मेले पर करीब 20 हजारों लोगों ने किए माता के दर्शन
शिमला 04 अक्तूबर । कसुपंटी निर्वाचन क्षेत्र के धरेच पंचायत के केलियाघाट स्थित जैईश्वरी माता मंदिर में चल रहे दशहरा मेले के चौथे दिन करीब 20 हजार लोगों ने माता के दर्शन किए । माता के जयघोष से समूची धरेच घाटी गूंज उठी गौर रहे कि धरेच में माता नगरकोटी का प्राचीन मंदिर है और माता हर वर्ष शरद नवरात्रों की अष्टमी को केलियाघाट स्थित मंदिर में भक्तों को दर्शन देने के लिए विराजमान रहती है । इस मंदिर में आठ दिनों अर्थात अष्टमी से पूर्णमासी तक दशहरा मेले का आयोजन किया जाता है जिसमें एकादशी के दिन बड़े मेले का आयोजन किया जाता है । सबसे अहम बात यह है कि इस मेले में देवी दर्शन ही आकषर्ण का केंद्र होते हैं। इसके अलावा मेले में कोई अन्य गतिविधियां नहीं होती । दूरदराज क्षेत्र से रतेश, फागू , क्योंथल और धरेच क्षेत्र के लोग मंदिर में मनौती चढ़ाने आते हैं जिसमें विशेषकर लोग अपने छोटे बच्चों के मुंडन करवाने आते हैं । 07 अक्तूबर को माता वापिस धरेच के लिए प्रस्थान करेगी ।
माता के बजीर परिवार के हरिचंद शर्मा के अनुसार जैईश्वरी नगरकोटी माता बहुत प्रत्यक्ष देवी है जोकि विशेषकर निःसंतान दंपतियों की सूनी गोद देवी निश्चित रूप से भर देती है । उन्होनें बताया ं कि एकादशी को सैंकड़ों दम्पति अपने बच्चों का मुडन करवाते है । इस मेले में प्रतिदिन विभिन्न गांव के कारिंदों द्वारा लंगर का आयोजन किया जाता है जिसमें बगोल, धारठी, सौंथल , रिहाड़, बटनाली और खगनाल द्वारा लंगर लगाए जाते हैं । एकादशी के अवसर पर आयोजित लंगर में करीब दस क्ंिवटल चावल की खपत हो जाती है ।
हरिचंद शर्मा ने बताया कि अतीत में इस मंदिर में बलि प्रथा हुआ करती थी जिसे माता के बजीर मोती राम शर्मा ने सुप्रीमकोर्ट के आदेशों से पहले ही बंद करवा दिया था । उन्होने बताया कि इस मंदिर में चावल के दाने प्रसाद रूप में दिए जाते हैंे जिसे लोग अपने घरों में सहेज कर रखते हैं । यह मंदिर धार्मिक पर्यटन के तौर भी दिन प्रतिदिन उभर रहा है कूफरी, फागू आने वाले पर्यटक धरेच मंदिर आना नहीं भूलते है जहां पर माता के दर्शन के अलावा हिमालय की हिमाच्छादित पर्वत श्रृखलाओं का अदभुत नजारा यहां से देखने को मिलता है ।



