शिमला
डिजिटल गिरफ्तारी या ‘Digital Arrest’ देश में तेजी से बढ़ रहा एक नया साइबर घोटाला है, जिसमें ठग खुद को सरकारी अधिकारी, पुलिस या एजेंसी का कर्मचारी बताकर आम नागरिकों को डराते-धमकाते हैं।
क्या है डिजिटल गिरफ्तारी घोटाला?
यहां अपराधी पीड़ित को फर्जी आरोप—जैसे मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स तस्करी, या आयकर में गड़बड़ी—लगाकर बताते हैं कि उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी है। उन्हें कहते हैं कि जल्द ही उन्हें ‘डिजिटल तरीके’ से वर्चुअल तौर पर गिरफ्तार कर लिया जाएगा और उनकी सारी गतिविधियों की ऑनलाइन निगरानी होगी। कई बार ठग वीडियो कॉल या ऐप के जरिए पीड़ित की हर गतिविधि पर नजर भी रखते हैं।
5 दिन में 5 करोड़ गंवाने वाली महिला
दिल्ली-एनसीआर की 48 वर्षीय व्यवसायी महिला को एक कॉल आया, जिसमें खुद को DHL का कर्मचारी बताकर धोखेबाज ने उस पर ड्रग्स भेजने का आरोप लगाया। फिर उसे फर्जी पुलिस, CBI और ED अधिकारियों से वीडियो कॉल कराई गई। महिला से कहा गया कि वह निर्दोष साबित करने के लिए अपने इनवेस्टमेंट और खाते साझा करे और जांच के सहयोग के नाम पर बड़ी रकम बताए गए खातों में भेजे। ठगों ने उसे लगातार वीडियो कॉल पर रखा, उसके फोन से ऐप्स हटवा दीं, हरेक कॉल को स्पीकर पर लेने को कहा, और यहां तक कि कहां-कहां घर में घूमना है या कौन-कौन सा काम करना है, सब कुछ निर्देशित किया गया। पांच दिनों में महिला ने 5 करोड़ रुपये खाते में ट्रांसफर कर दिए। बाद में उसने पुलिस में शिकायत की, लेकिन पैसे का पता नहीं चल सका।
जागरूकता एवं बचाव
ऐसे कॉल्स या ईमेल आते ही खुद को शांत रखें, किसी भी व्यक्तिगत या बैंकिंग जानकारी साझा न करें।
सरकारी अधिकारी या एजेंसी कभी बिना लिखित नोटिस या सत्यापन के फोन पर धमकी नहीं देती।
फर्जी गिरफ्तारी वारंट या साइबर गिरफ्तारी के झांसे में न आएं।
जरूरत पड़े तो तुरंत 1930 (साइबर हेल्पलाइन) पर शिकायत करें या नजदीकी पुलिस से संपर्क करें।
डिजिटल गिरफ्तारी स्कैम से बचाव का सबसे बड़ा हथियार आपकी सतर्कता और जागरूकता है। किसी भी संदिग्ध कॉल, ईमेल या मैसेज का जवाब देने से पहले सोचें और पुष्टि जरूर करें।
कहानी शेयर करे ताकि और अङडिजिटल गिरफ्तारी केस: भारत में जागरूकता के लिए संक्षिप्त कहानी
डिजिटल गिरफ्तारी या ‘Digital Arrest’ देश में तेजी से बढ़ रहा एक नया साइबर घोटाला है, जिसमें ठग खुद को सरकारी अधिकारी, पुलिस या एजेंसी का कर्मचारी बताकर आम नागरिकों को डराते-धमकाते हैं।
क्या है डिजिटल गिरफ्तारी घोटाला?
यहां अपराधी पीड़ित को फर्जी आरोप—जैसे मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स तस्करी, या आयकर में गड़बड़ी—लगाकर बताते हैं कि उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी है। उन्हें कहते हैं कि जल्द ही उन्हें ‘डिजिटल तरीके’ से वर्चुअल तौर पर गिरफ्तार कर लिया जाएगा और उनकी सारी गतिविधियों की ऑनलाइन निगरानी होगी। कई बार ठग वीडियो कॉल या ऐप के जरिए पीड़ित की हर गतिविधि पर नजर भी रखते हैं।
5 दिन में 5 करोड़ गंवाने वाली महिला
दिल्ली-एनसीआर की 48 वर्षीय व्यवसायी महिला को एक कॉल आया, जिसमें खुद को DHL का कर्मचारी बताकर धोखेबाज ने उस पर ड्रग्स भेजने का आरोप लगाया। फिर उसे फर्जी पुलिस, CBI और ED अधिकारियों से वीडियो कॉल कराई गई। महिला से कहा गया कि वह निर्दोष साबित करने के लिए अपने इनवेस्टमेंट और खाते साझा करे और जांच के सहयोग के नाम पर बड़ी रकम बताए गए खातों में भेजे। ठगों ने उसे लगातार वीडियो कॉल पर रखा, उसके फोन से ऐप्स हटवा दीं, हरेक कॉल को स्पीकर पर लेने को कहा, और यहां तक कि कहां-कहां घर में घूमना है या कौन-कौन सा काम करना है, सब कुछ निर्देशित किया गया। पांच दिनों में महिला ने 5 करोड़ रुपये खाते में ट्रांसफर कर दिए। बाद में उसने पुलिस में शिकायत की, लेकिन पैसे का पता नहीं चल सका।
जागरूकता एवं बचाव
ऐसे कॉल्स या ईमेल आते ही खुद को शांत रखें, किसी भी व्यक्तिगत या बैंकिंग जानकारी साझा न करें।
सरकारी अधिकारी या एजेंसी कभी बिना लिखित नोटिस या सत्यापन के फोन पर धमकी नहीं देती।
फर्जी गिरफ्तारी वारंट या साइबर गिरफ्तारी के झांसे में न आएं।
जरूरत पड़े तो तुरंत 1930 (साइबर हेल्पलाइन) पर शिकायत करें या नजदीकी पुलिस से संपर्क करें।
डिजिटल गिरफ्तारी स्कैम से बचाव का सबसे बड़ा हथियार आपकी सतर्कता और जागरूकता है। किसी भी संदिग्ध कॉल, ईमेल या मैसेज का जवाब देने से पहले सोचें और पुष्टि जरूर करें।








