हमीरपुर:
हिमाचल प्रदेश में चल रहे निजी नशा मुक्ति केंद्रों की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से इन केंद्रों में रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत होने की करीब 10 से 12 शिकायतें नशा निवारण बोर्ड तक पहुंची हैं, जिसके बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, प्रदेश में संचालित कुछ निजी नशा मुक्ति केंद्रों में इलाज के लिए भर्ती किए गए युवाओं की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होने की घटनाएं सामने आई हैं। इन मामलों के उजागर होने के बाद प्रशासन और सरकार दोनों ही सतर्क हो गए हैं।
नशा निवारण बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार, कई शिकायतों में यह भी सामने आया है कि कुछ निजी नशा मुक्ति केंद्र तय नियमों और मानकों के अनुसार संचालित नहीं हो रहे हैं। ऐसे में बोर्ड ने इन मामलों की जांच के लिए एक समिति गठित करने का फैसला लिया है, जो प्रदेश भर में चल रहे निजी नशा मुक्ति केंद्रों की स्थिति और कार्यप्रणाली की जांच करेगी।
सूत्रों के मुताबिक, इन घटनाओं ने सरकार की चिंता भी बढ़ा दी है, क्योंकि प्रदेश में नशे की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है और कई परिवार अपने बच्चों को इलाज के लिए निजी नशा मुक्ति केंद्रों में भेज रहे हैं। ऐसे में यदि इन केंद्रों में सुरक्षा और इलाज की उचित व्यवस्था नहीं होगी, तो यह मरीजों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
इधर पुलिस भी नशे के खिलाफ कार्रवाई तेज किए हुए है। इस साल जनवरी से अब तक प्रदेश में नशे से जुड़े 38 मामले दर्ज किए जा चुके हैं और 66 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान 130 ग्राम से अधिक हेरोइन (चिट्टा) और 117 ग्राम चरस भी बरामद की है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच के दौरान किसी भी निजी नशा मुक्ति केंद्र में नियमों के उल्लंघन या संदिग्ध गतिविधियों के प्रमाण मिलते हैं, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।



