सिंह,अश्वनी कुमार, जगदीश कश्यप, मनमोहन धनी, राजेंद्र कंवर, यादव चंद, मोहन जोशी, संजय भारद्वाज, जवाहर कौल, अजेय शर्मा, कल्पना गांगटा, डॉक्टर रोशन लाल जिंटा, संदीप हरनोट, डॉ राजन तनवर, रचना तनवर, हरदेव धीमान, विनोद भारद्वाज, संजय शर्मा, जगबीर सिंघा, राजेश कुमार सिंह, समता जी, अमर उजाला के ब्यूरो प्रमुख सुरेश शांडिल्य जी, अश्वनी वर्मा, रोशन पाराशर, अभिषेक कश्यप, डॉक्टर कौशल्या ठाकुर, जगदीश शर्मा, सुमन धंजय, इंजीनियर वी के अग्रवाल, जगदीश गौतम सहित विश्वविद्यालय के अनेक छात्र, प्राध्यापक और बहुत से साहित्य प्रेमी थे। इस कार्यक्रम का आयोजन हिमालय साहित्य संस्कृति एवं पर्यावरण मंच द्वारा किया गया।