शिमला, 26 फरवरी:
हिमाचल प्रदेश के जिला शिमला के चौपाल क्षेत्र के नेरवा जल शक्ति डिवीजन में टेंडर प्रक्रिया को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। एक पूर्व एग्जिक्यूटिव इंजीनियर पर महिला ठेकेदार और उसके बेटे को कथित रूप से करीब 100 टेंडर देने, फर्जी बिलिंग करने और सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप लगे हैं। मामला अब विभागीय सचिव से लेकर विजिलेंस तक पहुंच गया है।
नेरवा निवासी संदीप दिवान ने जल शक्ति विभाग के सचिव और विजिलेंस को शिकायत पत्र सौंपते हुए वर्ष 2021 से 2023 के बीच टेंडर प्रक्रिया में भारी गड़बड़ियों का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि उन्होंने चार वर्षों में RTI के माध्यम से दस्तावेज एकत्र किए, जिनमें कथित तौर पर अवार्ड लेटर की प्रतियां भी शामिल हैं। शिकायतकर्ता ने कहा है कि यदि उनके आरोप गलत साबित होते हैं तो वे किसी भी कार्रवाई के लिए तैयार हैं। उन्होंने डिप्टी सीएम और सीएम से उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जल जीवन मिशन के तहत केंद्र से प्राप्त लगभग 130 करोड़ रुपये और राज्य सरकार से जारी करीब 30 करोड़ रुपये की राशि के कार्यों में अनियमितताएं हुईं। कई टेंडर न तो समाचार पत्रों में प्रकाशित किए गए और न ही विभागीय वेबसाइट या मंडल कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित किए गए। आरोप यह भी है कि कार्यों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर वित्तीय नियमों से बचने की कोशिश की गई।
शिकायतकर्ता के अनुसार आवंटित कार्यों के फर्जी बिल बनवाकर 10 से 20 दिनों के भीतर भुगतान कर दिया जाता था, जबकि कई परियोजनाएं जमीनी स्तर पर अधूरी पाई गईं।
मामले को लेकर विभागीय स्तर पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यदि जांच होती है तो यह मामला प्रदेश में विकास योजनाओं की पारदर्शिता पर बड़ा असर डाल सकता है।






