Preneeta Sharma
शिमला
हिमाचल प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बड़े सियासी बदलाव की चर्चा तेज हो गई है। कुल्लू जिले में भाजपा और कांग्रेस के कई नेताओं की कथित गुप्त बैठक ने प्रदेश की सियासत में हलचल मचा दी है। सूत्रों के अनुसार इस बैठक में करीब 22 नेता शामिल हुए, जिनमें लगभग 12 पूर्व विधायक बताए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि इस बैठक में प्रदेश में तीसरे राजनीतिक विकल्प को खड़ा करने को लेकर गंभीर चर्चा हुई।
जानकारी के मुताबिक यह बैठक कुल्लू जिले के बंजार विधानसभा क्षेत्र के किसी शांत इलाके में आयोजित की गई थी। हालांकि बैठक का सटीक स्थान सार्वजनिक नहीं किया गया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस बैठक में लगभग 35 नेताओं को आमंत्रित किया गया था, लेकिन करीब 22 नेता ही इसमें शामिल हुए। खास बात यह है कि इस बैठक में चार सांसदों द्वारा पूरे कार्यक्रम को समन्वित किए जाने की भी चर्चा सामने आ रही है।
सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में शामिल होने वाले अधिकांश नेता वे हैं जो या तो पहले विधायक रह चुके हैं या फिर उन्हें आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट कटने की आशंका है। ऐसे में ये नेता एक नए राजनीतिक मंच के जरिए प्रदेश की राजनीति में अपनी भूमिका बनाए रखना चाहते हैं। चर्चा यह भी है कि बैठक में “हिमाचल बचाओ पार्टी” नाम से एक नए राजनीतिक मोर्चे के गठन का प्रस्ताव रखा गया। हालांकि अभी तक इस बारे में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
बताया जा रहा है कि बैठक में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से नेता पहुंचे थे। कुल्लू से तीन, मंडी से छह, शिमला-किन्नौर और लाहौल क्षेत्र से छह, सोलन और सिरमौर से चार, ऊना से दो, हमीरपुर से तीन, कांगड़ा से छह, चंबा से तीन और बिलासपुर से दो नेता शामिल हुए। इनमें कई पूर्व विधायक भी शामिल बताए जा रहे हैं। इस तरह प्रदेश के लगभग सभी प्रमुख क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व इस बैठक में देखने को मिला।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह तीसरा मोर्चा आकार लेता है तो इससे प्रदेश की पारंपरिक दो-दलीय राजनीति पर असर पड़ सकता है। हिमाचल की राजनीति में पहले भी तीसरे विकल्प की कोशिशें हो चुकी हैं। दिवंगत नेता Sukh Ram ने कभी हिमाचल विकास कांग्रेस बनाकर तीसरा राजनीतिक विकल्प तैयार किया था और बाद में भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाई थी, जिसमें प्रेम कुमार धूमल मुख्यमंत्री बने थे।
इसके अलावा पूर्व भाजपा नेता महेश्वर सिंह ने भी एक समय तीसरे राजनीतिक मोर्चे के रूप में हिलोपा (हिमाचल लोकहित पार्टी) का गठन किया था, लेकिन वह प्रयोग ज्यादा सफल नहीं हो पाया। अब एक बार फिर प्रदेश में तीसरे विकल्प की चर्चा ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है।
कुछ राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि भविष्य में किसी नए राजनीतिक मंच को दिवंगत कांग्रेस नेता वीरभद्र सिंह की विरासत से जोड़कर भी पेश किया जा सकता है। हालांकि इस पर अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
फिलहाल कुल्लू में हुई इस कथित गुप्त बैठक ने हिमाचल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। आने वाले समय में यह साफ होगा कि यह बैठक सिर्फ नाराज नेताओं की चर्चा तक सीमित रहती है या सच में प्रदेश में एक नया राजनीतिक मोर्चा जन्म लेता है।








