शिमला
पूर्व मुख्यमंत्री एवं प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि सुक्खू सरकार के लिए प्रदेश के बीमार लोग ही सबसे आसान शिकार हैं। केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित फ्री डायग्नोस्टिक इनिशिएटिव सर्विसके तहत प्रदेश के सभी अस्पतालों में मरीजों को नि:शुल्क जांच की सुविधा प्रदान की जा रही है। इस योजना के तहत हिमाचल को कुल खर्च का 10 प्रतिशत हिस्सा ही वहन करना पड़ता है, जबकि 90 प्रतिशत केंद्र सरकार द्वारा दिया जाता है। अब सुक्खू सरकार ने इस पर भी नजऱ टेढ़ी कर दी है। अस्पताल में जांच के दाम बढ़ाए जा रहे हैं। आर्थिक तंगी के नाम पर सरकार हर बार स्वास्थ्य सुविधाओं को छीनने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का पूरा वित्तीय अनुशासन और बुद्धिमता सिर्फ स्वास्थ्य सुविधाओं को छीनने में ही दिखाई देती है। पंचायत चुनाव समय से न करवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया गया है।
सरकार ने सलाहकारों की फौज खड़ी करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। इससे पहले प्रदेश पर असंवैधानिक सीपीएस थोपे और उन्हें बचाने के लिए करोड़ों रुपए वकीलों पर लुटाए। जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार के खर्चों पर कोई नियंत्रण करने की बजाय मुख्यमंत्री हमेशा आम आदमी को ही शिकार बनाते हैं। पहले बीमार लोगों के लिए वरदान साबित हुई हिम केयर को बंद किया, जिससे लोगों को अपना इलाज करने के लिए कर्ज लेने को मजबूर होना पड़ा, अब सरकार केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित नि:शुल्क जांच को बंद करने का फरमान सुना रही है, जो पहले से ही बीमारी का दर्द झेल रहे लोगों के लिए किसी कुठाराघात से कम नहीं होगा।







