-3732 मरीजों को निशुल्क उपलब्ध करवाई गईं कानों की मशीनें
डाडासीबा-
जसवां-परागपुर क्षेत्र को मोतियाबिंद मुक्त करने का संकल्प लेकर चले कैप्टन संजय पराशर के मेडीकल कैंपों में विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के बुजुर्गों को फायदा मिलता हुआ दिखाई दे रहा है। अब तक पराशर 54 मेडीकल कैंपों का आयोजन किया जा चुका है। अप्रैल माह के अंत तक संजय कुल 67 मेडीकल कैंप लगाने जा रहे हैं।
दरअसल घर-द्वार पर चिकित्सा शिविर लगने के बाद बुजुर्ग अपने गांव या आसपास के क्षेत्र में ही निशुल्क में चेकअप करवा रहे हैं तो उसी वक्त उन्हें चश्मा व दवाईयां भी उपलब्ध हो जाती हैं। इसके साथ ही मोतियाबिंद ऑपरेशन करवाने वाले मरीजों को अपने निवास स्थान से आने व जाने के लिए वाहन की निशुल्क सुविधा पराशर द्वारा प्रदान की ही जा रही है। साथ में दवाई, भोजन और ठहरने तक की व्यवस्था भी की जाती है। चश्मे से लेकर आपरेशन तक निःशुल्क सुविधा मिलने का फायदा ग्रामीण क्षेत्रों के रोगी ज्यादा उठा रहे हैं। अमूमन मोतियाबिंद ग्रामीणों में अधिक होता है। इस समस्या को ऑपरेशन के जरिए ही हटाया जा सकता है। बड़ी बात यह भी रही कि मेडीकल कैंपों में सबसे ज्यादा आंखों की चेक अप के ही मरीज आए। अब तक संजय पराशर के साैजन्य से आयोजित इन स्वास्थ्य शिविरों में 23734 मरीजों ने आखों की जांच करवाई, जिसमें चिकित्सा विशेषज्ञों ने 3484 मरीजों को मोतियाबिंद का आपरेशन करवाने की सलाह दी। वहीं, 7390 मरीजों ने अपने कानों की जांच करवाई तो 3732 मरीजों को कानों को सुनने वाली मशीनें भी निशुल्क दी गई हैं। 14980 मरीजों को आई ड्रॉप्स प्रदान किए गए। इसके अलावा 5881 मरीजों के फ्री में इसीजी, शुगर व बीपी टेस्ट भी किए गए हैं। कैंप में पहुंची महिलाओं को 57,980 सैनिटरी पैड्स भी वितरित किए गए।
संजय पराशर ने पिछले वर्ष के फरवरी माह में मेडीकल कैंप लगाने की शुरूआत गांव स्वाणा से की थी। उसके बाद जसवां-परागपुर क्षेत्र की हर पंचायत में स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन करने का निर्णय लिया गया। हर मेडीकल कैंप में मोतियाबिंद बीमारी से ग्रस्त मरीज सामने आए। पराशर ने 1679 मरीजों को विशेष प्रकार के चश्मे भी बनाकर दिए, जिनका नम्बर सामान्य तौर पर नहीं मिलता है। मोतियाबिंद का सफल आपरेशन करवा चुके देसराज, बिमला देवी, करतार चंद, तिलकर राल और बलदेव का कहना था कि मोतियाबिंद के कारण उन्हें कम दिखाई देता था और वे आर्थिक या अन्य कारणों से अपना इलाज करवाने में अक्षम थे। लेकिन कैप्टन संजय ने उनके घर-द्वार पर पहुंच कर मेडीकल कैंप लगाए, जिससे न सिर्फ उनकी आंखों की जांच हुई। पराशर ने उनके इलाज में हर संभव मदद की। अब उन्हें पहले से बेहतर दिखने लगा है। उन्होंने कैप्टन संजय पराशर का आभार जताते हुए कहा कि उनका कोई पैसा खर्च नहीं हुआ और कैंप लगने के कुछ दिनों भीतर ही आपरेशन भी हो गया। अब उन्हें देखने की कोई समस्या नहीं है। वहीं, तारा दवी, कश्मीर सिंह, रामकृष्ण और तरसेम लाल ने बताया कि उनकी श्रवण शक्ति कम हो गई थी। संजय के कैंपों में उन्हें निशुल्क कानों की मशीनें मिलीं और अब पहले से बेहतर सुन रहे हैं।








