हिमाचल प्रदेश विवि और प्रदेश के 140 कालेजों में इस साल नई शिक्षा नीति को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए तैयारियां शुरू हो गई है। अप्रैल माह से शिक्षण संस्थानों में नया सत्र शुरू हो जाएगा। ऐेसे में यूजीसी के निर्देशों के बाद इस साल शिक्षण संस्थानों में फीस रिफंड पॉलिसी भी लागू की जाएगी। कुछ यूनिवर्सिटी और उच्च शिक्षा संस्थानों में स्टूडेंट्स को फीस वापस नहीं की जा रही है। इसकी शिकायतें लगातार यूजीसी को मिल रही थी। खासकर कोविड के समय में ऐसे कई मामले सामने आए। एडमिशन कैंसिल करवाने पर उनकी फीस का एक बड़ा हिस्सा संस्थान वापस नहीं कर रहा था। इस तरह की कई शिकायतों के बाद यूजीसी ने सख्त रुख अपनाते हुए चेतावनी जारी की है। यूजीसी ने कहा कि हर यूनिवर्सिटी को फीस रिफंड पॉलिसी को लागू करना होगा। साथ ही छात्रों के ओरिजिनल डॉक्यूमेंट्स भी वापस करने होंगे। कोई भी यूनिवर्सिटी छात्रों के ओरिजिनल डॉक्यूमेंट्स को वापस देने से इनकार नहीं कर सकती है। यूजीसी ने कहा है कि जो यूनिवर्सिटी इन नियमों का उल्लंघन करेगी, उनको मिलने वाली ग्रांट पर रोक लग सकती है और अगर कोई कालेज या संस्थान इन नियमों को नहीं मानता तो ऐसी स्थिति में संबंधित यूनिवर्सिटी को उस कालेज की मान्यता वापस लेने की भी सिफारिश की जा सकती है।
सत्र 2022-23 के लिए यूजीसी ने नियम बनाया है, जो छात्र 31 अक्तूबर तक किसी संस्थान में अपना एडमिशन कैंसल करवाएंगे या माइग्रेशन होगा तो छात्र की फीस में कोई कटौती नहीं की जाएगी और उसकी पूरी फीस रिफंड होगी। साथ ही कोई चार्ज भी नहीं काटा जाएगा। वहीं, पहली नवंबर से 31 दिसंबर तक जो छात्र एडमिशन कैंसल करवाएंगे या दूसरी जगह शिफ्ट होंगे, उनके द्वारा जमा करवाई गई फीस में से केवल 1,000 रुपए ही कटेंगे। साथ ही 1,000 रुपए प्रोसेसिंग फीस के रूप में काटे जाएंगे। इसके अतिरिक्त संस्थान को सारी फीस लौटानी होगी। इन नियमों को नहीं मानने वाले संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की सिफारिश होगी।



