हिमाचल प्रदेश के 6 बार के सीएम रहे कांग्रेस के दिग्गज नेता राजा वीरभद्र सिंह का निधन हुए अभी कुछ ही वक्त बीता है कि सूबे में कांग्रेस की सियासी हवा का रुख बदलने लगा है। दरअसल, राजा साब के निधन के बाद पहली बार मुख्यमंत्री पद पर किसी जिले के लिए दावा ठोंका है। ये दावा किसी और ने नहीं दिवंगत राजा के कट्टर प्रतिद्वंदी माने जाने वाले कांग्रेस नेता एवं पूर्व मंत्री जीएस बाली ने ठोंका है।
गौरतलब है कि इस बात का पहले से ही अनुमान जताया जा रहा था कि वीरभद्र सिंह के निधन के बाद कांग्रेस में काफी कुछ बदल जाएगा। बीजेपी के नेताओं द्वारा भी कांग्रेस को इस बात की सलाह दी गई थी कि वे अब सूबे में कांग्रेस के विस्तार के लिए किसी नए चेहरे की तलाश करें। लेकिन ताजा घटना क्रम देखकर ऐसा लग रहा है कि वीरभद्र सिंह के निधन के बाद अभिभावकहीन हुई कांग्रेस में अंतर्कलह अभी और बढ़ने वाली है।
पूर्व मंत्री जीएस बाली ने कहा है कि 50 साल बाद मुख्यमंत्री का चेहरा जिला कांगड़ा से होना चाहिए। जीएस बाली के इस बयान के बाद सूबे की सियासत गरमा गई है। गुरुवार को मीडिया के सवाल में बाली ने कहा कि जिला कांगड़ा का मुख्यमंत्री की सीट पर पूरा अधिकार है। इसे कोई नजरअंदाज नहीं कर सकता। सूबे की सियासत की गाड़ी यहीं से निकलती है, तभी वह शिमला पहुंचती है। अब समय की भी यही पुकार है।
वीरभद्र के बाद अब हिमाचल में कांग्रेस का नेता कौन होगा, इस सवाल पर उन्होंने कहा कि जिसके लिए पार्टी और लोग मानेंगे, वही नेता होगा। दावा करने से कुछ नहीं होगा। नेता जनता और पार्टी हाईकमान बनाएगी। गुटबाजी के सवाल पर उन्होंने कहा कि ऐसा कुछ नहीं है। अगर गुटबाजी होगी भी तो एक डिनर में खत्म हो जाएगी।








