शिमला। नगर निगम महापौर सत्या कौंडल के संजौली वार्ड के चलौंठी इलाके में बनी सड़क अब चर्चा में आ गई है। पांच लाख से इस सड़क को चौड़ा करने का जिम्मा निगम ने जिस ठेकेदार को दिया था उसने रातोंरात मनमर्जी से डंगे लगा दिए।
सड़क तो चौड़ी हुई नहीं, नगर निगम की परेशानी जरूर बढ़ गई। स्थानीय लोगों के सवाल उठाने के बाद अब इन डंगों को तोड़ना पड़ रहा है। निगम प्रशासन के अनुसार संजौली के चलौंठी चौक से लोअर चलौंठी के लिए बनी सड़क काफी तंग है। इसे चौड़ा करने के लिए सड़क की हिल साइड में खुदाई कर ब्रेस्ट वॉल (डंगा) लगनी थी। इससे सड़क दो फीट तक चौड़ी होनी थी। इसके लिए सड़क पर करीब चार फीट ऊंचे और दो फीट चौड़े डंगे लगने थे। लेकिन ठेकेदार ने अपनी मर्जी से काम शुरू कर दिया।
यह ठेकेदार दिन की बजाय रात को काम कर रहा था। सुबह स्थानीय लोगों ने इसकी शिकायत मेयर और निगम अधिकारियों से कर दी। निगम की एक टीम सहायक अभियंता गोपेश बहल की अगुवाई में चलौंठी पहुंची तो देखा कि ठेकेदार ने दो फीट की जगह चार फीट चौड़े डंगे लगा दिए हैं। इससे सड़क चौड़ी नहीं हुई। निगम टीम ने इसे ठीक करने को कहा, लेकिन ठेकेदार ने फिर अगली रात काम जारी रखा। निगम की टीम फिर मौके पर पहुंची और डंगे का कुछ हिस्सा तोड़ दिया। साथ ही इसे काम रोकने के निर्देश जारी कर दिए। अब इस पर कार्रवाई के लिए नोटिस दिया जा रहा है। साथ ही इसकी पेमेंट भी रोकी जा रही है। निगम प्रशासन का कहना है कि इन डंगों को तोड़ा जाएगा।
ठेकेदार ने मनमर्जी से किया काम : भारद्वाज
ठेकेदार ने नगर निगम के निर्देश नहीं माने और मनमर्जी से डंगे लगा दिए। इससे सड़क चौड़ी नहीं हुई। ऐसे में यह डंगे तोड़ने होंगे। इस बारे में ठेकेदार को नोटिस जारी कर रहे हैं।
-अजीत भारद्वाज, अतिरिक्त आयुक्त नगर निगम
ठेकेदार पर कार्रवाई होनी चाहिए : मेयर
मुझे शिकायत मिली थी जिसके बाद अधिकारियों को कार्रवाई के लिए कहा गया है। नियमानुसार काम न करने वाले ठेकेदारों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
-सत्या कौंडल, मेयर नगर निगम महापौर
पहले डंगे लगाए, अब तोड़ रहे
शहर में सड़कों के किनारे लगाए गए डंगों को अब तोड़ा जा रहा है। रेलिंग लगाने के लिए मशीनों के जरिये इन डंगों को तोड़ा जा रहा है। बैम्लोई और कैलस्टन के पास कुछ महीने पहले डंगे लगाए गए थे। लेकिन इसमें रेलिंग भी लगनी है, यह काम लोनिवि भूल गया। रेलिंग के लिए जगह नहीं रखी। अब ड्रिल मशीन से सभी डंगे तोड़ने पड़ रहे हैं। इस पर शहरवासी सवाल उठा रहे हैं कि जब रेलिंग लगानी ही थी तो पहले जगह क्यों नहीं रखी गई। मशीनों से अब डंगे तोड़ रहे हैं जिस पर जनता का पैसा बर्बाद किया जा रहा है।








