राजधानी शिमला की संजौली मस्जिद को लेकर हुए विवाद को बुधवार को एक साल पूरा हो गया। ऐसे में हिंदू संगठनों ने गुरुवार को मस्जिद के पास नारेबाजी की और सुक्खू सरकार का पिंडदान किया। इस दौरान मस्जिद के आसपास तो ज्यादा पुलिस नजर नहीं आई। लेकिन संजौली थाने में अतिरिक्त जवानों की तैनाती की गई है। हालांकि, संजौली में पूरी तरह से शांति हैं।
संघर्ष समिति के सह संयोजक मदन ठाकुर ने कहा कि नगर निगम कोर्ट के आदेश के बावजूद बक्फ बोर्ड ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है, जो सही नहीं है। हिंदू एक जुट हो चुका है और सनातन विरोधियों के खिलाफ आंदोलन जारी रहेगा और अगर सरकार अगर समय रहते नहीं जागी तो परिणाम नेपाल से भी भयानक होंगे।
देव भूमि संघर्ष समिति के सह संयोजक विजय शर्मा और मदन ठाकुर ने बताया कि जिला प्रशासन पिछले आंदोलन से डर गया, परिणामस्वरूप इस बार डिजास्टर एक्ट का हवाला देकर मात्र 11 लोगों को ही धरना देने की इजाजत दी गई। संजौली श्मशान घाट के आधे रास्ते में, सुक्खू सरकार के आधे कार्यकाल और आधी अधूरी मस्जिद तोड़ने को लेकर आज श्राद्ध में अर्ध पिंडदान किया गया है, ताकि सनातन विरोधियों को अर्ध मुक्ति ही मिले।
दरअसल, बीते एक साल पहले हुए इस विवाद में नगर निगम प्रशासन ने मस्जिद को गिरने के आदेश दिए थे। हालांकि, अब तक मस्जिद की एक ही मंजिल को तोड़ा गया है। मामला कोर्ट में भी विचारधीन है। गुरुवार को संजौली में मस्जिद के पास मुख्य सड़क पर हिंदू संगठनों के लोग एकत्र हुए और यहां पर उन्होंने सुक्खू सरकार का पिंडदान किया।
गौरतलब है कि हिमाचल में डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट लागू होने के वजह से केवल 11 लोगों को ही यहां पर एकत्र होने की अनुमति दी गई थी।
प्रदेशभर में हुआ था विरोध-प्रदर्शन
गौरतलब है कि संजौली में एक मारपीट मामले के बाद यह पूरा विवाद भड़का था। इसके बाद संजौली मस्जिद में अवैध निर्माण को गिराने के लिए प्रदेशभर में विरोध-प्रदर्शन हुए। बाद में नगर निगम की आयुक्त कोर्ट ने मस्जिद की ऊपरी मंजिलों को गिराने के आदेश दिए थे। लेकिन बाद में पूरी मस्जिद को ही अवैध करार देते हुए ढहाने के आदेश दिए थे।
अहम बात है कि मस्जिद कमेटी ने भी ऊपरी मंजिलों को तोड़ने का काम चालू किया था लेकिन बीच में पैसों की कमी के चलते काम रुक गया। कोर्ट में अब भी मामला चल रहा है। अवैध निर्माण का विवाद साल 2010 से चल रहा है। हालांकि, मस्जिद को अब तक धराशाई ना करने पर हिंदू संगठनों में अब भी रोष है।