सोलन
मांगू पंचायत, जिला सोलन में सीमेंट उद्योग माइनिंग प्रभावित मंच के बैनर तले चल रहा शांतिपूर्ण धरना रविवार को 101वें दिन में प्रवेश कर गया। धरना स्थल पर मौजूद प्रभावित ग्रामीणों ने दोपहर करीब 1:30 बजे मांगू गांव के ऊपर पहाड़ी क्षेत्र में अंबुजा-अदानी सीमेंट कंपनी द्वारा की गई भारी और खतरनाक ब्लास्टिंग को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की।
इस मामले में मांगू गांव के निवासी राकेश कुमार ने पुलिस थाना दारलाघाट में एफआईआर दर्ज करने के लिए शिकायत दी। शिकायत मिलने के बाद दारलाघाट पुलिस मौके पर पहुंची और राकेश कुमार की जमीन के पास उनका बयान दर्ज किया। राकेश कुमार ने बयान में भविष्य में इस तरह की घटनाओं से अपने परिवार और स्वयं की सुरक्षा की जिम्मेदारी पुलिस द्वारा लेने की मांग की, लेकिन पुलिस ने ऐसी जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया।
प्रभावित ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने इसके विपरीत 6 दिसंबर 2025 को घमारू गांव में हुई कथित जानलेवा ब्लास्टिंग मामले में माइनिंग हेड महेंद्र रटिया का नाम बयान में शामिल करने को लेकर दबाव बनाया, जबकि पुलिस स्वयं किसी प्रकार की जिम्मेदारी लेने से बचती दिखाई दी।
इसी दौरान ललित कुमार ने ब्लास्टिंग के बाद उठे भारी धूल-धक्कड़ के गुबार का वीडियो रिकॉर्ड किया और इसे पुलिस को शिकायत के रूप में सौंपा। वहीं संदीप ठाकुर ने भी इस ब्लास्टिंग को लेकर दारलाघाट पुलिस को ई-मेल के माध्यम से एफआईआर दर्ज करने की मांग की।
बताया गया कि दारलाघाट पुलिस के एएसआई रोशन लाल ने संदीप ठाकुर को फोन कर अपने आधार कार्ड की प्रतियां और अन्य दस्तावेज लेकर थाने में उपस्थित होने को कहा, क्योंकि कंपनी द्वारा धरने को लेकर उनके खिलाफ दर्ज मामले में गिरफ्तारी की कार्रवाई आगे बढ़ाई जा रही है। इस पर संदीप ठाकुर ने एक दिन बाद थाने आने की बात कही।
घटना के दौरान मौके पर पहुंचे घमारू गांव के निवासी और माइनिंग प्रभावित मंच के सचिव धीरज ठाकुर ने पुलिस से सवाल किया कि 6 दिसंबर 2025 को घमारू गांव में हुए ब्लास्टिंग मामले में अभी तक एफआईआर क्यों दर्ज नहीं की गई। इस पर पुलिस स्पष्ट जवाब देने से बचती दिखाई दी।
ग्रामीणों के अनुसार एएसआई रोशन लाल ने यह भी कहा कि ब्लास्टिंग को रोकना पुलिस का काम नहीं बल्कि अदालत का काम है। इस पर ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब पुलिस शिकायतों पर एफआईआर दर्ज नहीं करेगी और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत कार्रवाई नहीं करेगी तो अदालत के सामने मामला कैसे पहुंचेगा।
ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी द्वारा रात के समय भी ब्लास्टिंग और खनन गतिविधियां जारी रखी जा रही हैं, जिनकी फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा की गई हैं तथा पुलिस को भी शिकायत दी गई है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
मंच के सचिव धीरज ठाकुर ने कहा कि पिछले आठ वर्षों से ग्रामीण अवैध ब्लास्टिंग, घरों में पड़ रही दरारों और खेतों के नुकसान को लेकर लगातार प्रशासन और पुलिस को शिकायतें देते आ रहे हैं, लेकिन अभी तक प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
मंच ने प्रशासन और पुलिस से मांग की है कि मांगू और घमारू क्षेत्र में हो रही खतरनाक ब्लास्टिंग की निष्पक्ष जांच कर तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए और ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे से बचा जा सके।








