राजनैतिक व समाजिक समारोह में असिमित संख्या होने के बावजूद भी कोई पाबंदी नहीं लगाई गई है परंतु प्रायमरी व मिडल स्कूल खोलने पर सरकार का ढुलमुल रवैया क्यों है । जहां पर बच्चों की सीमित संख्या होती है जिनका सरकार द्वारा जारी एसओपी के तहत आसानी से प्रबंधन हो सकता है । जुन्गा क्षेत्र के बुंद्धिजीवी दीपक शर्मा, राकेश कुमार, रमेश कुमार, राजकुमार, जयनंद, सेवकराम सहित अनेक अभिभावकों ने बताया कि ऑन लाईन शिक्षा से बच्चों का भविष्य धूमिल हो गया है और सरकार को प्रायमरी व मिडल स्कूल भी खोल देने चाहिए ।
इनका कहना है कि बच्चे ऑन लाईन क्लासें लगाने के बहाने दिनभर एंड्रायड फोन पर गेम इत्यादि खेलते रहते हैं । यहीं नहीं ऑनलाईन परीक्षा भी बच्चे किताबें देखकर दे रहे हैं और शिक्षा विभाग उसी के आधार पर बच्चों को उतीर्ण घोषित कर रहा है । जिससे प्रतिभावान बच्चे काफी निरूत्साहित हो रहे हैं । अभिभावकों का कहना है कि बच्चे मोबाईल एंड्रायड फोन के आदी हो चुके हैं अब उन्हें अन्य खेल पसंद ही नहीं है । इनका कहना है कि अनेक गरीब अभिभावकों को कर्ज लेकर बच्चों के लिए एंड्रायड मोबाईल खरीदने पड़े और अधिकांश बच्चे इंटरनेट का दुरूपयोग कर रहे हैं । कोरोना महामारी से पहले सरकार व अध्यापक बच्चों को मोबाईल से दूरी बनाए रखने का आग्रह किया करते थे और एंड्रायड फोन को बच्चों के लिए हानिकारक बताया जाता था और अब वही शिक्षा का एक अभिन्न अंग बन चुका है। अभिभावक विश्वानंद ठाकुर का कहना है कि राजनैतिक रैलियों, आन्दोलन और विवाह इत्यादि समारोह में असिमित लोग भाग ले रहे हैं जिनके द्वारा कोविड-19 नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है उनको कोई पूछने वाला नहीं । लोग बिना मास्क व समाजिक दूरी बनाए रखते हुए हर बाजार व अन्य समारोहों में बेखौफ होकर भाग ले रहे है । परंतु स्कूल खोलने पर सरकार क्यों निर्णय नहीं ले पा रही है जबकि स्कूलों में बच्चों की सीमित संख्या है जिनका स्कूल प्रशासन आसानी से प्रबंध कर सकता है ।
हिप्र किसान सभा के राज्याध्यक्ष डॉ0 कुलदीप तंवर ने भी सरकार से मांग की है कि बच्चों के भविष्य को मध्यनजंर रखते हुए स्कूलों को एसओपी तैयार करके खोल दिया जाना चाहिए । बताया कि ऑन लाईन शिक्षा मात्र एक औपचारिकता है जोकि बच्चों को अपने मुकाम तक नहीं पहूंचा सकता है । स्कूल खोलने के लिए अध्यापकों को कोविड नियमों का पालन करने बारे सख्त हिदायत दी जानी चाहिए । इनका कहना है कि अभिभावक अपने बच्चों के भविष्य को लेकर काफी चिंतित है जिस बारे सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए








