सयुंक्त कर्मचारी महासंघ की गूगल मीट के माध्यम से बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें 10 नए संगठनों ने शिरकत कर कुल 35 कर्मचारी संगठनों ने बैठक में भाग लिया। बैठक के दौरान सभी कर्मचारी संगठनों के प्रदेश अध्यक्ष एवं महासचिव ने भाग लिया।

इस दौरान संयुक्त कर्मचारी महासंघ की कार्यकारिणी के विस्तार पर चर्चा हुई और यह तय किया गया कि सभी विभागों को महासंघ में जिम्मेदारी दी जाएगी। बैठक के दौरान सभी कर्मचारी संगठनों के नेताओं ने अपनी अपनी बात रखी और पूर्ण राजत्व दिवस के उपलक्ष पर मुख्यमंत्री की घोषणाओं पर उसके नफे नुकसान को लेकर सभी ने अपने विचार रखे। बैठक का संचालन महासंघ के महासचिव हीरा लाल वर्मा ने किया और उसकी अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने की। बैठक के दौरान विभागों के नेताओं ने अपने अपने विभाग के कर्मचारियों को हो रहे वेतन आयोग से घाटे के बारे में बताया। यह भी प्रकाश डाला गया के 15% के विकल्प से किस-किस वर्ग को फायदा या नुकसान हो रहा है।चौहान ने कहा के जो कर्मचारी एवं शिक्षक पहले से ही 10300- 34800 वाले पे बैंड या इससे अधिक वाले पे बैंड में थे और 1-10-2012 से उनका वेतनमान या यूँ कहे ग्रेड पे संशोधित हो गया था उनको तो 15% वाले विकल्प से पहले की तुलना में 5000 तक के बेसिक पे मे और कमी आ जाएगी जिससे यह कर्मचारी पंजाब की तुलना में और पिछड़ जाएंगे इसका मतलब यह हुआ कि बाकी के कर्मचारी 15% वाले विकल्प को नहीं सुन पाएंगे। इसके अतिरिक्त 2009 से पहले के कर्मचारी को भी 2.59 वाला फैक्टर ही सूट करेगा यह कर्मचारी भी 15% वाला विकल्प नहीं चुन पाएंगे। तो कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि 15% वाला विकल्प किसी भी तरह से कर्मचारियों को फायदेमंद नहीं होगा जब तक 1-10-2012 से देय संशोधित वेतनमान में 2 साल की शर्त खत्म नहीं की जाती है और साथ में इनिशियल स्टार्ट की बहाली नहीं होती है तब तक हम इसका विरोध करेंगे। वीरेंद्र चौहान ने कहा की हमने 15 दिन का अल्टीमेटम दिया है यदि हमारे अल्टीमेटम के अनुसार सभी बातों को नहीं माना जाता है तो संयुक्त कर्मचारी महासंघ हजारों कर्मचारियों की मौजूदगी में सरकार के खिलाफ हल्ला बोलेगा।








