दाड़लाघाट (सोलन), 13 मार्च: अंबुजा अडानी सीमेंट की खनन गतिविधियों और कथित अवैध ब्लास्टिंग के विरोध में प्रभावित ग्रामीणों का शांतिपूर्ण धरना शुक्रवार को 106वें दिन में प्रवेश कर गया। धरना स्थल पर क्रमिक भूख हड़ताल भी जारी रही, जहां ग्रामीणों ने अपने संघर्ष को जारी रखने का संकल्प दोहराया।
धरने के दौरान गांव सघोई की महंतू देवी ने एक वीडियो संदेश के माध्यम से कहा कि जिस स्थान पर वर्तमान में धरना चल रहा है, वहां उनके परिवार के लोग लगभग 200 वर्षों से घास काटते आ रहे हैं। उनका आरोप है कि यह जमीन पीढ़ियों से उनके परिवार के पास रही है, लेकिन कंपनी ने इस जमीन का मुआवजा किसी अन्य व्यक्ति को दे दिया। उन्होंने बताया कि इस मामले को लेकर उन्होंने अदालत में मामला दायर किया है और इसे सीधे तौर पर धोखाधड़ी का मामला बताया। उनका कहना है कि कंपनी ने उनसे कभी कोई बातचीत नहीं की और न ही उन्हें किसी प्रकार का मुआवजा दिया गया।
इसी बीच दाड़लाघाट पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। धरने का नेतृत्व कर रहे संयोजक संदीप ठाकुर के खिलाफ पुलिस द्वारा पहले ही दो एफआईआर और दो सिविल सूट दर्ज किए जा चुके हैं। दो दिन पहले उन्हें पुलिस स्टेशन में बताया गया कि उनके खिलाफ चार्जशीट अदालत में भेजी जा रही है, जिसमें गिरफ्तारी संबंधी प्रावधान भी शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि धरना कंपनी की जमीन पर किया जा रहा है, इसलिए कार्रवाई की गई है।
हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि जिस जमीन को लेकर पहले से अदालत में विवाद चल रहा है, उसी जमीन पर शांतिपूर्ण धरना दे रहे लोगों के खिलाफ कार्रवाई करना कई सवाल खड़े करता है।
इस बीच सूत्रों के हवाले से यह जानकारी भी सामने आई कि कंपनी के माइनिंग हेड महेंद्र रतिया को दाड़लाघाट पुलिस स्टेशन में बुलाया गया था। इससे पहले 8 मार्च को मांगू ब्लॉक की पहाड़ी पर कथित भारी ब्लास्टिंग के मामले में शिकायतकर्ताओं को पुलिस स्टेशन बुलाया गया था और उन्हें बताया गया था कि कंपनी के अधिकारी को भी पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा। उस दिन शिकायतकर्ता पूरे दिन इंतजार करते रहे, लेकिन कंपनी का कोई अधिकारी पुलिस स्टेशन नहीं पहुंचा।
ग्रामीणों का आरोप है कि जब कंपनी के माइनिंग हेड को बुलाया गया, तो शिकायतकर्ताओं को नहीं बुलाया गया, जिससे यह सवाल उठ रहा है कि कंपनी अधिकारियों से किस प्रकार की पूछताछ की जा रही है। उनका यह भी आरोप है कि शिकायतकर्ताओं को बार-बार पुलिस स्टेशन बुलाया जाता है, जबकि कंपनी के अधिकारी अपनी सुविधा के अनुसार आते-जाते हैं।
इन घटनाओं को लेकर प्रभावित ग्रामीणों में रोष है। धरना स्थल पर मौजूद लोगों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की।
धरना संयोजक संदीप ठाकुर ने कहा कि यदि कंपनी प्रबंधन और उसके अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की गई और प्रभावित ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई, तो लोग अपने अधिकारों की रक्षा के लिए कड़े कदम उठाने को मजबूर होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि धरना तब तक जारी रहेगा जब तक उपायुक्त स्वयं धरना स्थल और प्रभावित पंचायतों का निरीक्षण नहीं करते तथा पूरे मामले में राज्य स्तरीय मजिस्ट्रेट जांच की मांग पूरी नहीं होती।



