देश की मंडियों में बंगलूर का टमाटर आने से टमाटर के दाम में भारी गिरावट आई है जिससे किसानों को वर्ष भर की रोजी-रोटी की चिंता सताने लगी है ।
बता दें कि सोलन की तर्ज पर मशोबरा ब्लॉक के निचले क्षेत्रों में टमाटर की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है और टमाटर किसानों की मुख्य आय का साधन बन चुका है । सोलन सब्जी मंडी में बुधवार को टमाटर की हिमसोना किस्म 200 से 350 रूपये और सनौरा मंडी में अधिकतम 250 रूपये प्रति करेट बिकी ।
जबकि इससे पहले टमाटर की 22 किलोग्राम की करेट 400 से 500 रूपये में बिक रही थी । इसके अतिरिक्त किसानों द्वारा टमाटर चंडीगढ़ और पानीपत में भी भेजे जा रहे हैं जहां पर टमाटर करेट इसी भाव मंे बिक रही है। जिससे किसानों की गाड़ी का किराया व दवाईयों का खर्चा भी बड़ी मुश्किल से निकल रहा है ।
क्षेत्र के ट्रॉस्पोर्टर विनोद शर्मा और प्रदीप ब्रागटा का कहना है कि बेंगलूर से मंडियों में भारी मात्रा में टमाटर आने से टमाटर के दाम दिन प्रतिदिन गिर रहे है । अर्थात इन दिनों टमाटर 10 से 15 रूपये प्रति किलोग्राम मंडियों में बिक रहा है ।
सनौरा मंडी में विभिन्न क्षेत्रों से आए किसानों ने बताया कि इस वर्ष भारी सूखा पड़ने से भी टमाटर की फसल काफी प्रभावित हुई है दूसरी ओर टमाटर भूसा के भाव बिकने से किसानों की हालत दयनीय हो चुकी है। अर्थात किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है । इनका कहना है कि सरकार ने मक्की और धान को फसल बीमा के तहत लाया गया है । परंतु सब्जियों को इस योजना से बाहर रखा है । जबकि टमाटर, मटर, शिमला मिर्च और आलू की फसल को फसल बीमा योजना के तहत लाना चाहिए । क्षेत्र के बुद्धिजीवी वर्ग का कहना है कि किसानों का रूझान पारंपरिक फसलों की अपेक्षा नकदी फसलों की ओर काफी बढ़ा है । जिसके चलते सरकार को नकदी फसलों को फसल बीमा योजना के तहत लाना चाहिए ताकि किसान की क्षतिपूर्ति हो सके ।
प्रगतिशील किसान देवेन्द्र नंबरदार ने बताया कि टमाटर का सीजन मात्र दस दिन शेष बचा है और यदि रेट नहीं बढ़े तो किसानों की आर्थिक स्थिति बहुत खराब हो जाएगी । बता दें कि किसानों ने टमाटर की किस्म 816, अभिरंग, हिम सोना इत्यादि किस्में लगाई है और जिन किसानों द्वारा रॉकस्टार किस्म लगाई गई उन्हें काफी नुकसान हुंआ है



