माता हिडिंबा के आदेश पर हुई जगती में मिले देव निर्देश
कुल्लू
हिमाचल प्रदेश सदियों से देवी-देवताओं का आशीर्वाद के चलते जीवन चलता आया है। इन दिनों देवभूमि हिमाचल प्राकृतिक आपदाओं की चपेट में है। बीते कुछ वर्षों में भूस्खलन, बाढ़, बादल फटना, भूकंप और अकाल जैसी आपदाएं इस शांत पहाड़ी प्रदेश को झकझोर चुकी हैं।
देवभूमि में इस आपदा को मात्र वैज्ञानिक कारणों से नहीं, बल्कि आस्था के दृष्टिकोण से भी देखा जा रहा है। कुल्लू घाटी में बुधवार को माता हिडिंबा के आदेश पर रघुनाथपुर में छोटी जगती का आयोजन किया गया।
इस पारंपरिक देवसभा में देवी-देवताओं ने साफ हिदायत दी है कि लोगों को देवस्थलों से छेड़छाड़ बंद करनी होगी, वरना इसका सीधा असर प्राकृतिक आपदाओं के रूप में झेलना पड़ेगा।
मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह ने बताया कि इस जगती में देवी-देवताओं ने ढालपुर मैदान में हुई गतिविधियों और बिजली महादेव रोपवे प्रोजेक्ट को लेकर नाराजगी जताई है। उनका कहना था कि देवभूमि की पवित्र भूमि और आस्था स्थलों के साथ खिलवाड़ किया गया तो इसके परिणाम अत्यंत गंभीर होंगे।
देवताओं ने विशेष रूप से बिजली महादेव रोपवे का मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि यह परियोजना धार्मिक स्थल की पवित्रता को आहत करती है और इसे तुरंत रोका जाना चाहिए। महेश्वर सिंह ने बताया कि यह मामला सरकार तक भी पहुंचाया गया है और सरकार ने भी देव आदेश का सम्मान करने की बात कही है।
बड़ी जगती नग्गर कैसल में होती है, जहां 18 करड़ू देवताओं का स्थान है। इसमें देवताओं का आह्वान कर उनसे पूछ डाली जाती है। मान्यता के अनुसार गोबर के लड्डू पानी में डाले जाते हैं। यदि लड्डू ऊपर आ जाएं तो देवता की सहमति मानी जाती है।
छोटी जगती विशेष परिस्थितियों में, जैसे दशहरा से जुड़े मुद्दों या संकट की घड़ी में आयोजित की जाती है। विदित रहे कि, कई साल पहले देवताओं ने स्की विलेज प्रोजेक्ट को मंजूरी नहीं दी थी, जिसके चलते 1800 करोड़ का प्रोजेक्ट रद्द कर दिया गया था।
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कुल्लू व आसपास के लोग मानते हैं कि जब भी कोई आपदा आती है, समाधान केवल देवताओं की शरण में ही मिलता है। देवता का आदेश अंतिम माना जाता है और उसी के अनुसार समाज व प्रशासन कदम उठाता है।
इस बार की छोटी जगती प्राकृतिक आपदाओं के समाधान और बिजली महादेव रोपवे विवाद को लेकर बुलाई गई थी। देवताओं ने चेताया कि यदि लोग और प्रशासन आस्था स्थलों से छेड़छाड़ बंद नहीं करेंगे, तो भविष्य में और भी कठिन विपत्तियां सामने आ सकती हैं।








