शिमला 04 जनवरी । राष्ट्रीय स्तर की संयुक्त रक्षा सेवा (सीडीएस) की परीक्षा क्रेक करने के उपरांत रविवार को रजत वर्मा पहली बार अपने पैतृक गांव पीरन पहूंचे जहां पर इनका स्थानीय लोगों ने फूलमालाओं और रजत वर्मा जिंदाबाद के नारों के साथ गर्मजोशी के साथ स्वागत किया गया । इनके पिता खजान सिंह वर्मा और माता शकुंतला वर्मा बेटे की इस उपलब्धि पर अपनी आंखों में आंसू रोक नहीं पा रही थे । गौर रहे कि रजत वर्मा ने पहले ही प्रयास में बिना किसी कोचिंग के सीडीएस की परीक्षा उतीर्ण करके एक कीर्तिमान हासिल किया है और रजत अब भारतीय सेना में बतौर लेफ्टिनेंट अपनी सेवाएं आरंभ करेगंे। इन्होने ऑल इंडिया में 43वां रैंक हासिल किया है । बता दें कि रजत वर्मा इस क्षेत्र के पहले सेना अधिकारी बने हैं जिन्होने समूचे जुन्गा क्षेत्र का गौरव बढ़ाया है और युवाओं के लिए रजत एक प्रेरणा स्त्रोत बने हैंे । । सेना से आदेश मिलने पर रजत ऑफिसर ट्रेनिग अकादमी चैन्नई में प्रशिक्षण करने जाएंगे ।ं
गौर रहे कि रजत वर्मा का जन्म वर्ष 2002 को मशोबरा ब्लॉक की अंतिम छोर के गांव पीरन में हुआ । इनके पिता खजान सिंह वर्मा शिक्षा विभाग में अध्यापक है जबकि माता शकुंतला वर्मा एक गृहिणी है । रजत ने नर्सरी से लेकर 12वीं तक की शिक्षा सेंट एडवर्ड स्कूल शिमला से उतीर्ण की है । तदोपरांत रजत ने बीए ( अर्थशास्त्र ) डिग्री कॉलेज सोलन से हासिल की है । रजत ने बताया कि उन्हें स्कूल टाइम से ही वर्दी पहनने का जनून सवार था । कॉलेज में रजत एनएसीसी में बतौर अंडर ऑफिसर सक्रिय रूप से कार्यरत रहे । जिसके फलस्वरूप इन्हें दो बार दिल्ली में गणतंत्र दिवस परेड में भाग लेने का अवसर प्राप्त हुआ ।
उन्होने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने माता पिता के अलावा अपने ताया रिटायर्ड बैंक मेनेजर मोहन वर्मा और बुआ (रिटायर्ड एसओ) हाईकोर्ट शिमला शिक्षा ठाकुर अपने दोस्तों को दिया है जिनके मार्गदर्शन में उन्होने बचपन से शिमला में शिक्षा ग्रहण की है । इन्होने युवाओं से आग्रह किया है कि वह किसी कुसंगति अर्थात नशे की प्रवृति में पड़कर अपने जीवन को बर्बाद न करें बल्कि अपनी रूचि अनुरूप लक्ष्य निर्धारित करके आगे बढ़े।
पैतृक गांव पीरन पहूंचने पर लेफ्टिनेंट रजत का फूलमालाओं से हुआ स्वागत
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