देवताओं के स्थान ठूंड में स्थित देव जुन्गा (देवचंद) के प्राचीन मंदिर का जीर्णोद्धार करके इसे पहाड़ी शैली का भव्य मंदिर निर्मित किया जाएगा जिसका निर्माण कार्य शुभ मुर्हूत में शीघ्र किया जाएगा । ताकि इस प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर का सरंक्षण व संवर्धन हो सके ।
यह बात प्रधान देव जुन्गा मंदिर निर्माण समिति प्रेम चंद ठाकुर ने मंगलवार को ठूंड में मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए आयोजित बैठक करते हुए दी ।
उन्होने कहा कि ठंूड में स्थित देव जुन्गा (चंद ) का मंदिर प्रदेश के प्राचीन मंदिरों मे से एक है। जिसका इतिहास जुन्गा रियायत के राजपरिवार से जुड़ा हुआ है और विशेष पर्व पर प्राचीन जुन्गा रियासत के राज परिवार के सदस्य मंदिर में आकर पूजा अर्चना करते हैं । उन्होने कहा कि इस प्रचीन मंदिर को धार्मिक पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा ताकि अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर अपनी अलग पहचान बन सके और श्रद्धालुओं के अतिरिक्त पर्यटक स्थल चायल, कूफरी सिलोनबाग आने वाले सैलानी भी यहां आकर मंदिर के दर्शन के अतिरिक्त प्रकृति की अनुपम छटा का आन्नद ले सके । उन्होने सभी सदस्यों से आग्रह किया कि मंदिर के निर्माण के लिए अधिक से ेअधिक चंदा एकत्रित करें ताकि निर्माण कार्य में कोई अवरोध न आए । उन्होने कहा कि सबसे पहले मंदिर के साथ एक सराय का निर्माण किया जाएगा ताकि मंदिर की मुरम्मत के दौरान देवता को इसमें रखा जा सके ।
देव जुन्गा के प्रमुख पुजारी नंदलाल शर्मा ने बताया कि कालांतर से ठंूड गांव 22 देवता के स्थान के नाम से प्रसिद्ध है । देव जुन्गा देवचंद की मान्यता क्योंथल रियासत के अतिरिक्त जिला शिमला, सोलन और सिरमौर के विभिन्न क्षेत्रों में पाई जाती है और देव जुन्गा को 22 खेल अर्थात गोत्र के लोग अपना कुल देवता मानते हैं । उन्होने बताया कि देवठण अर्थात प्रबोधनी एकादशी और दसूणी के अवसर पर पूरे क्षेत्र के देवता देवचंद, पंजाल के कुंथली देवता, धार के मनूणी देवता, भनोग के जुन्गा देवता सहित 22 देवता ठूंड में एकत्रित होते है जहां पर लोग मनौती पूर्ण होने पर देवता को भेंट अर्पित करते हैं ।
बैठक में प्रधान ग्राम पंचायत पीरन किरण शर्मा, मनोहर सिंह ठाकुर , प्रीतम सिंह ठाकुर, कृष्ण चंद रोहाल, कोषाध्यक्ष दीपक रोहाल, रामसरन, सदानंद सहित अन्य कार्यकारी सदस्यों ने भाग लिया ।








