शनोल पर्व पर सिडडू से महकी क्योंथल घाटी
शिमला 06 अगस्त । क्योंथल़ क्षेत्र में श्रावण मास में शनोल पर्व पारंपरिक ढंग के साथ मनाया गया । लोगों द्वारा अपने घरों में इस पावन पर्व पर विशेष व्यंजन के रूप में मीठे और नमकीन सिडडू बनाए गए और अपने भाई बंधुओं में बांटे गए । लोगों द्वारा अपने कुल ईष्ट मंदिर में भी देवता का आर्शिवाद प्राप्त किया । बारिश की फुहारों में सिडडू को घी व दही से खाने का अलग ही आन्नद आता है । श्रावण मास में शनोल अर्थात हरियाली पर्व क्योंथल क्षेत्र की समृद्ध संस्कृति का परिचायक है जिसे लोग इस वर्ष बड़े उत्साह से मनाते हैं ।
बता दें कि हिमाचल निर्माता डॉ0 वाईएस परमार का जन्म भी शनोल अर्थात हरियाली पर्व के दिन हुआ था जिसका महत्व शनोल पर्व के साथ भी जुड़ गया हैं । वरिष्ठ नागरिक दया राम वर्मा, दौलत राम मेहता ने बताया कि लोग इस त्यौहार को कालांतर से मनाते आ रहे हैं जोकि क्षेत्र की संस्कृति का परिचायक है। श्रावण मास के 20 प्रविष्ठे को क्योंथल के अतिरिक्त सीमा पर लगते सिरमौर और सोलन के अनेक क्षेत्रों में हर वर्ष शनोल त्यौहार के रूप में मनाया जाता है । इनका कहना है कि इस पावन पर कई स्थानों पर मेलों का आयोजन किया जाता है । इस दिन देव पूजा का विशेष महत्व माना जाता है । नेई नेटी में हर वर्ष शनोल के अवसर पर मेले का अतीत से आयोजन किया जाता रहा है । शनोल उत्सव पर पारंपरिक व्यंजन बनाने का विशेष महत्व होता है लोग इस दिन मीठे और नमकीन सिडडू बनाते हैं जिसे घी और दही के साथ खाया जाता है । इनका कहना है कि यह हरियाली पर्व कालांतर से मनाया जा रहा है जिसमें महिलाएं विशेष रूप से मेंहदी और नई चूड़ियां लगाती है । लोग अपने कुलईष्ट के मंदिर में देवी देवता का आर्शिवाद प्राप्त करते हैं ।
क्योंथल क्षेत्र में पारंपरिक ढंग से मनाया शनोल अर्थात हरियाली पर्व
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