असुरक्षित भवन में जान जोखिम में डाल कर कर्मचारी दे रहे सेवाएं
शिमला 06 मई । जहां एक ओर प्रशासन प्राकृतिक आपदा के दौरान आमजन को सहायता प्रदान करने में अहम भूमिका निभाता हैं वहीं पर जुन्गा तहसील के अधीन आने वाला पटवार भवन पीरन काफी वर्षों से बदहाली के आंसू बहा रहा है । भवन की हालत ऐसी है कि खुद मियां फजीहत -दूसरों को नसीहत वाली कहावत प्रशासन पर सटीक बैठती है। आलम यह है कि बरसात का पानी रोकने के लिए भवन की छत पर एक नहीं तीन -तीन तिरपाल बिछाए गए हैं इसके बावजूद भी बरसात का पानी कार्यालय में टपकता है जिससे पटवार भवन की छत जर्जर हालत में हो गई है और पानी के टपकने से इस कार्यालय में रखा गया राजस्व रिकार्ड खराब होने लगा है ।
पीरन के वरिष्ठ नागरिक एवं पूर्व प्रधान दया राम वर्मा, दौलत राम मेहता, जबर सिंह ठाकुर , केडी शर्मा सहित अनेक लोगों ने बताया कि करीब 40 वर्ष पूर्व पटवार घर का निर्माण किया गया था जिसमें पटवारी के रहने की सुविधा भी उपलब्ध है । बीते करीब 6-7 वर्षों से इस भवन में लगी लकड़ी सड़ जाने से इसकी हालत बहुत खराब हो गई है और कर्मचारी इस असुरक्षित भवन में जान जोखिम में डाल कर लोगों की सेवा कर रहे हैं । बारिश होने पर कार्यालय में रखा राजस्व रिकार्ड को बचा कर रखना पटवारी के लिए बहुत बड़ी चुनौती बन गई है ।
लोगों ने बताया कि इस भवन की मुरम्मत के लिए कई बार प्रशासन से गुहार लगाई गई हैं परंतु प्रशासन के कान पर जूं तक नहीं रेंगती है । इन्होने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पटवार घर को प्रशासन की सबसे छोटी इकाई मानी जाती है जिसके माध्यम से लोगों को राजस्व संबधी सभी सुविधाएं प्रदान की जाती है । पीरन गांव के लोगों ने सरकार से आग्रह किया है कि बरसात होने से पहले इस पटवार भवन की मुरम्मत करवाई जाए और वैकल्पिक तौर पर इस कार्यालय को सुरक्षित भवन में शिफ्ट किया जाए ।
जुन्गा तहसील के नायब तहसीलदार राजेन्द्र ठाकुर ने बताया कि पटवार घर की मुरम्मत के लिए प्राक्कलन तैयार करके जिला प्रशासन भेजा गया है । इसके अतिरिक्त पटवार भवन को पंचायत घर में शिफ्ट करने के लिए ग्रामीण विकास विभाग के साथ पत्राचार किया गया है ।
पीरन में पटवार भवन वर्षो से बहा रहा बदहाली के आंसू
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