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  • Two Poetry Books Launched at Gaiety Theatre in Shimla

    Two Poetry Books Launched at Gaiety Theatre in Shimla

     

    Shimla, May 10

    Gaiety Theatre witnessed a literary celebration on Saturday as the Himalaya Sahitya Sanskriti Evam Paryavaran Manch organised the launch of two books by noted writer Deepti Saraswat ‘Pratima’, followed by a poetry session featuring young and senior poets.

    The books were formally released by Sanjeev Gandhi in the presence of renowned author S. R. Harnot and academician Prof. Meenakshi F. Paul.

    The first book, Antar Geet, is a collection of poems by Deepti’s late father Som Sharma ‘Som’, edited by Deepti herself. The second, Kagazi Prem, is her own poetry collection published by Urmil Prakashan.

    Speaking at the event, S. R. Harnot said it had been Deepti’s long-cherished dream to publish her father’s poems in book form. He added that Deepti Saraswat has remained actively involved in poetry, fiction and literary criticism and currently serves as a Hindi lecturer at Government Senior Secondary School Majhar in Himachal Pradesh. She has previously authored four poetry collections and a short story collection and has received several literary honours.

    During her address, Deepti Saraswat emotionally recalled her father’s literary journey and recited two of his poems. She also presented poems from her own collection.

    Chief guest Sanjeev Gandhi congratulated the author and organisers for the successful event and said writers have a major responsibility in today’s society. He remarked that literature not only raises its voice against social evils but also guides society towards positive change. Highlighting the role of youth, he urged young writers to use their creative expression to awaken social consciousness. Gandhi also recited one of his own poems during the programme.

    Prof. Meenakshi F. Paul spoke in detail about Antar Geet, while Dr. Dev Kanya Thakur reviewed Kagazi Prem, discussing the various shades of love reflected in the poems. Kalpana Gangta presented a review written by Dr. Devina Akshayvar.

    The programme was conducted by Dr. Rajan Tanwar. The second session, chaired by Anil Harta and Prof. Roshan Lal Jinta, featured poetry recitations by students, young poets and senior writers on diverse themes.

    Concluding the event, Indra Suryan thanked all guests, speakers, poets, media representatives and the staff of Gaiety Theatre for their support in making the event successful.

  • Kerala University Hosts Major Literary Event, Honours S.R. Harnot

    Kerala University Hosts Major Literary Event, Honours S.R. Harnot

    Translations and Film Screening Highlight National Seminar

    Shimla/ Kerala , March 27, 2026:

    A three-day national seminar organized by the Department of Hindi at Kerala University from March 24 to 26, 2026, concluded with several notable highlights, including the felicitation of eminent author S.R. Harnot, a screening of the film Keel, and the release of Malayalam translations of his literary works.

    The seminar, themed “The Role of Translation in Indian Literature,” featured S.R. Harnot as the Chief Guest during the inaugural session. Addressing the gathering, Harnot spoke extensively about his three works translated into Malayalam—Hidimb, Nadi Rang Jaisi Ladki, and Bhagadevi Ka Chayghar. He emphasized that translation acts as a bridge between languages, enabling a deeper understanding of diverse histories, cultures, and geographies.

    Harnot expressed gratitude for the affection and recognition he received in Kerala, comparing it to his home state, Himachal Pradesh. He also highlighted that Kerala has played a significant role in his literary journey, as the first PhD on his work was conducted at University College, Kerala University, in 2012. He further noted that his stories have been included in academic curricula at various levels in Kerala.

    The event was attended by Vice-Chancellor Prof. (Dr.) Mohanan Kunnummal, Head of the Hindi Department Prof. Herman, Senior Professor Dr. R. Jayachandran, and other distinguished faculty members. The Vice-Chancellor thanked Harnot for his presence and contribution.

    Dr. Indu K.V., Associate Professor, informed that the Malayalam translation of Harnot’s novel Hidimb was carried out by noted translator Dr. Mohanan V.T.V. and published by Samayam Books. The translation of Bhagadevi Ka Chayghar was done by Dr. Indu K.V., while Nadi Rang Jaisi Ladki was translated by Prof. (Dr.) Srilata Vishnu.

    On the second day, a film titled Keel, based on Harnot’s acclaimed story “Keelen,” directed and produced by actor Aryan Harnot, was screened. The film received an emotional response from the audience, followed by an interactive session with students and faculty.

    The seminar concluded with a valedictory session, where S.R. Harnot was again present as the Chief Guest. On this occasion, Prof. (Dr.) S.R. Jayashree of the Hindi Department was felicitated on her retirement, and students presented a cultural program in her honour.

    Dr. Indu K.V. also shared that the Malayalam translations of Harnot’s works will soon be formally released in Shimla by writers and translators from Kerala.

    The seminar was effectively anchored by research scholar Anuja, who provided insightful remarks throughout the session.

  • प्रख्यात लेखक एस आर हरनोट आधार साहित्य सम्मान से सम्मानित : यात्रा संस्मरण की नई कृति “कुंजोम” और लेखन की रचनाशीलता पर पल प्रतिपल के विशेषांक का लोकार्पण

    प्रख्यात लेखक एस आर हरनोट आधार साहित्य सम्मान से सम्मानित : यात्रा संस्मरण की नई कृति “कुंजोम” और लेखन की रचनाशीलता पर पल प्रतिपल के विशेषांक का लोकार्पण

     

    प्रख्यात साहित्यकार एस आर हरनोट को वर्ष 2024 के आधार साहित्य सम्मान से नवाजा गया है। पंजाब कला भवन के विशाल रंधावा सभागार में शनिवार को आधार साहित्य उत्सव के अवसर पर एक भाव समारोह में यह सम्मान दिया गया। वर्ष 2025 का आधार सम्मान कथाकार जयशंकर को मिला।

     

    कार्यक्रम की अध्यक्षता कवि, चित्रकार और पंजाब कला परिषद के चेयरमैन स्वर्णजीत सवी ने की। वरिष्ठ रंग निर्देशक रोबिन दास मुख्य अतिथि रहे। युवा आलोचक गीता कुमारी ने मंच संचालन किया। कार्यक्रम की शुरुआत जानीमानी गायिका और शोधछात्रा सीमा गौतम ने शब्द गाकर की जिसने सभागार को भावविभोर कर दिया।

     

    मुख्य वक्ता जेएनयू के प्रोफेसर लेखक देवेंद्र चौबे थे। चंबा से आए अलाोचक कवि प्रशांत रमण रवि ने हरनोट के कथा संसार पर विस्तार से बात की और पंचकूला से आए आलोचक अंकित नरवाल ने जयशंकर की कहानियों पर वक्तव्य दिया।

     

    सम्मान के बाद हरनोट ने अपने वक्तव्य में कहा कि जब आपको कोई पुरस्कार मिलता है तो आपकी जवाबदेही और बढ़ जाती है।

    यह पुरस्कार केवल लेखक को नहीं मिलता बल्कि यह परिवार के साथ संबंधित प्रदेश, पाठकों और आलोचकों को भी मिलता है जिनका लेखक की निर्मिती में योगदान रहता है। उन्होंने आधार प्रकाशन से अपने पारिवारिक संबंध बताए और कहा कि यदि 25 वर्ष पूर्व देश निर्मोही जी उनकी पुस्तक नहीं छापते तो आज वह इस मंच पर नहीं होते। उन्होंने प्रख्यात लेखक और पहल के संपादक ज्ञान रंजन जी को भी बहुत मन से याद किया जिन्होंने दारोश का ब्लर्ब लिखा था। हरनोट ने आगे कहा कि आज का सबसे जरूरी विमर्श पर्यावरण है और हमारे आसपास से अचानक चीजों का गायब हो जाना चिंतनीय है। मनुष्य की असंवेदनशीलता और सत्ताओं की क्रूरता ने इस पृथ्वी को बहुत नुकसान पहुंचाया है। हरनोट ने अपनी बात एक लंबी कविता से समाप्त की। उन्होंने आधार प्रकाशन के संचालक देश निर्मोही और उनकी अर्धांगिनी पूजा जी का भी इस भव्य आयोजन के लिए आभार व्यक्त किया।

     

    इस आयोजन में चंडीगढ़ के अतिरिक्त पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, दिल्ली और मुंबई से लेखक, रंगकर्मी, चित्रकार फिल्म निर्माता और शोध छात्र उपस्थित रहे। हिमाचल चंबा से प्रशांत रमन रवि, कुल्लू से अजेय, विद्रोही, लगन, सोलन से जगदीश कश्यप, राजन तनवर, दक्ष शुक्ला और उनकी अर्धांगिनी, शिमला से दीप्ति सारस्वत और स्वप्निल शामिल रहे जिनका Harnot ने विशेष आभार व्यक्त किया।

     

  • भाषा एवं संस्कृति विभाग ने राजभाषा पखवाड़ा के अवसर पर आयोजित की विभिन्न प्रतियोगिताएं

    भाषा एवं संस्कृति विभाग ने राजभाषा पखवाड़ा के अवसर पर आयोजित की विभिन्न प्रतियोगिताएं

    भाषा एवं संस्कृति विभाग जिला शिमला द्वारा राजभाषा पखवाड़ा-2025 के अवसर पर आज ऐतिहासिक गेयटी थियेटर के गोथिक हॉल मे जिला स्तरीय अंतर विद्यालय राजभाषा प्रतियोगिताओं में भाषण, कविता वाचन, राजभाषा एवं लोक संस्कृति पर का आयोजन करवाया गया। इन प्रतियोगिताओं मे 20 जिला शिमला के विभिन्न क्षेत्रों से विद्यालयों के विद्यार्थियों ने बढ़ चढ़कर भाग भाग लिया।
    कार्यक्रम के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में ज्योति राणा, अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी प्रोटोकॉल शिमला ने शिरकत की। उन्होने सभी विजेताओं को पुरस्कार राशि, प्रशस्तिपत्र व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया l इसके अतिरिक्त उन्होने सभी प्रतिभागियों को प्रतिभागिता प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित कर प्रोत्साहित किया।
    उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि हिंदी भाषा देश में हर जगह प्रयोग होने वाली भाषा है l उन्होंने कहा कि सरकार ने नई शिक्षा नीति में भी भाषा और गणित विषयों पर विशेष बल दिया है l उन्होंने कहा कि हर एक भाषा का हमारे जीवन में अलग महत्व रहता है और छात्रों को नई–नई भाषाओं को सीखने में रुचि रखनी चाहिए l इसके साथ ही हमें अपनी मातृभाषा का भी सम्मान करना चाहिए l उन्होंने भाषा एवं संस्कृति विभाग की प्रशंसा करते हुए कहा कि विभाग राजभाषा हिंदी के प्रचार–प्रसार के लिए बेहतरीन कार्य कर रहा है l
    ज्योति राणा ने छात्र-छात्राओं से हिंदी भाषा का प्रयोग करने का आवाहन किया। उन्होंने कहा कि आजकल आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए हम लोगों की निर्भरता मशीनों पर बढ़ती जा रही है और अपनी रचनात्मकता कम होती जा रही है इसलिए जरुरी है की हम लोग किताबें पढ़ें। उन्होंने बच्चों को आत्मविशव के साथ जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की।
    जिला भाषा अधिकारी शिमला अनिल हारटा ने मुख्यातिथि का स्वागत किया और उन्हें प्रतियोगिताओं की पूर्ण जानकारी दी l उन्होंने बताया कि भाषा एवं संस्कृति विभाग विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से वर्षभर भाषा और संस्कृति का संरक्षण और संवर्धन करने के लिए प्रयासरत है l उन्होंने कहा कि हिंदी भाषा 11 राज्यों और 3 केन्द्र शासित प्रदेशों की राजकीय भाषा है तथा हिमाचल प्रदेश भी हिंदी भाषी प्रदेश है।
    यह रहे विजेता
    अनिल हारटा ने जानकारी देते हुए बताया कि ”भारत का गौरव हिन्दी या कृत्रिम बुद्धिमत्ता और हिन्दी भाषा का भविष्य विषय पर आधारित भाषण प्रतियोगिता में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला रोहड़ू की रमनप्रीत ने प्रथम, निभा स्टेटा राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय पोर्टमोर द्वितीय तथा राजकीय वरिष्ठ उत्कृष्ट माध्यमिक विद्यालय सुन्नी की सिमरन ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। इसी प्रकार, बहुविकल्पीय राजभाषा प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय ढली की चेतना भंडारी प्रथम, साक्षी कुमारी राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय रोहड़ू  द्वितीय, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय मेहली की स्नेहा तथा राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय रोहड़ू की सुहाना ने संयुक्त रूप से तृतीय स्थान प्राप्त किया।
    कविता वाचन प्रतियोगिता में नंदनी कुमारी संभोता तिब्बतियन विद्यालय छोटा शिमला, आ‌रल जोकटा लोरेटो कॉन्वेंट स्कूल तारा हॉल, आंचल राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सुन्नी ने क्रमशः प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान पर रहे।
  • Unique program organized on the titles of SR Harnot’s stories in Mumbai: Devmani Pandey

    Unique program organized on the titles of SR Harnot’s stories in Mumbai: Devmani Pandey

    Shimla

     

    The creative dialogue with the renowned storyteller SR Harnot from Shimla on the titles of his books and stories was very interesting, which was praised by the audience present in the auditorium. No one had even thought that a subject like “titles of stories” could be so important and interesting. Behind the titles of his famous story books and stories like Darosh, Mitti Ke Log, Jeenkathi, Litton Block Gir Raha Hai, Hidimba, Keele, Fly Killer, Aabi, Death Live, Kinnar, Nadi Rang Jaisi Ladki etc., not only tradition, culture, and amazing stories were present, but all the topics being discussed in the present time were and are present….. which Harnot ji presented very well. This information was given by the famous lyricist and writer Devmani Pandey through a press release sent to Himachal Media.

     

    He said that in this program organized by Chitranagari Samvad Manch Mumbai on Sunday evening, 16 February 2025, at Mrinaltai Hall, Keshav Gore Memorial Trust, Goregaon, the audience also asked him questions. Harnot told that the subjects of the stories are unique and new, on which it was not easy to write stories. Dr. Madhubala Shukla told in the introduction of Harnot that his stories are being read not only in the country but also abroad, and research is being done continuously in many universities. His stories are being taught in the curriculum in 13 universities. Madhu Bala informed that Harnot’s much-talked-about story “Billiyan Batiyati Hai” is being taught in Mumbai University, and here two girl students are also doing PhDs on his literature. Harnot’s story collection “Cheh Lambi Kahaniyaan,” which came to the World Book Fair from Vani Prakashan, and the book “Pradhanit Kahaniyaan” published by Aadhar Prakashan were also introduced.

     

    Devmani Pandey further said that under Dharohar, actor Arun Shekhar presented Agyeya’s famous poem Asadhya Veena in an effective manner. A kavi goshthi was also organized. The program concluded with a speech and poem by renowned poet Anup Sethi.

     

    Many writers, poets, actors, and theatre artists from Mumbai and outside were present in this event, including Vibha Rani, Ajit Rai, Vibha Rashmi, Sonali Bose, Pratima Singh, Pragya Mishra, Ambika Jha, Shobha Swapnil, Poonam Vishwakarma, Krishna Bansal, Qamar Hajipuri, Jawahar Lal Nirjhar, Taj Mohammad Siddiqui, Rishi Upadhyay, Vishu, Dr. Sumanika Sethi, Dr. R.S. Rawat, poetess Shobha Swapnil, Chandrakant Joshi, journalist Irfan Sami, and journalist Hargovind Vishwakarma, who enriched the event with their presence.

  • केरल विश्वविद्यालय में हरनोट की तीसरी कहानी “आभी” पाठयक्रम में शामिल

    केरल विश्वविद्यालय में हरनोट की तीसरी कहानी “आभी” पाठयक्रम में शामिल

    शिमला /केरला

     

    प्रख्यात लेखक एस आर हरनोट की बहुचर्चित कहानी “आभी” केरल विश्वविद्यालय के “चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम बीए माइनर” के लिए तैयार किए गए हिंदी पाठ्यक्रम में शामिल की गई है। कहानी आभी नमक एक चिड़िया की है जो खुली जिला के जालोरी पास से आठ किलोमीटर दूर साढ़े ग्यारह हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित सरेओलसर झील को साफ रखती है और जैसे ही कोई तिनका या पत्ता गिरता है वह उसे उठा लेती है। इस कहानी के माध्यम से लेखक ने वन माफिया का पर्दा फाश तो किया है साथ ही पर्यावरण की रक्षा और स्वच्छता का भी बड़ा संदेश दिया है।

     

    अंग्रेजी अनुवाद में यह कहानी हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के अंतर्गत बीए में भी पढ़ाई जाती है और कैंब्रिज पब्लिशिंग लंदन से प्रकाशित हरनोट के अंग्रेजी कहानी संग्रह “कैट्स टॉक” में भी संगृहीत है। कहानी का अनुवाद प्रो. मीनाक्षी एफ पॉल ने किया है। हरियाणा की एक संस्था ने तो इसके कई सौ मंचन कर दिए हैं। हरनोत के साहित्य पर हो रहे MPhil और पीएचडी के शोधों में यह कहानी प्रमुखता से शामिल है।

    इससे पूर्व केरल विश्वविद्यालय के छात्र एम.ए. में कहानी “मां पढ़ती है” पढ़ रहे हैं और केरल शिक्षा विभाग के उच्च माध्यमिक विद्यालयों के पाठयक्रम में कहानी “एम डॉट कॉम ” पिछले कई सालों से पढ़ाई जा रही है। यही कारण था कि पिछले दिनों बीस लेखकों और प्रोफेसरों का एक शिष्टमंडल जो शिमला आया था उसके कई सदस्य हरनोट को मिलने घर पहुंचे थे और उनका सम्मान किया था।

     

    पाठयक्रम की यह पुस्तक “गल्पतरू” शीर्षक से राजकमल प्रकाशन ने हाल ही में छात्रों के लिए प्रकाशित की है जिसका संपादन डॉ.स्मिता आर नायर, लेफ्टिनेंट डॉ.शबाना हबीब और डॉ. मंजू के एन द्वारा किया गया है। देश के छः प्रख्यात लेखकों.. चित्रा मुद्गल, ममता कालिया, ॐ प्रकाश वाल्मीकि, हरिशंकर परसाई, जय प्रकाश कर्दम और सफिया सिद्धिकी के साथ यह कहानी शामिल है।

     

    सुखद संयोग है कि मां पढ़ती है और एम डॉट कॉम दोनों कहानियां आधार प्रकाशन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा प्रकाशित मेरे बहुचर्चित कथा संग्रह “जीनकाठी” में संकलित है जबकि आभी लिटन ब्लॉक गिर रहा है संग्रह में।

     

    स्मरण करवा दें कि पिछले सप्ताह ही हरनोट की एक अन्य कहानी “नदी गायब है” डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय, छत्रपति संभाजीनगर, औरंगाबाद महाराष्ट्र में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत स्नातक प्रथम वर्ष के हिंदी पाठ्यक्रम में ली गई है जिसे लोकभारती द्वारा प्रकाशित पुस्तक “कथा नवरंग” में संकलित किया है। इस तरह अब देश की लगभग 14 विश्वविद्यालयों के पाठयक्रम में Harnot की कहानियां पढ़ाई जा रही है।

  • एस आर हरनोट की बहु चर्चित कहानी “कीलें” पर आधारित नाटक के मंचन को प्रथम स्थान

    एस आर हरनोट की बहु चर्चित कहानी “कीलें” पर आधारित नाटक के मंचन को प्रथम स्थान

     

    हरिपुर कॉलेज, मनाली के छात्रों ने 30 कॉलेजों के नाटकों में हासिल किया पहला पुरस्कार।

     

    कहानी “कीलें’ पर आधारित नाटक ने हिमाचल

    विश्वविद्यालय यूथ फेस्टिवल में 30 कॉलेजों में प्रथम स्थान प्राप्त किया है I हरिपुर कॉलेज मनाली के बच्चों ने हरीश ठाकुर के निर्देशन में इस कहानी का मंचन किया था। कहानी का रूपांतरण रंगकर्मी हितेश भार्गव ने किया है।

    कीलें हिमाचल के सुप्रसिद्ध लेखक एस. आर. हरनोट की कहानी पर आधारित नाटक है, जो हिमाचली परिवेश में रचा-बुना गया है. यह नाटक सांकेतिक रूप से समाज में घट रही समसामयिक घटनाओं के प्रति बहुत कुछ कह जाता है और बहुत ही सरलता और सहजता से दर्शकों के सामने भावुकता का समंदर उड़ेल कर रख देता है. नाटक इंसानी प्रवृतियों पर कुठाराघात करता है. क्योंकि हिमाचल अपनी देव संस्कृति और परम्पराओं के लिए प्रसिद्ध है इसलिए देवी देवता हमारे पहाड़ी समाज और संस्कृति के अहम् हिस्सा हैं. हमारे विश्वास और आस्था के मुख्य केंद्र हमारे देवी देवता हैं. इन्हीं हजारों देवी देवताओं में से कुछ देवता ऐसे भी हैं। जिनका कोई नाम लेना तक पसंद नहीं करता, न कोई उनके बारे में बात करता है और न ही कुछ बताता है. लोग अपनी स्वार्थ सिद्धियों के लिए इन देवताओं का गलत्त उपयोग करने से भी नहीं हिचकिचाते. एक भोले व्यथित मन की व्यथा किस तरह एक नृशंस देवता को नाटक के अंत में एक नायक देवता बना देती है और नाटक एक प्रदेश या देश का न रह कर वैश्विक हो जाता है। इसी घटनाक्रम पर आधारित है नाटक ‘कीलें’.

     

    कीलें एस आर हरनोट की बहुचर्चित कथा पुस्तक है जिसका टाइटल इसी कहानी पर आधारित हैं। इसे वाणी प्रकाशन ने प्रकाशित किया है। इस कहानी पर आर्यन हरनोट, जो फिल्म इंडस्ट्री मुंबई में अभिनेता हैं, ने “कील” नाम से लघु फिल्म भी बनाई है जिसे कई राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं।

  • अवांछित लोगों द्वार सचिवालय के स्थित मारलब्रो हाउस में ताले तोड़ कर घुसपैठ की कोशिश

    अवांछित लोगों द्वार सचिवालय के स्थित मारलब्रो हाउस में ताले तोड़ कर घुसपैठ की कोशिश

    शिमला, SR हरनोट

    शिमला और प्रदेश में अवैध घुसपैठ और गलत प्रोटेक्शन के विरुद्ध आंदोलन को देखते हुए है संगीन मामला।

    पिछले कल 22 सितंबर, 2024 को छोटा शिमला सचिवालय के नीचे फ्लावर डेल के रास्ते स्थित चार मंजिला मारलब्रो हाउस की बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर की पिछली एंट्रेंस के गेट के ताले तोड़ कर दो अवांछित लोगों ने अपने ताले लगाकर घुसपैठ करने का प्रयास किया। जब ग्राउंड फ्लोर के मालिक ने उन्हें खुदाई करते देखा तो उनको तुरंत वहां से चले जाने को कहा। जब पूछताछ की तो इन दो लोगों ने अपने को मजदूर बताया और कहा कि किसी चौहान ने उनको ऐसा करने को कहा। उन्होंने यह भी बताया कि वे सराहनपुर के रहने वाले हैं और करोना के बाद अब शिमला आए हैं। वे और कोई पहचान अपनी नहीं बता पाए। जब वे मालिक से बहस करते रहे तो शिकायत छोटा शिमला पुलिस से फोन पर और व्हाट्सएप से की गई जिसपर पुलिस ने तुरंत कार्यवाही करके बेसमेंट से इनको निकाल दिया।

     

    मारलब्रो हाउस का ग्राउंड फ्लोर मशहूर लेखक एस आर हरनोट ने वर्ष 2018 में खरीदा था जिसकी स्थिति बेसमेंट सहित बहुत खराब थी। बेसमेंट में रात को कुछ अवांछित तत्व वहां घुस कर शराब और नशा करके हुडदंग मचाते थे और अवैध तरीके से खुदाई करते थे। हरनोट ने उस समय छोटा शिमला पुलिस और आयुक्त नगर निगम को इसकी शिकायत की और तुरंत एक्शन लिया गया। पुलिस और नगर निगम ने उन्हें बेसमेंट को प्रोटेक्ट करने की सलाह दी जिसके बाद बारीक जाली से इसे बाहर से बंद कर दिया। गौरतलब है कि यह बेसमेंट वर्ष 2015 से पूर्व से ही खुली थी जिसमें नशेड़ियों और कुत्तों का राज था।

     

    पुलिस के जाने के बाद शाम के समय एस आर हरनोट को किसी कौशल का धमकी के अंदाज में फोन आया जिसने बताया कि वह सरकार से बड़ा अधिकारी सेवानिवृत है और कई कमेटियों का मेंबर है। साथ बड़ा बिल्डर भी है। युक्त ग्राउंड फ्लोर उसने पूर्व मालिक गुप्ता जी को बेचा था जिनसे इसे हरनोट ने खरीदा। इस व्यक्ति ने इस बेसमेंट के बारे में कहा कि उसके पास उसकी registry है। हरनोट ने आश्चर्य से कहा कि यह बिलकुल नई बात है की शिमला में बेसमेंट की रजिस्ट्री भी किसी के नाम होती है….?

     

    इस घर में हरनोट ने बहुत सुंदर और बड़ी लाइब्रेरी बनाई है। जिस तरह की अवैध घुसपैठ के खिलाफ पूरे हिमाचल में बवाल मचा है उसके दृष्टिगत इस तरह का यह बहुत संगीन मामला है। हरनोट ने अपनी शिकायत की प्रतियां एसपी शिमला और आयुक्त नगर निगम को भी सूचनार्थ दी है। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि बाहर से आने वाले इन बिना पहचान के अवांछित तत्वों को शिमला और हिमाचल में शह और प्रोटेक्शन कौन रसूखदार लोग दे रहे हैं जो कहीं भी जाकर ताले तोड़कर कब्जा कर रहे है। हरनोट ने डरी हुई आवाज में मीडिया को बताया कि इस घटना से उनका परिवार सकते में हैं। पुलिस प्रशासन को इस मामले की तह तक जाना चाहिए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करनी चाही। जिन लोगों ने ताले तोड़, और किस की शह पर यह वारदात अंजाम दी गई उसके खिलाफ भी सख्त कार्यवाही होनी चाहिए।

     

     

  • सिहासन खाली करो कि जनता आती है

    सिहासन खाली करो कि जनता आती है

     

    एस आर हरनोट, शिमला

    हिमाचल प्रदेश के मंडी से सांसद बनी प्रख्यात अभिनेत्री कंगना रनौत को चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर तैनात CISF की महिला सिपाही ने जिस तरह थप्पड़ मारा उसे किसी भी तरह जायज नहीं ठहराया जा सकता है। और यह और भी गलत है कि थप्पड़ मारने वाली सिपाही कुलविंदर कौर है जिसके जिम्मे लोगों की सुरक्षा है। वो कंगना के किसान आंदोलन पर दिए गए बयान से आहत थी। हमारे साथ आए दिनों बहुत सी आहत कर देने वाली घटनाएं होती रहती है परंतु इसका यह कतई मतलब नहीं कि हमें इस तरह गैर कानूनी तरीके से बदला लेना चाहिए……?

    परंतु इसे आज के अभद्र, बिगड़ते, झूठे और भ्रष्ट राजनीतिक माहौल की दृष्टि से देखें या सोचे तो किसी भी उन राजनीतिज्ञों के लिए आने वाला समय बिलकुल अच्छा नहीं है जिन्होंने अपने को जनता से ऊपर समझ लिया है। यहां दर्द मां को दिए कंगना के गलत बयान का था लेकिन देश में जिस तरह से हमारे राजनेताओं ने भाषा की शालीनता को खत्म कर दिया है वह घोर निंदनीय तो है लेकिन जो लोग उससे आहत हो रहे हैं उनके मन भयंकर आक्रोश से कुलविंदर कौर के मन जैसे है। इन चुनाव में तो राजनेताओं ने अभद्रता की भी सीमाएं नहीं रहने दी है।

    सोचिए उन युवाओं का जो डिग्रियां लेकर सड़कों पर हैं, मजदूरों के हाथों में काम नहीं है, किसानों के पास गले में रस्सियां डालने के सिवा शेष क्या बचा है और लोग मंहगाई से कितने परेशान हैं। छोटे दुकानदार जी एस टी के चक्करों में उलझे हैं, सच बोलने वालों की मंजिलें जेलें तय कर दी गई हैं, दलित और वंचित जगह जगह अपमानित हो रहे हैं। न्याय के साथ साथ अफसरों और राजनेताओं की संवेदनाएं तकरीबन समाप्ति पर है। वोट के लिए जो आपके दर पर नाक रगड़ते आते हैं, आमजन का मिलना उनसे सत्तासीन होने के बावजूद दुर्लभ है। और जिस तरह हमारे राजनेता ईश्वर के अवतार होने लगे हैं, पार्टी या जनता से ऊपर होने लगे हैं, संविधान से ऊपर होने लगे हैं, सम्मान और स्नेह की जगह नफरतें फैलाने में सारे रिकॉर्ड दरकिनार हो गए हैं…..इससे आमजन अब परेशान ही नहीं है उन सभी के भीतर एक कुलविंदर कौर देखी और महसूस की जा सकती है जो आने वाले समय के लिए तमाम राजनेताओं को खतरे की घंटी है।

    आज 1950 में लिखी रामधारी सिंह दिनकर की कविता की पंक्तियां अनायास ही याद आ रही है…..

    सिहासन खाली करो कि जनता आती है…..

    और आप इस पूरी कविता को यहां पढ़ सकते हैं…….झूठ, अन्याय, धोखेबाजी, भ्रष्टाचार, दबंगता, चालाकियां ज्यादा दिन नहीं चलती…..हमारे नेता और ब्यूरोक्रेट्स भूल रहे हैं कि किसी भी देश को वहां की जनता ही चलाती है….सत्ता तो रंगमंच है। इसलिए अभी भी समय है, भाषण दीजिए लेकिन भाषा की शालीनता रखिए और आमजन की मुश्किलों को समझिए जिसके लिए आप सरकारों में आते हैं, सिहासनों पर विराजमान होते हैं।

    कंगना हिमाचल की बेटी है। प्रख्यात अभिनेत्री है और अब सांसद भी। भले ही कुलविंदर कौर को कुछ भी सजा मिले, वह मिलेगी भी, क्योंकि उनके विरोध का तरीका गलत था, परंतु यह थप्पड़ अब तमाम उन राजनेताओं को याद रख लेना चाहिए जो अपने को ईश्वर समझने लगे हैं। जानता से ऊपर।

    कविता…जो की  #रणधारी सिंह दिनकर

    सदियों की ठंढी-बुझी राख सुगबुगा उठी,
    मिट्टी सोने का ताज पहन इठलाती है;
    दो राह,समय के रथ का घर्घर-नाद सुनो,
    सिंहासन खाली करो कि जनता आती है।

    जनता?हां,मिट्टी की अबोध मूरतें वही,
    जाडे-पाले की कसक सदा सहनेवाली,
    जब अंग-अंग में लगे सांप हो चुस रहे
    तब भी न कभी मुंह खोल दर्द कहनेवाली।

    जनता? हां,लंबी – बडी जीभ की वही कसम,
    “जनता,सचमुच ही, बडी वेदना सहती है।”
    “सो ठीक,मगर,आखिर,इस पर जनमत क्या है?”
    ‘है प्रश्न गूढ़ जनता इस पर क्या कहती है?”

    मानो,जनता ही फूल जिसे अहसास नहीं,
    जब चाहो तभी उतार सजा लो दोनों में;
    अथवा कोई दूधमुंही जिसे बहलाने के
    जन्तर-मन्तर सीमित हों चार खिलौनों में।

    लेकिन होता भूडोल, बवंडर उठते हैं,
    जनता जब कोपाकुल हो भृकुटि चढाती है;
    दो राह, समय के रथ का घर्घर-नाद सुनो,
    सिंहासन खाली करो कि जनता आती है।

    हुंकारों से महलों की नींव उखड़ जाती,
    सांसों के बल से ताज हवा में उड़ता है,
    जनता की रोके राह,समय में ताव कहां?
    वह जिधर चाहती,काल उधर ही मुड़ता है।

    अब्दों, शताब्दियों, सहस्त्राब्द का अंधकार
    बीता गवाक्ष अंबर के दहके जाते हैं
    यह और नहीं कोई,जनता के स्वप्न अजय
    चीरते तिमिर का वक्ष उमड़ते जाते हैं।

    सब से विराट जनतंत्र जगत का आ पहुंचा,
    तैंतीस कोटि-हित सिंहासन तय करो
    अभिषेक आज राजा का नहीं,प्रजा का है,
    तैंतीस कोटि जनता के सिर पर मुकुट धरो।

    आरती लिये तू किसे ढूंढता है मूरख,
    मन्दिरों, राजप्रासादों में, तहखानों में?
    देवता कहीं सड़कों पर गिट्टी तोड़ रहे,
    देवता मिलेंगे खेतों में, खलिहानों में।

    फावड़े और हल राजदण्ड बनने को हैं,
    धूसरता सोने से श्रृंगार सजाती है;
    दो राह,समय के रथ का घर्घर-नाद सुनो,
    सिंहासन खाली करो कि जनता आती है।

  • हिमालय मंच की कुफरी ललित कैफे में साहित्यिक गोष्ठी और चिड़ियाघर का भ्रमण

    हिमालय मंच की कुफरी ललित कैफे में साहित्यिक गोष्ठी और चिड़ियाघर का भ्रमण

     

     

    साहित्य, पर्यावरण और बेजुबान दोस्तों के साथ संवाद की जरूरी यात्रा।

    11 अप्रैल 2024

    हिमालय साहित्य मंच द्वारा हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम के खूबसूरत ललित कैफे (चीनी बंगलों) में एक साहित्यक गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें मंच के सदस्य अनिल शर्मा के कविता संग्रह “खिड़की से झांकता गांव) का लोकार्पण हिमालय मंच के अध्यक्ष एस आर हरनोट और अन्य सदस्यों के कर कमलों द्वारा किया गया। सदस्य लेखकों में जगदीश बाली, रोशन लाल जिंटा, गुलपाल वर्मा, दीप्ति सारस्वत, जगदीश कश्यप, हितेंद्र शर्मा , कल्पना गांगटा, सिकंदर कुमार, हेम लता, अनिता दत्ता, मनसव जिंटा उषा शोना, स्नेहा हरनोट इस लोकार्पण में शामिल रहे। अनिल शर्मा की ये चौथी पुस्तक है।

    इस अवसर पर हरनोट ने अनिल शर्मा को बधाई दी और सभी सदस्यों का आभार भी व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि लेखकों की अपनी पहचान केवल अच्छा लिखने से ही बनती है जिसके लिए निरंतर अध्ययन और अभ्यास जरूरी है। आज कई लेखकों ने हिमालय मंच के बैनर में पहलीबार मंच सांझा किया।

    इस अवसर पर लेखकों ने फिल्म अभिनेता मनोहर सिंह और संविधान निर्माता भारत रत्न भीमराव आंबेडकर को भी स्मरण किया जिनकी जयंतियां क्रमशः 12 और 14 अप्रैल, 2024 के दिन हैं।

    इस अवसर पर वन विभाग कुफरी में कार्यरत श्री सुख राम, रेंज ऑफिसर और उनके कर्मचारियों के सानिध्य में कुफरी चिड़िया घर का भी लेखकों ने भ्रमण किया और कई प्रजातियों के जानवरों और पक्षियों का अवलोकन किया। यह एक तरह की पर्यावरण यात्रा भी थी।

     

    अंतिम सत्र कवि गोष्ठी का रहा जिसकी अध्यक्षता जानेमाने गीतकार, कवि गुलपाल वर्मा ने की। इसमें अनिल शर्मा ने अपनी लोकार्पित पुस्तक में से कई कविताओं का पाठ किया। और साथ अन्य कवियों ने कविताएं सुनाई। गुलपाल वर्मा ने कई गीत गाकर समा बांध दिया और कविता भी सुनाई।

     

    मंच संचालन खूबसूरत टिप्पणियों के साथ जगदीश बाली ने किया। सभी सदस्यों की राय थी कि इसके बाद कई ऐसे ही सुंदर स्थलों में स्थानीय लोगों के साथ संवाद और गोष्ठियां होती रहेगी।

     

    साहित्य, पर्यावरण और बेजुबान दोस्तों से बतियाने की यह अद्भुत यात्रा थी।