भारत-पाक युद्ध 1971 में पाकिस्तान पर भारतीय जीत की स्वर्ण जयंती मनाने के लिए राष्ट्र 2021 को स्वर्णिम विजय वर्ष के रूप में मना रहा है, जो एक इतिहासिक व सबसे प्रभावशाली जीत थी।
स्वर्णिम विजय वर्ष के रूप में, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 दिसंबर 2020 को राष्ट्रीय युद्ध स्मारक, नई दिल्ली से इस शाश्वत विजय लौ यानी स्वर्णिम विजय मशाल से चार ‘स्वर्णिम विजय मशाल’ जलाई जो 50 वीं वर्षगांठ स्वर्णिम विजय वर्ष की शुरुआत है। 1971 के युद्ध के परमवीर चक्र और महावीर चक्र पुरस्कार विजेताओं के गांवों, कस्बों, शहरों सहित देश की लंबाई और चौड़ाई की यात्रा करते हुए विजय मशालों (ज्वलंत मशालों) को देश की चार प्रमुख दिशाओं में ले जाया गया।
इस कड़ी में स्वर्णिम विजय मशाल को 18 अक्टूबर को शिमला पहुंची और टू नागा रेजिमेंट जतोग से सैन्य सम्मान के साथ विशेष सेना वाहन से लाया गया और शुक्रवार 22 अक्टूबर को सुबह 10:30 बजे सेंट एडवर्ड्स स्कूल शिमला में स्वर्णिम विजय वर्ष मशाल स्वागत समारोह निर्धारित कार्यक्रम में टू नागा रेजिमेंट जतोग शिमला की ओर से कैप्टन दिग्विजय ड़ड़भाल ने 7 एनसीसी शिमला के कमांडिंग अफसर सुनीत शांकटा को स्वर्णिम विजय मशाल सौंपी। उसके बाद स्वर्णिम विजय मशाल का सेना के जवानों और एनसीसी कैडेट्स ने हाथ में राष्ट्रीय तिरंगा झंडा लेकर व सलामी देकर स्वागत किया। इस अवसर पर शहीदों के परिजनों, गणमान्य लोगों, सेना के जवानों और सैन्य अधिकारियों ने स्वर्णिम विजय मशाल पर शहीदों को याद करते हुए पुष्पाजंलि अर्पित की।
इस समारोह के हिस्से के रूप में, एनसीसी ग्रुप शिमला ने सेंट एडवर्ड स्कूल शिमला में स्वर्णिम विजय वर्ष मशाल का स्वागत करने के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें एनसीसी के कैडेट्स ने बढ़चढ़कर भाग लिया। 7 एचपी (आई) कंपनी एनसीसी शिमला के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल सुनीत शांकटा ने पूरे सैन्य सम्मान के साथ स्वर्णिम विजय मशाल का स्वागत किया और शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित की।
मुख्य अतिथि के रूप में समारोह की अध्यक्षता करने वाले वशिष्ठ सेना मैडल ब्रिगेडियर मनोज खंडूरी ने शहीद सैनिकों के सम्मान में विजय मशाल पर माल्यार्पण किया। इस अवसर पर एनसीसी ग्रुप शिमला के एनसीसी कैडेट्स द्वारा देशभक्ति गीत, कविता पाठ, नाटक व सांस्कृतिक कार्यक्रम का प्रदर्शन किया गया व रंगारंग प्रस्तुतियां पेश की। इससे पहले देश की सुरक्षा और अखंडता के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले और अपने प्राणों की आहुति देने वाले शिमला के तीन बहादुर शहीदों के परिजनों को मुख्य अतिथि ब्रिगेडियर मनोज खंडूरी द्वारा स्मृति-चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया गया।
स्वर्णिम विजय वर्ष के अवसर पर एनसीसी हेडक्वार्टर के ब्रिगेडियर मनोज खंडूरी (वशिष्ठ सेना मैडल) ने सभी भारतवंशियों को बधाई दी और कहा कि यह स्वर्णिम विजय ज्योति इस महान देश भारत के उन महान सैनिकों की वीरता, शौर्य, बलिदान और धैर्य की पहचान है, जिन्होंने 1971 के भारत-पाक युद्ध और उसके बाद के संघर्षों में जीत दर्ज की थी। इस तरह के आयोजन हम सभी खासकर युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।” ब्रिगेडियर मनोज खंडूरी ने एनसीसी कैडेट्स और समारोह में उपस्थित गणमान्य लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की सेना को भारत-पाक युद्ध 1971 में मिली जीत भारत की एक ऐतिहासिक जीत ही नहीं बल्कि भारतीय सेना ने मानव अधिकारों, रक्षा और शांति को बरकरार रखकर बंगलादेश को पाकिस्तानी सेना की जुर्म व अत्याचार से मुक्ति दिलाकर बंगलादेश को एक राष्ट्र के रूप में स्थापित करवाने में मदद की। खंडूरी ने कहा कि भारतीय सेना रक्षा के साथ मानव मूल्यों का भी आदर करती है, उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि भारत-पाक के 1971 के युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सेना के 93 हज़ार सैनिकों ने भारतीय सेना के आगे घुटने टेक दिए थे और आत्मसमपर्ण को मजबूर हो गए थे फिर भी भारतीय सेना ने मानव अधिकारों का उल्लंघन नहीं किया। खण्डूरी ने कहा कि हिमाचल प्रदेश वीरों की भूमि है जहां से चार परमवीर चक्र विजेताओं का होना राष्ट्र का गौरव है और सेना में बहुत से लोग राष्ट्र की सेवा में योगदान दे रहे हैं।
ब्रिगेडियर मनोज खण्डूरी ने कर्नल सुनीत शांकटा को स्वर्णिम विजय मशाल स्वागत समारोह के सफल आयोजन के लिए बधाई दी।
इस कार्यक्रम में एनसीसी ग्रुप शिमला के अधिकारी, निदेशक उच्च शिक्षा विभाग, विभिन्न संस्थानों के प्रधानाचार्य, एसोसिएट एनसीसी अधिकारी (एएनओ), और एनसीसी ग्रुप शिमला के जेसीओ/ओआर और एनसीसी कैडेट्स शामिल थे। इस समारोह के अंत में स्वर्णिम विजय मशाल को सैन्य सम्मान के साथ अपने गंतव्य की ओर रवाना किया।
स्वर्णिम विजय वर्ष मशाल स्वागत समारोह आयोजित कर एनसीसी ग्रुप शिमला की ओर से 1971 के भारत-पाक युद्ध के रणबांकुरों को किया याद, शहीदों को दी श्रद्धाजंलि और शहीदों के परिजनों को किया सम्मानित
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