हिमाचल प्रदेश में किसानों-बागवानों के हितों की लड़ाई लड़ने वाले संयुक्त किसान मंच के संयोजक हरीश चौहान ने कृषि कानूनों को वापस लेने के निर्णय का स्वागत किया है। हरीश चौहान ने कहा कि किसानों का आंदोलन शुरू होते ही अगर भारत सरकार यह कानून वापस ले लेती तो 700 किसानों की जान नहीं जाती। भारत सरकार से यह एक बहुत बड़ी भूल हुई है। देश के साथ-साथ संयुक्त किसान मंच भी कृषि कानूनों का विरोध कर रहा था।
इसके लिए प्रदेशभर में आंदोलन भी चलाया गया। किसानों की यह बहुत बड़ी जीत है। हरीश चौहान ने कहा कि अब केंद्र सरकार को दो कदम और आगे बढ़कर किसानों-बागवानों की विभिन्न राज्यों में जो समस्याएं हैं उन पर विचार कर तुरंत समाधान करना चाहिए। एमएसपी को लेकर हरीश चौहान ने कहा कि सभी फल और सब्जियां, देश के जितने भी कृषि और बागवानी उत्पाद हैं उसका न्यूनतम मूल्य तय कर दिया जाए।
हिमाचल सरकार भी तुरंत संयुक्त किसान मंच को वार्ता के लिए बुलाए। संयुक्त किसान मंच बीते चार माह से आंदोलन कर रहा है लेकिन हिमाचल सरकार ने अभी कोई बातचीत नहीं की है। संयुक्त किसान मंच के सह संयोजक संजय चौहान ने कहा कि कृषि कानूनों को वापस लेने का निर्णय किसान आंदोलन को एक वर्ष पूरे होने व इस आंदोलन में 700 किसानों की शहादत के बाद लिया गया है। इससे भाजपा सरकार का किसान विरोधी चेहरा स्पष्ट हुआ है।
सरकार को किसानों की मांग के आगे झुकना पड़ा और किसान व आमजन विरोधी इन तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए मजबूर होना पड़ा। इस आंदोलन के दबाव में सरकार द्वारा इन तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने से देश मे सरकार के द्वारा लागू की जा रही कॉरपोरेट घरानों को लाभ देने वाली नवउदारवादी नीतियों के विरुद्ध चलाए जा रहे अन्य आंदोलनों को भी बल मिलेगा।








