शिमला
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह ठाकुर द्वारा वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पेश किए गए बजट को लेकर पेंशनरों में नाराजगी देखने को मिल रही है।हिमाचल प्रदेश पेंशनर संयुक्त संघर्ष समिति ने बजट को पेंशनर विरोधी करार देते हुए इसकी कड़ी आलोचना की है।
समिति के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश ठाकुर,समिति के अतिरिक्त महासचिव भूप राम वर्मा ने सयुंक्त जारी बयान में कहा कि 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 के बीच सेवानिवृत्त कर्मचारियों को उनकी संशोधित ग्रेच्युटी, पेंशन कम्यूटेशन, अवकाश नकदीकरण और संशोधित पेंशन देने के लिए बजट में किसी प्रकार का वित्तीय प्रावधान नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि इससे हजारों पेंशनरों में निराशा फैल गई है।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने केवल 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 के बीच सेवानिवृत्त हुए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को उनकी देनदारियां देने की बात दोहराई है, जबकि यह घोषणा पिछले वर्ष से की जा रही है। इसके अलावा लंबित चिकित्सा बिलों के भुगतान को लेकर भी बजट में कोई घोषणा नहीं की गई है।
सुरेश ठाकुर ने कहा कि बजट में केवल 31 दिसंबर 2015 से पहले के पेंशनरों की देनदारियों के भुगतान का उल्लेख किया गया है, जबकि उनका बकाया बहुत कम है। वहीं 13 प्रतिशत महंगाई भत्ता देने के संबंध में भी कोई जिक्र नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि यह बजट पेंशनरों के साथ अन्याय और धोखा है। बजट से प्रदेश के पेंशनरों में भारी निराशा और नाराजगी है। पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति ने इस फैसले की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि पेंशनरों के हितों की अनदेखी किसी भी हाल में सहन नहीं की जाएगी।



