सिंचाई योजना में घटिया सामग्री इस्तेमाल करने का किसानों ने लगाया आरोप
शिमला 26 सितंबर । कसुपंटी निर्वाचन क्षेत्र की ग्राम पंचायत सतोग के गरपेंया में विश्व बैंक की एकीकृत विकास परियोजना के तहत निर्मित की जा रही सिंचाई योजना के निर्माण पर किसानों ने विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं । इस योजना के लाभार्थियों का आरोप है कि परियोजना के तहत वन विभाग द्वारा गरपेंया नाला पर पानी के भंडारण हेतू चैक डेम घटिया सामग्री इस्तेमाल की है । इस चैड डेम की हालत यह है कि इसमें पानी की एकत्रित नहीं होता बल्कि पानी का रिसाव भूमि में हो जाता है । इसी प्रकार किसानों द्वारा वन विभाग से इस सिंचाई योजना में तीन ईंच का पाईप लगाने की मांग की गई थी जिसके एवज में विभाग द्वारा केवल डेढ ईंच की पाईप दी गई जिसे लाभार्थियों द्वारा विभाग को वापिस भेज दी गई है । बता दें प्रदेश में विश्व बैंक की सहायता से एकीकृत विकास परियोजना कार्यान्वित की जा रही है जिसका संचालन वन विभाग के माध्यम से किया जा रहा है ।
जै ईश्वरी जल उपयोगिता समूह गरपेंया के प्रधान ओम प्रकाश शर्मा, सचिव मनोज कुमार, सदस्य ईश्वर लाल, राकेश, मोहनलाल, अजय शर्मा, रामलाल, राकेश-2, हरिंचद शर्मा सहित अनेक किसानों ने बताया कि गरपेंया खडड में 12 महीने पानी उपलब्ध रहता है । बरसात में यह पानी 6-7ः ईच हो जाता है जबकि गर्मियों में तीन ईंच रहता है । जिसके पानी से किसान अपनी नकदी फसलें उगाते हैं । बताया कि करीब एक वर्ष पहले गरपेंया गांव के लिए सिंचाई योजना स्वीकृत की गई थी । इस योजना के निर्माण में घटिया सामग्री का प्रयोग किया गया है जिससे पानी सारा डेम में ही लीक हो रहा है । ओम प्रकाश शर्मा ने बताया कि लोगों की मांग के अनुरूप वन विभाग द्वारा पाईपें भी उपलब्ध नहीं करवाई गई है जिसे वापिस लौटा दिया गया है । इस योजना के तहत एक भंडारण टैंक निर्मित किया गया है जिसमें करीब एक वर्ष से पलस्तर भी हुआ है । इस योजना का किसानों को कोई लाभ नहीं मिल रहा है । किसानों ने इस योजना के कार्यान्वयन में बरती गई अनियमिता की उच्च स्तरीय जांच करवाने की मांग की है ।
उधर परियोजना के डीएफओं नरेन्द्र पाल दुल्टा ने बताया कि गरपेंया सिंचाई योजना के लिए प्रोजेक्ट के तहत 4.60 लाख की राशि स्वीकृत की गई है तथा इस योजना निर्माण तकनीकी रिपोर्ट एवं प्राक्कलन के आधार पर किया जा रहा है ।







