शिमला, 11 जनवरी
लोकसभा और विधानसभा उपचुनाव में हार के बाद अब प्रदेश भाजपा शिमला नगर निगम के चुनाव पर मंथन कर रही है। सरकार चाह रही है कि नगर निगम शिमला के चुनाव पार्टी चिह्न के बिना करवाए जाएं। मंडी, पालमपुर, धर्मशाला और सोलन नगर निगमों के चुनाव से प्रदेश भाजपा को एक तरह से सीख मिली है। उस वक्त भी जोड़तोड़ करने के लिए भाजपा को बहुत मेहनत करनी पड़ी थी।
असल में राज्य में भाजपा विधानसभा चुनाव से पहले किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाह रही है। प्रदेश में विधानसभा चुनाव इसी साल अक्तूबर के बाद प्रस्तावित हैं। दिसंबर में नई सरकार ने शपथ लेनी है। उससे पहले नगर निगम शिमला के चुनाव मई में प्रस्तावित हैं। निगम के इन चुनाव को आगे टालने की परिस्थिति बनती नजर नहीं आ रही है। सरकार ने पिछले साल नए बनाए तीनों नगर निगमों सोलन, मंडी और पालमपुर के अलावा चौथे धर्मशाला नगर निगम में चुनाव पार्टी चिह्नों पर करवाए।

इनमें सोलन और पालमपुर में भाजपा की हार हुई तो धर्मशाला और मंडी में अपने हाथ में कमान लेने के लिए बहुत परिश्रम करना पड़ा। अगर चुनाव पार्टी चिह्नों पर न करवाए गए होते तो संभवतया इतनी दिक्कत न होती। पार्टी चिह्नों पर चुनाव करवाने के बाद दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई होती है। ऐसे में भाजपा किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेना चाह रही है। पिछली बार की तरह बगैर चिह्नों के चुनाव करवाना चाह रही है। हालांकि, अलग बात है कि नगर निगम शिमला का एक्ट बाकी नगर निगमों से अलग है। अगर पार्टी चिह्नों पर चुनाव करवाना हो तो इस प्रावधान को फिर से संशोधित करना होगा, मगर ऐसी स्थिति कम ही लग रही है। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि भाजपा के ज्यादातर लोग चाह रहे हैं कि ये चुनाव पार्टी चिह्नों पर न हों। इस बारे में विचार-मंत्रणा चल रही है।








