मंडी
हिमाचल प्रदेश की छोटी काशी के नाम से विख्यात मंडी में सात दिनों तक आस्था, परंपरा और देव संस्कृति का अद्भुत संगम देखने के बाद अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव का विधिवत समापन हो गया। हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में देव परंपराओं के अनुरूप अंतिम देव समागम आयोजित हुआ।
समापन अवसर पर देववाणी के माध्यम से दिया गया संदेश इस बार विशेष चर्चा का विषय बन गया।
देववाणी में कड़ा संकेत
सराज घाटी के आराध्य देव देव पुंडरीक ऋषि ने स्पष्ट संदेश दिया कि पवित्र देवस्थलों, प्राचीन रीति-रिवाजों और निर्धारित व्यवस्थाओं के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ स्वीकार नहीं की जाएगी। देववाणी में चेतावनी दी गई कि यदि परंपराओं को तोड़ा गया तो प्राकृतिक संकट सहित गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।
संदेश में यह भी संकेत दिया गया कि आने वाले समय में देश, दुनिया और हिमाचल प्रदेश को विभिन्न चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि देवताओं ने आश्वस्त किया कि अठारह करडू देवता अपनी संरक्षण छाया बनाए रखेंगे, बशर्ते समाज और प्रशासन देव मर्यादाओं का पालन करें।
आसन व्यवस्था में बदलाव पर नाराजगी
इस वर्ष महोत्सव के दौरान देवताओं के बैठने की पारंपरिक व्यवस्था में किए गए बदलावों पर भी असंतोष प्रकट किया गया। देववाणी में कहा गया कि दशकों से निर्धारित स्थानों और अनुशासन में परिवर्तन करना देव मर्यादा का उल्लंघन है।
मंडी की शिवरात्रि और कुल्लू का दशहरा जैसे आयोजन केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि देव आस्था के जीवंत प्रतीक हैं। इन आयोजनों की अपनी पारंपरिक संरचना और मर्यादा है, जिसे बनाए रखना समाज और प्रशासन की संयुक्त जिम्मेदारी है।
‘छोटी काशी’ पर रहेगी देव कृपा
चेतावनी के साथ देव आशीर्वाद भी प्रदान किया गया। संदेश में कहा गया कि छोटी काशी पर कोई आंच नहीं आने दी जाएगी। देवता सदैव अपने भक्तों के साथ खड़े हैं, लेकिन यह संरक्षण तभी संभव है जब समाज देव संस्कृति को केवल उत्सव नहीं, बल्कि जीवन पद्धति के रूप में अपनाए।
सात दिनों तक चले इस अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया कि हिमाचल की देव संस्कृति केवल आस्था नहीं, बल्कि सामाजिक अनुशासन और परंपराओं की मजबूत डोर है, जिसे किसी भी परिस्थिति में टूटने नहीं दिया जा सकता।






