कैप्टन संजय पराशर ने कहा कि वह कर्जदार नहीं बल्कि फर्जदार बनकर इस दुनिया से जाना चाहते है।इसी ध्येय को लेकर समाज के कार्यों को निभा रहा हूं। मंगलवार को आजाद हिंद फौज के सैनिक परिवारों के सम्मान समारोह में पराशर ने कहा कि कोरोना काल में जब चीन की बदौलत हम पर मुसीबत आ गई और दूसरी लहर में हालात बद से बदतर होने लगे तो यह ठान लिया था कि हर जान को बचाने के लिए वह भी जी-जान की बाजी लगा देंगे। पराशर ने कहा कि जिंदगी में 100 से अधिक बार रक्तदान दिया है। बलिदान व कुर्बानियां देने में हिमाचल के वीर जवान सदैव अव्वल रहे हैं।
देश में पहला परमवीर चक्र हिमाचल के मेजर सोमनाथ शर्मा को ही मिला था। आज भी जब क्षेत्र के युवा सड़क पर सुबह व शाम को दौड़ लगाते हैं तो उनमें कैप्टन बिक्रम बतरा और सौरभ कालिया जैसा बनने की चाह व तमन्ना होती है। आज भी हिमाचली युवा भारतीय सेना में जाने के लिए कड़ा परिश्रम करते हैं। उन्होंने बताया कि शहीद भगत सिंह उनकी जिंदगी के सबसे बड़ा प्रेरणा स्रोत रहे हैं। आजाद हिंद फौज के सैनिक परिवारों ने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व लुटा दिया था। इसमें हिमाचल के वीर जवानों ने भी ऐतिहासिक योगदान दिया था। आजाद हिंद फौज के उस महान सैनिक पहाड़ी गांधी बाबा कांशी राम को भी कौन भूल सकता है, जिन्होंने अपने साहित्य से हिमाचल के गांव-गांव में जाकर आजादी का बिगुल बजा दिया था। बाबा कांशीराम ने देश की आजादी के लिए अपना मकान तक गिरवी रख दिया था।
जिला कांगड़ा, ऊना व हमीरपुर से बड़ी संख्या में आजाद हिंद फौज में सैनिक थे, जिन्होंने देश की आजादी की लड़ाई में अलख जगाई। आजाद हिंद फौज के सैनिक परिवारों का सम्मान करना उनकी जिंदगी का एक सपना था और आज वह इन परिवारों को सम्मानित करके खुद को सम्मानित होता महसूस कर रहे हैं। इस मौके पर पराशर की पत्नी सोनिका पराशर ने कहा कि वर्तमान में हिमाचल प्रदेश शिक्षा, बागवानी, पर्यटन व कई अन्य विकास कार्यों में उन्नति करके उस मुकाम पर पहुंच गया है।








