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जनेडघाट में क्योंथल सीएलएफ की वित्तीय बैठक में पारदर्शिता और महिला सशक्तीकरण पर विशेष बल

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सरकारी योजनाओं की जानकारी देकर महिलाओं को उनकी जिम्मेदारियों से कराया अवगत

 

शिमला 18 अक्टूबर। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के अंतर्गत जनेडघाट में क्योंथल क्लस्टर लेवल फेडरेशन (सीएलएफ) की वित्तीय बैठक अध्यक्ष आयोजित की गई। जिसकी अध्यक्षता सीएलएफ की अध्यक्ष अनिता शर्मा ने की । उन्होने बताया कि इस बैठक में सीएलएफ के अंतर्गत आने वाले विभिन्न ग्राम संगठनों (वीओ) से जुड़ी महिलाओं ने भाग लिया। जिसमें वित्तीय प्रबंधन, आय-व्यय का लेखा-जोखा, लेन-देन में पारदर्शिता, सामाजिक अंकेक्षण और महिला सशक्तीकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही, महिलाओं को सरकारी योजनाओं की जानकारी देने के साथ ग्राम संगठनों के संचालन में उनकी भूमिका और जिम्मेदारियों से भी अवगत कराया गया।

बैठक में राज्य सामाजिक अंकेक्षण इकाई, हिमाचल प्रदेश के निदेशक रविंद्र शर्मा, जिला शिमला के जिला संसाधन व्यक्ति कपिल चौहान, लेखाकार शिवानी शोंगी और जोगिंदर ठाकुर विशेष रूप से उपस्थित रहे। अधिकारियों ने महिलाओं को सामाजिक अंकेक्षण की अवधारणा, इसके उद्देश्यों और प्रक्रिया की जानकारी देते हुए विकास कार्यों की निगरानी में समुदाय की सक्रिय भागीदारी के महत्व को रेखांकित किया।

उन्होंने महिलाओं को सामाजिक अंकेक्षण के दौरान उनके अधिकारों, कर्तव्यों और जिम्मेदारियों के बारे में विस्तार से बताया। इसके अतिरिक्त, वीबी-जी राम जी योजना तथा कामगार विभाग से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां भी साझा की गईं, ताकि महिलाएं विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के साथ उनके प्रभावी क्रियान्वयन में भी अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सकें।

एनआरओ कुटुंबश्री की मेंटर सावित्री ने पंचायती राज संस्थाओं और सामुदायिक आधारित संगठनों के बीच समन्वय एवं अभिसरण की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पंचायतों और महिला संगठनों के बीच बेहतर तालमेल से ग्रामीण विकास की गतिविधियों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

एनआरएलएम मिशन एग्जीक्यूटिव वैशाली और एरिया कोऑर्डिनेटर परवीन कुमारी ने ग्राम संगठनों की विभिन्न उप-समितियों के कार्यों, भूमिकाओं और जिम्मेदारियों की जानकारी दी। उन्होंने महिलाओं को उत्पादक समूहों , आजीविका संवर्धन से जुड़ी योजनाओं तथा विकास खंड में संचालित विभिन्न गतिविधियों से अवगत कराया। साथ ही, ग्राम संगठनों के वित्तीय रिकॉर्ड को व्यवस्थित रखने, आय-व्यय का उचित लेखा-जोखा तैयार करने और सामूहिक प्रयासों के माध्यम से आजीविका के नए अवसर विकसित करने पर जोर दिया।

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