मंडी: सिख कौम के लिए परिवार कुर्बान करने वाले दशम पिता श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के छोटे साहिबजादों की शहादत को समर्पित शहीदी जोड़ मेला गुरु नानक, गुरु गोबिंद सिंह लहर मिशन द्वारा आयोजित किया गया। तीन दिवसीय धार्मिक समारोह की शुरूआत में प्रातः काल ऐतिहासिक गुरु गोविंद सिंह गुरुद्वारा में शब्द कीर्तन का पाठ हुआ, उसके बाद पवित्र ग्रंथ साहिब जी को पूरे मान सम्मान के साथ कोलसरा चट्टान के पास ले जाया गया।
गुरु गोबिंद गुरुद्वारा के नौजवान सेवक जत्था बलजिंद्र सिंह ने बताया कि गुरु नानक गुरु गोबिंद लहर मिशन हर वर्ष गुरु गोबिंद सिंह के चारों साहिबजादों की याद में सालाना समागम समारोह मनाती हैं। इस वर्ष भी मिशन द्वारा 23 वां समागम शहीदी जोड़ मेला मनाया जा रहा हैं।उन्होंने कहा की यह वही पवित्र स्थली हैं जहां पर गुरु गोबिंद सिंह जब मंडी छोड़कर जाने वाले थे तो उन दिनों राजा को बाहरी आक्रमणों का डर सता रहा था। राजा ने उनसे सुरक्षा का वचन मांगा।
राजा को गुरु जी ने अपने अंदाज में वचन दिया। ब्यास नदी के बीचों-बीच कोलसरा चट्टान पर खड़े होकर एक हांडी नदी में फेंकी गई। फिर इस हांडी पर बंदूक से निशाना साधा लेकिन हांडी को कुछ नहीं हुआ। इस पर गुरू गोबिंद सिंह जी ने राजा को कहा कि जैसे बची है हांडी, वैसे बचेगी मंडी। जो मंडी को लूटेंगे, आसमानी गोले छूटेंगे। उन्होंने कहा कि गुरू गोबिंद सिंह की कही हुई यह बात इतिहास के पन्नों में भी दर्ज है । उन्होंने कहा कि गुरु गोविंद सिंह के साहिब जादो की शहादत में आयोजित शहीदी जोड़ मेला में कई प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।








