राजगढ़ क्षेत्र की शिलांजी पंचायत के कटोगड़ा में बूढ़ी दिवाली धूमधाम से मनाई गई। आमतौर पर यह पर्व गिरिपार क्षेत्र में मनाया जाता है। नवयुवक मंडल द्वारा लगभग 4 दशक बाद कटोगड़ा में यह उत्सव फिर से मनाया गया। गौर रहे कि कभी कटोगड़ा की बूढ़ी दिवाली पूरे उपमंडल में मशहूर थी लेकिन 4 दशक पूर्व इसका आयोजन बंद हो गया था। कटोगड़ा पझोता आंदोलन के मुखिया वैद्य सूरत सिंह का पैतृक गांव है।
पझोता स्वतंत्रता सेनानी कल्याण संघ के अध्यक्ष जय प्रकाश चौहान के अनुसार लोक संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए प्रथम मुख्यमंत्री डाॅ. वाईएस परमार के आह्वान पर पहाड़ी कलाकार संघ हाब्बन की स्थापना भी वर्ष 1974 में कटोगड़ा की बूढ़ी दिवाली के अवसर पर ही की गई थी और इसका मुख्य संरक्षक डाॅ. वाईएस परमार व संरक्षक वैद्य सूरत सिंह को बनाया गया था। इसके अलावा जीवन सिंह वर्मा, निदेशक विद्या नंद सरैक, तबला वादक जय प्रकाश चौहान, सोहन सिंह, मान सिंह वर्मा व पं. सेवा राम के साथ उस समय के रेडियो कलाकार मियां किशन सिंह, लेखराम, माता राम अत्री, कृष्ण लाल सहगल, विद्या देवी, शकुंतला देवी, शमशेर नेगी, शेरजंग चौहान, लेख राम शर्मा व प्रताप सिंह वर्मा संघ में शामिल थे।
पहाड़ी कलाकार संघ ने उस समय जिले के विभिन्न हिस्सों के साथ अन्य जिलों व गेयटी थियेटर में राज्यपाल के सामने भी प्रस्तुति दी थी। नवयुवक मंडल के अध्यक्ष संजय चौहान ने बताया कि क्षेत्र से विलुप्त हो चुकी संस्कृति से युवा पीढ़ी को अवगत करवाने के लक्ष्य से लगभग 40 वर्ष पश्चात उत्सव का आयोजन किया गया। कटोगड़ा में आयोजित बूढ़ी दीवाली में अपनी पारम्परिक संस्कृति का निर्वहन करते हुए केवल पारम्परिक वाद्य यंत्रों हार्मोनियम, शहनाई व ढोलक आदी का इस्तेमाल किया जाता है।
इस दौरान सर्वोदय कला मंच देवठी मझगांव के विद्यानंद सरैक ने दशकों पुरानी संस्कृति से रू-ब-रू करवाया। उनके साथ शकुंतला तंवर, तारा कमल, सीता राम शर्मा, राकेश शर्मा, दिलीप सिंह, गीतराम गंधर्व, जगमोहन सरैक, केशव शर्मा, विनोद गंधर्व, संजीव बरागटा, शंकर लाल, संदीप व दिनेश आदी कलाकारों ने पारम्परिक करयाला व सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से लोगों का मनोरंजन किया। साधु व बूढ़े-बूढ़ी के स्वांग को लोगों ने खूब सराहा। लोग सुबह 6 बजे तक कार्यक्रम का लुत्फ उठाते रहे।








