शिमला 24 जुलाई । आजादी के 78 वर्ष बीत जाने के बावजूद भी रियासतकालीन शहर जुन्गा विकास की दृष्टि से अछूता रहा है । शहर की बढ़ती आबादी के बावजूद भी जुन्गा को आजतक नगर पंचायत का दर्जा नहीं प्राप्त हो सका है जिस बारे इस शहर के नागरिक अपने आप को ठगा महसूस कर रहे है। वर्तमान कांग्रेस सरकार ने अपने कार्यकाल में प्रदेश के 12 से अधिक छोटे कस्बों को नगर पंचायत का दर्जा दिया गया है । कसुपंटी निर्वाचन क्षेत्र से काबीना मंत्री होने के बावजूद भी जुन्गा और कोटी को अभी तक शहरी निकाय का दर्जा नहीं मिल पाया है ।
गौर रहे कि अतीत में जुन्गा क्योंथल रियासत की 18 ठकुराईयांें का मुख्यालय हुआ करता था। वरिष्ठ नागरिकों के अनुसार रियासतकाल में इस शहर में रौनक शहर हुआ करती थी । शहर की आबादी सरकारी कार्यालयों सहित करीब साढ़े तीन हजार से अधिक है अर्थात नगर पंचायत बनने के सभी मापदंड पूरे करते हैं । स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जुन्गा को नगर पंचायत का दर्जा दिलवाने के लिए किसी भी जन प्रतिनिधि ने कोई प्रयास नहीं किए जिस कारण जुन्गा विकास की दृष्टि से अछूता रहा है ।
स्थानीय लोगों का कहना है कि स्थानीय पंचायत के पास शहर की सफाई करवाने के लिए कर्मचारी नहीं उपलब्ध नहीं है । शहर में भवनों का निर्माण मनमर्जी से किया जा रहा है इस शहर में किसी प्रकार नगर नियोजन एक्ट नहीं लगता है । जुन्गा निवासी दुर्गा सिंह ठाकुर ने बताया कि पुराना जुन्गा के लिए बाईपास रोड न होने से भारी वाहनों को जुन्गा की तंग गलियों से गुजरना पड़ता है । जिस कारण शहर की गलियों में अक्सर जाम लगा रहता है शहर में बस अडडा न होने के कारण बसों को सड़क पर ही खड़ा करना पड़ता है । शहर में कहीं भी पार्किंग की व्यवस्था नहीं है जिससे बाहर से आने वाले वाहन धारकों को काफी समस्या पेश आती है ।
तहसीलदार जुन्गा नरायण सिंह वर्मा ने बताया कि जुन्गा शहर को नगर पंचायत का दर्जा देने के लिए लोगों की ओर से अभी कोई प्रस्ताव नहीं आया है ।
आजादी के 78 वर्ष बाद भी जुन्गा को नहीं मिला शहरी निकाय का दर्जा
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