प्राकतिक खेती से उगाई गई सब्जियां की बाजार में बहुत मांग—योगमाया शर्मा
शिमला 12 अगस्त । स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को प्राकृतिक खेती और पशुपालन की तकनीक बारे जानकारी देने के लिए नारी शक्ति ग्राम संगठन के सौजन्य से मंगलवार को जुन्गा में एक शिविर का आयोजन किया गया । जिसमें विभिन्न स्वयं सहायता समूहों की करीब 50 महिलाओं ने भाग लिया ।
इस मौके पर कृषि सखी योगमाया शर्मा ने प्राकृतिक खेती में इस्तेमाल होने वाले जीवामृत का घोल बनाकर दिखाया ताकि महिलाएं अपने घर पर इस प्रकार घोल को तैयार कर सके । योगमाया ने महिलाओं को प्राकृतिक खेती के सभी पहलुओं बारे जानकारी दी । उन्होने बताया कि प्राकृतिक खेती में किसी प्रकार की रासायनिक खाद और दवाईयों का प्रयोग नहीं किया जाता है बल्कि अपने घर पर स्थानीय सामान पर तैयार किए जीवामृत, बीजामृत इत्यादि घोल तैयार करके उसका छिड़काव फसल में करना चाहिए तथा जैविक खाद का प्रयोग करें । प्राकृतिक खेती में उत्पादन लागत बहुत कम लगती है और इस तकनीक से तैयार की गई कोई भी सब्जियां अथवा अन्य फसलें स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद होती है जबकि रासायििनक खाद से उगाए गई फसलें मानव जीवन के उपयोगी नहीे होती है ।
उन्होने महिलाओं को प्राकृतिक खेती करने की सलाह देते हुए कहा कि इस खेती को करने के लिए घर पर उपलब्ध सामग्री और जैविक खाद का उपयोग करे । उन्होेने कहा कि प्राकतिक खेती से उगाई गई सब्जियां की बाजार में बहुत मांग है और इसके अच्छे दाम भी मिलते हैं ।
इस मौके पर पशु सखी मीना राणा ने महिलाओं को दुधारू पशुओं के देखभाल और उनमें लगने वाली बिमारियों के लक्षण और उपाय बारे विस्तार से जानकारी दी । उन्होने महिलाओं को अच्छी नस्ल की दुधारू गाएं पालने की सलाह देते हुए कहा कि वर्तमान में दुग्ध उत्पादन महिलाओं की आजीविका का एक मुख्य साधन बन गया है और वर्तमान में घरद्वार पर दूध के अच्छे दाम मिल रहे हैं ।
ग्राम संगठन की प्रधान पूनम कश्यप ने महिलाओं को व्यवहारिक जानकारी देने के लिए कृषि व पशु सखी का आभार व्यक्त किया । सचिव सुनिता राणा, संगीता, लता शर्मा, हेमा शर्मा, निर्मला, ममता सहित सभी महिलाओं ने इस प्रकार के शिविरों का समय समय पर आयोजन करने का आग्रह किया गया ताकि महिलाएं सरकार के हर कार्यक्रमों से अपडेट रहे ।








