राजगढ़ 07 अक्तूबर।
अधिसूचना का हाटी समुदाय बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं ताकि गिरिपार क्षेत्र के लोगों में उत्पन्न हुई भ्रम की स्थिति पर विराम लग सके । बता दें कि इन दिनों समूचे गिरिपार क्षेत्र में इस बारे तरह तरह की अटकलों और चर्चाओं का बाजार गर्म है। हाटी समुदाय को जनजातीय का दर्जा दिए जाने पर जहां केंद्रीय हाटी समिति अपने पांच सदियों से चल रहे संघर्ष की जीत मान रही है वहीं पर गिरिपार अनुसूचित जाति अधिकार सरंक्षण समिति भी अपने अधिकारों बचाने में कामयाब होने की बात कर रही है ।
बता दें कि भारत सरकार द्वारा बीते दिनों केबिनेट में गिरि पार के हाटी समुदाय को जनजातीय का दर्जा दिया गया है। हालांकि लोगों को किन्नौर की भांति गिरिपार को भी कबायली क्षेत्र घोषित होने की उम्मीद थी । केंद्रीय हाटी संघर्ष समिति द्वारा उतराखंड के जौनसार बाबर की तर्ज पर जनजातीय दर्जा देने की मांग की गई थी जिस पर भारत सरकार ने मुहर लगा दी । 24 जून, 1967 को प्रकाशित राजपत्र में जौनसार बाबर की पांच जातियों भोटिया, बुस्का, जौनसारी, राजी और थारू को जनजातीय घोषित किया गया है । इस राजपत्र में जौनसार बाबर को जनजातीय क्षेत्र घोषित होने बारे कोई जिक्र नहीं किया गया है । बीते वर्ष सांसद प्रतिभा सिंह और वर्ष 2019 में सांसद सुरेश कश्यप द्वारा लोकसभा में पूछे गए प्रश्न के जवाब में भारत सरकार के जनजातीय मंत्रालय द्वारा भी जौनसार बाबर को जनजातीय क्षेत्र का दर्जा न होने की पुष्टि की गई है ।
सूत्रों के मुताबिक केंद्र को भेजी गई गिरिपार क्षेत्र की रिपोर्ट में हाटी समुदाय से जुड़ी 14 जातियों का जिक्र किया गया है । जिसमें अनुसूचित जाति से संबधित 12 जातियां शामिल है । जिसकी आबादी करीब 90 हजार से अधिक बताई जा रही है जबकि सरकारी आंकड़ों के अनुसार गिरिपार में उच्च वर्ग की आबादी एक लाख .60 हजार है । स्पष्ट रूप से अगर अनुसूचित जाति को छोड़कर उच्च वर्ग में दो ही प्रमुख जातियां ब्राह्मण और राजपूत शेष रह जाती है जिनकी उप जातियां भी राजस्व रिकार्ड में अंकित है । अधिसूचना जारी के उपरांत ही स्थिति स्पष्ट होगी कि कोन कोन सी जातियों व उप जातियों को जनजातीय दर्जा मिला है । वर्तमान में लोगों में इस बारे भ्रम की स्थिति बनी हुई है । विशेषकर जो उच्च जाति के अन्य पिछड़ा वर्ग अर्थात ओबीसी का 28 प्रतिशत लाभ ले रहे थे। इस वर्ग में असमंजस की स्थिति बनी हुई है कि जनजातीय बनने पर उन्हें भी साढ़े सात प्रतिशत आरक्षण मिलेगा । इसी प्रकार ईडब्लुयएस अर्थात अति निर्धन वर्ग जिन्हें सरकार द्वारा वर्तमान में दस प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है इनमें भी संशय की स्थिति बनी हुई कि उनका आरक्षण भी घटकर साढ़े सात प्रतिशत न रह जाए ।
गौर रहे कि केंद्रीय हाटी समिति द्वारा समूचे गिरिपार क्षेत्र में केंद्र व राज्य सरकार का आभार व्यक्त करने के लिए जनजागरण अभियान आरंभ करने की रूपरेखा तैयार की गई है जिसमंें केंद्र व राज्य सरकार का कर्ज उतारने की बात की जा रही है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की बदौलत गिरिपार के हाटी समुदाय को जनजातीय का दर्जा मिला है । वहीं पर गिरिपार अनुसूचित जाति अधिकार सरंक्षण समिति ने भी समाजिक न्याय यात्रा निकालने के लिए पांच सौ किलोमीटर पैदल सफर करने की योजना तैयार की गई है ।
बुद्धिजीवी वर्ग का मानना है कि यदि गिरिपार को जनजातीय क्षेत्र का दर्जा मिलता तो ट्राईबल सब प्लान के तहत क्षेत्र के विकास के लिए अलग बजट मिलना था । गिरिपार क्षेत्र के हाटी समुदाय को जनजातीय दर्जा मिलने से प्रदेश में जनजातीय आबादी में इजाफा हुआ है और आरक्षण केवल वही साढ़े सात प्रतिशत रहा है । दूसरी ओर गुंज्जर समुदाय सिरमौर ने भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है । गिरिपार क्षेत्र के हाटी समुदाय को जनजातीय का दर्जा देने से भाजपा को आगामी चुनाव में कितना लाभ मिल सकता है यह सब भविष्य के गर्भ में हैं ।



