कम वेतन मिलने का पूरनिया को नहीं कोई मलाल-अपने कार्य से खुश है पूरनिया
शिमला 02 मई । जिस व्यक्ति में ईमानदारी व कर्तव्यनिष्ठा से कार्य करने की दृढ़ इच्छा हो उसके लिए मजदूरी अथवा वेतन ज्यादा मायने नहीं रखते हैं । ऐसा ही एक जीवन्त उदाहरण है पूरनिया राम , जोकि मशोबरा ब्लाॅक की आखिरी पंचायत पीरन में बीते दस वर्षों से बतौर जल रक्षक कार्यरत है । यदि आप इनकी दिहाड़ी को पूछे तो आप चैंक जाएगंे परंतु पूरनिया राम को कम दिहाड़ी मिलने का कोई मलाल नहीं है । इनका उददेश्य केवल अपने कार्य को ईमानदारी से करना है ताकि पीरन गांव में कोई भी परिवार प्यासा न रहे । बता दें कि पूरनिया राम को वर्तमान में केवल 3600 रूपये मानदेय प्रतिमाह मिलता है जिसके एवज में प्रातः 9 बजे से सांय 5 बजे डियूटी बजाते हैं । अर्थात 120 प्रतिदिन पर आठ घंटे कार्य करते हैं । सबसे अहम बात यह है कि इतनी कम सेलरी होने के बावजूद पूरनिया राम ने बीते दस वर्षों में कभी रविवार का अवकाश अपने घर पर काटा हो । प्रातः आठ बजे घर से खाना खाकर आते हैं और शाम को घर पहूंचकर ही खाना खाते हैं ।
हाथ में रैंच लिए पूरनिया राम प्रातः 9 बजे पानी के स्त्रोत पर पहूंच जाते हैं और पानी छोड़ने के उपरांत पूरे गांव को दौरा करते हैं कि पानी सभी घरों में आ रहा है अथवा नहीं । जलापूर्ति होने के उपरांत पूरनिया राम पुनः जलस्त्रोत पर जाकर टैंक को बंद करते हैं और दोपहर बाद तीन बजे इनके द्वारा गांव में पुनः जलापूर्ति की जाती है । इनकी कार्य के प्रति निष्ठा को देखते हुए स्थानीय लोग इन्हे कमांडो कहकर पुकारते हैं जिससे पूरनिया राम को कार्य करने की ऊर्जा दोगुना हो जाती है । पूरनिया राम ने बताया कि वर्ष 2012 में जब उन्होने जल शक्ति विभाग मंे नौकरी शुरू की थी तो उन्हें केवल 1350 रूपये मिलते थे जोकि अब बढ़कर 36सौ रूपये प्रतिमाह हो गए हैं । बताया कि पीरन गांव में पानी के करीब 60 पानी के कुनेक्शन है परंतु कई बार लोग पाईप लाईन में कपड़ा इत्यादि फंसा देते हैं जिससे उनको सारी पाईप लाईन उखाड़नी पड़ती है और दोगुना कार्य बढ़ जाता है । इनका कहना है कि 36 सौ रूपये में उनके परिवार का खर्चा बेहतरीन ढंग से चल रहा है औ अब रेगुलर होने का इंतजार है कि कब उन पर सरकार मेहरबान होगी ।
कनिष्ठ अभियंता जेएसवी कोटी उप मंडल राजकुमार शर्मा ने बताया कि सरकार द्वारा जल रक्षकों को पंचायतों पानी को छोड़ने व बंद करने इत्यादि कार्य के लिए तैनात किए गए है । इस वर्ग को नियमित करना सरकार के विचाराधीन है ।
दिहाड़ी 120 रूपये के बावजूद भी पूरनिया कर रहे आठ घंटे ईमानदारी से कार्य
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