शिमला,22फरवरी
अश्वनी खड्ड में दोगड़ा पुल के पास अश्विनी खड्ड में सिवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के शिमला जल प्रबंधन निगम लिमिटिड के फैसले पर स्थानीय लोगों ने आपत्ति जताई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस स्थान पर स्थनीय देव बड़मू देवता और काली माता का मंदिर है और साल में दो बार यहां 4-5 पंचायतें मिलकर धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन करती हैं। वहीं ट्रीटमेंट प्लांट की प्रस्तावित जगह के आसपास ही शमशानघाट और उठाऊ पेयजल योजना भी है। इस उठाऊ पेयजल योजना से पुजारली, ढमेची, क्वालग-मझार, क्यार, सेरी, सिंयुठा, भाट गावों को पानी की सप्लाई होती है। स्थानीय लोगों ने बताया कि उन्होंने शिमला जल प्रबंधन निगम लिमिटिड (एसजेपीएनएल) से भी इस बारे में आग्रह किया था लेकिन कम्पनी स्थान बदलने के लिए तैयार नहीं हुई।
हिमाचल किसान सभा के राज्याध्यक्ष डॉ. कुलदीप सिंह तँवर की अध्यक्षता में किसान सभा की टीम ने मौके का दौरा किया और ट्रीटमेंट प्लांट के लिए प्रस्तावित स्थान का जायज़ा लिया। उन्होंने ग्रामीणों द्वारा जताई गई आपत्तियों को सुना।
डॉ. तँवर ने कहा कि पंचायत क्षेत्र में कोई भी सिवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने या वहां के जल स्रोतों से उठाऊ पेयजल योजना बनाने के लिए स्थानीय लोगों और पंचायत की सहमति लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर कोई कम्पनी या सरकार ऐसा नहीं करती तो वन अधिकार कानून के तहत पंचायत को अधिकार है कि वह ऐसी कोई भी परियोजना अपने क्षेत्र में लगाने से रोके।
डॉ. तँवर ने कहा कि शिमला जल प्रबंधन निगम लिमिटिड कम्पनी के रुख से ऐसा लगता है कि वह ठेकेदार की सुविधा और उसको फायदा पहुंचाने की मंशा से निर्धारित स्थान पर ही ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के लिए अडी़ है। उन्होंने कहा कि कम्पनी को स्थानीय जनता की धार्मिक, सांस्कृतिक भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कम्पनी से बात करके मसले को हल करने की कोशिश की जाएगी अगर कम्पनी अपनी ज़िद्द नहीं छोड़ती तो इसके लिए कानून का भी सहारा लिया जाएगा।
डॉ. तँवर ने स्पष्ट किया कि किसान सभा चाहती है कि ग्रामीण क्षेत्रों की भी सिवरेज क्नेक्टिविटी हो इसलिए सिवरेज किसान सभा इसके खिलाफ नहीं है लेकिन स्थान का निर्धारण स्थानीय लोगों की सहमति से होना चाहिए। डॉ. तँवर ने कहा कि शिमला नगर निगम द्वारा स्थापित किए गए 6 सिवरेज ट्रीटमेंट प्लांट ( बड़ागांव-रझाणा, बडेयां-ढली, मल्याणा, बर्मू, गोल्छा-भौंट, समरहिल) का अनुभव है कि इससे प्लांट के इर्दगिर्द के बाशिंदों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। विशेषतौर पर बरसात के दिनों में बिना ट्रीटमेंट के टैंकों से पानी छोड़ दिया जाता है जिससे न केवल बदबू उठती है बल्कि यह जलस्रोतों को दूषित करके बीमारियां भी फैलाता है।
डॉ. तँवर ने कहा कि किसान सभा का मानना है कि तमाम सुरक्षा उपायों और स्थानीय जनता की राय का ध्यान रखते हुए ही ऐसे फैसले लिए जाएं।
किसान सभा की टीम में किसान सभा कसुम्पटी के सचिव जयशिव सिंह ठाकुर, सुरेश पुंडीर, नवीन शर्मा शामिल थे। स्थानीय प्रतिनिधियों के तौर पर योगेश्वर दत्त शर्मा, सोहन, काहन सिंह, बंती देवी, प्रवीण, पूरनचंद, अनिल, राहुल, परमानन्द शर्मा, बी.डी. शर्मा आदि मौजूद रहे।








