सामाजिक सुरक्षा पेंशन का नया दायरा रखेगा महिला सशक्तीकरण की नई नींव
पेंशन स्कीम के लिए आय सीमा 35 से 50 हजार करने का एलान
शिमला ।
दिसंबर 2017 में सत्ता की बागडोर संभालते ही मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर जनता से किए वादे लगातार निभाए हैं। इसके अलावा लीक से हटकर कमजोर वर्गों और विशेषतौर पर महिला सशक्तीकरण के लिए उन्होंने कई ऐसे ऐतिहासिक फैसले भी लिए जिन पर दशकों से नजर-ए-इनायत की जरूरत थी।

पूर्ण राज्यत्व दिवस के मौके पर सीएम जयराम ठाकुर ने कई वर्गों के लिए घोषणाएं कि लेकिन एक बार फिर उनका फोकस सामाजिक पेंशन को और सुरक्षित करने पर रहा।
सामाजिक सुरक्षा पेंशन पर हालिया एलान अभूतपूर्व है। दरअसल सामाजिक सुरक्षा पेंशन के इस दायरे में चलने वाली अधिकतर योजनाओं का लाभ महिलाओं को ही मिलता है। ऐसे में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का नया एलान सामाजिक सुरक्षा का दायर कहीं अधिक व्यापक कर रहा है, क्योंकि केंद्र की उज्ज्वला योजना और हिमाचल की गृहिणी सुविधा योजना से हर महिला तक मुफ्त गैस कनेक्शन पहुंचाने का कार्य सरकार पहले ही कर चुकी थी।
सोलन में आयोजित पूर्ण राज्यत्व दिवस के कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने हिमाचल के विकास में महिलाओं के योगदान की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने अब तक के अपने चार वर्षों के कार्यकाल के दौरान प्रदेश की आर्थिकी के सुदृढ़ीकरण, वृद्धजनों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने, युवाओं के लिए रोजगार व स्वरोजगार के अवसर सृजित करने, महिला सुरक्षा और उनका सामाजिक-आर्थिक उत्थान सुनिश्चित करने, किसानों व बागवानों और समाज के पिछड़े वर्गों की समृद्धि के लिए गंभीरतापूर्वक प्रयास किए हैं।
इन वर्गों को मिलेगा लाभ
उन्होंने समाज के कमजोर वर्ग के लिए दिए जाने वाली विभिन्न पेंशन योजनाओं के लिए आय सीमा को 35 हजार से 50 हजार तक बढ़ाने का एलान किया। नई आय सीमा से करीब एक लाख नए लाभार्थियों को लाभ मिलेगा। इसमें एकल नारी, परित्यक्त, वृद्धा पेंशन, अपंगता भत्ता, मदर टेरेसा, मुख्यमंत्री कन्यादान योजना सहित सामाजिक कल्याण की योजनाएं शामिल हैं।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने 2017 में सत्ता संभालते ही जनवरी 2018 में कैबिनेट की पहली मीटिंग में वृद्धिवस्था पेंशन की आयु सीमा को 80 से 70 वर्ष किया गया था। इसके साथ ही आय सीमा को लेकर लगाई गई शर्तें भी खत्म कर दी गई थीं। इससे बुजुर्गों को आय प्रमाण पत्र बनाने से भी निजात मिला था।
इसके साथ ही बुजुर्ग महिलाओं के लिए आयु सीमा में पांच वर्ष की विशेष छूट दी गई है। अब हिमाचल में बुजुर्ग महिलाओं को बिना आय सीमा के 65 की उम्र से पेंशन दी जा रही है। इन निर्णयों से लाखों बुजुर्ग लाभन्वित हुए।
सामाजिक सुरक्षा पेंशन का बजट 436 से हुआ 1037 करोड़
पिछली सरकार विभिन्न वर्गों के लिए सामाजिक सुरक्षा पेंशन पर 2017 में करीब 436 करोड़ रुपये खर्च कर रही थी। जयराम ठाकुर की ओर से लगातार इस वर्ग के हितों को लेकर कई फैसले लिए गए हैं। यही वजह है कि 2021 में यह बजट बढ़कर 1037 करोड़ रुपये हो चुका है और नई घोषणा के बाद इसमें और इजाफा होगा।
चार साल में 1 लाख 95 हजार नए पेंशन आवेदन स्वीकृत
जयराम सरकार के चार साल कार्यकाल में ही 1 लाख 95 हजार 3 नए पेंशन के आवेदन स्वीकृत हुए हैं। इन फैसलों से वृद्धजनों का आर्थिक और सामाजिक सशक्तीकरण हो रहा है। सरकार की ओर से 60 से 69 वर्ष के बुजुर्गों को 850 रुपये प्रतिमाह पेंशन दी जा रही है। इससे ज्यादा उम्र के बुजुर्गों को 1500 रुपये प्रतिमाह पेंशन मिल रही है। दोनों वर्गों के लिए वृद्वास्था पेंशन को मौजूदा सरकार ने क्रमशः 700 से बढ़ाकर 850 और 1250 से बढ़ाकर 1500 किया।
नारी शक्ति का सहारा बनी सरकार की यह योजनाएं
इसके अलावा भी प्रदेश सरकार द्वारा महिलाओं को सशक्त करने की दिशा में कई कदम उठाए जा रहे हैं। महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए सरकार ने मुख्यमंत्री स्वावलंबन जैसी योजनाएं भी चलाई हुई हैं। महिलाएं रोजगार हासिल करने की जगह रोजगार देने का काम करें, इसके लिए उन्हें स्वावलंबन योजना के तहत विशेष छूट दी जा रही है। महिलाओं को उपदान भी अधिक मिल रहा है और पात्रता के लिए आयु सीमा में भी छूट दी गई है।
बीपीएल परिवारों की बेटियों की शादी के लिए मुख्यमंत्री शगुन योजना और बेसहारा महिलाओं और लड़कियों के विवाह के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करने में मुख्यमंत्री कन्यादान योजना बहुत लाभदायकक सिद्ध हो रही है।
प्रदेश की महिलाओं को चूल्हे के धुएं से स्वास्थ्य को होने वाले नुकसान से मुक्त करवाने के लिए केंद्र सरकार की उज्ज्वला योजना और प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही मुख्यमंत्री गृहिणी सुविधा योजना काफी कारगर साबित हुई हैं। केवल गृहिणी सुविधा योजना के अंतर्गत ही 3 लाख 23 हजार परिवारों को मुफ्त गैस कनेक्शन प्रदान किए गए हैं। इन दोनों योजनाओं के सफल संचालन से ही हिमाचल देश का पहला चुल्हा धुआंमुक्त राज्य घोषित किया गया।








