शिमला 09 जनवरी । तत्कालीन क्योंथल रियासत के प्रचीन राजमहल में बीते बुधवार को लगी आग को बुझा दिया गया है और शुक्रवार को दमकल की गाड़ियां वापिस शिमला के लिए रवाना हो गई है । हालांकि राजमहल के भीतर से धुआं अभी भी निकल रहा है । राजमहल के भीतर दबे देवता जुन्गा के मंदिर (पौल ) को निकालने के लिए क्योंथल क्षेत्र के काफी संख्या में लोग बीते दो दिन से मलवा निकालने के लिए कार सेवा कर रहे हैं।
बता दें कि देवता जुन्गा समूचे क्योंथल क्षेत्र के आराध्य देव है । तत्कालीन क्योंथल रियासत दक्षिण में मनीमाजरा और पूर्व में रावी पुन्नर तक फैली हुई थी । इस रियासत के अधीन 18 ठकुराईयां आती थी । जिसके हर क्षेत्र में 22 टीका देव जुन्गा के मंदिर विराजमान है । जिनका मूल अथवा प्रमुख मंदिर प्राचीन राजमहल के भीतर है जिसमें देवता जुन्गा के मोहरे विराजमान है । क्योंथल क्षेत्र में राजा को चौथा ईष्ट माना जाता है जिसका देव कार्य संबधी निर्णय वर्तमान में भी सर्वोपरि माना जाता है ।
वर्तमान में क्योंथल रियासत के राजा खुश विक्रम सेन ने बताया कि राजमहल से मलवा निकालने का कार्य युद्धस्तर पर किया जा रहा है जिसमें क्योंथल क्षेत्र के काफी लोग कार सेवा कर रहे हैं । उन्होने बताया कि शनिवार तक राजमहल महल के भीतर देवता जुन्गा के 22 टीका मंदिर की वास्तु स्थिति बारे ज्ञात हो जाएगा कि देवता जुन्गा के मोहरे इस आगजनी की घटना में क्षतिग्रस्त हो चुके हैं अथवा सुरक्षित है । राजा खुश विक्रम सेन ने बताया कि जब तक राजमहल के भीतर देवता जुन्गा के मोहरे किसी भी स्थिति में नहीं मिल जाते हैं तब तक क्योंथल क्षेत्र. में देवता जुन्गा के पजावज व जागरा इत्यादि कार्य फिलहाल स्थगित कर दिए गए हैंे । गौर रहे कि हाल ही में देवता जुन्गा के टीका मनूनी देवता दौरे पर गए थे । राजमहल में आगजनी की घटना की सूचना मिलते ही देवता का दौरा स्थगित कर दिया है । राजा क्योंथल के अंतिम निर्णय तक फील्ड के सभी देवकार्य स्थगित रहेगें ।
बता दें कि देवता जुन्गा समूचे क्योंथल क्षेत्र के आराध्य देव है । तत्कालीन क्योंथल रियासत दक्षिण में मनीमाजरा और पूर्व में रावी पुन्नर तक फैली हुई थी । इस रियासत के अधीन 18 ठकुराईयां आती थी । जिसके हर क्षेत्र में 22 टीका देव जुन्गा के मंदिर विराजमान है । जिनका मूल अथवा प्रमुख मंदिर प्राचीन राजमहल के भीतर है जिसमें देवता जुन्गा के मोहरे विराजमान है । क्योंथल क्षेत्र में राजा को चौथा ईष्ट माना जाता है जिसका देव कार्य संबधी निर्णय वर्तमान में भी सर्वोपरि माना जाता है ।
वर्तमान में क्योंथल रियासत के राजा खुश विक्रम सेन ने बताया कि राजमहल से मलवा निकालने का कार्य युद्धस्तर पर किया जा रहा है जिसमें क्योंथल क्षेत्र के काफी लोग कार सेवा कर रहे हैं । उन्होने बताया कि शनिवार तक राजमहल महल के भीतर देवता जुन्गा के 22 टीका मंदिर की वास्तु स्थिति बारे ज्ञात हो जाएगा कि देवता जुन्गा के मोहरे इस आगजनी की घटना में क्षतिग्रस्त हो चुके हैं अथवा सुरक्षित है । राजा खुश विक्रम सेन ने बताया कि जब तक राजमहल के भीतर देवता जुन्गा के मोहरे किसी भी स्थिति में नहीं मिल जाते हैं तब तक क्योंथल क्षेत्र. में देवता जुन्गा के पजावज व जागरा इत्यादि कार्य फिलहाल स्थगित कर दिए गए हैंे । गौर रहे कि हाल ही में देवता जुन्गा के टीका मनूनी देवता दौरे पर गए थे । राजमहल में आगजनी की घटना की सूचना मिलते ही देवता का दौरा स्थगित कर दिया है । राजा क्योंथल के अंतिम निर्णय तक फील्ड के सभी देवकार्य स्थगित रहेगें ।








