कर्मचारी, अधिकारी, पेंशनर और बेरोज़गार सभी परेशानएंट्री टैक्स समेत फैसलों पर घिरी सरकार, कुछ अखबारों पर भ्रामक तस्वीर दिखाने के आरोप
शिमला
हिमाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार को लेकर असंतोष लगातार बढ़ता नजर आ रहा है। जहां एक ओर कुछ सर्वे और मीडिया रिपोर्ट्स में जनता को सरकार के फैसलों से संतुष्ट बताया जा रहा है, वहीं ज़मीनी स्तर पर तस्वीर बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है।
राजधानी शिमला सहित कई इलाकों में पेंशनरों के विरोध प्रदर्शन ने यह साफ कर दिया है कि नाराज़गी केवल एक वर्ग तक सीमित नहीं है। अब कर्मचारी, अधिकारी, बेरोज़गार और आम जनता भी सरकार की नीतियों से खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
सरकारी कर्मचारियों का कहना है कि पिछले तीन वर्षों में उन्हें केवल 4% डीए (महंगाई भत्ता) मिला, जो महंगाई के मुकाबले बेहद कम है। वहीं अधिकारियों के वेतन और भत्तों में 20 से 30 प्रतिशत तक की कटौती ने असंतोष को और बढ़ा दिया है।
दूसरी ओर, प्रदेश के बेरोज़गार युवा भी सरकार से निराश हैं। रोजगार के अवसर सीमित होने और भर्तियों में देरी के कारण युवाओं में गुस्सा बढ़ता जा रहा है।
एंट्री टैक्स का मुद्दा भी लगातार चर्चा में है। विपक्ष और आम लोग इसे महंगाई बढ़ाने वाला कदम बता रहे हैं, जिससे आम जनता पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
प्रदर्शन कर रहे पेंशनरों का कहना है कि अगर वास्तव में जनता खुश होती, तो सड़कों पर इतना बड़ा विरोध देखने को नहीं मिलता। उनकी मांग है कि सरकार उनकी लंबित देनदारियों को जल्द पूरा करे।
इस बीच, कुछ अखबारों और मीडिया संस्थानों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि निजी स्वार्थों के चलते कुछ मीडिया प्लेटफॉर्म सरकार के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं और जमीनी सच्चाई को दबा रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जो तस्वीर कुछ रिपोर्ट्स में दिखाई जा रही है, वह वास्तविकता से कोसों दूर है। “अगर सब कुछ ठीक होता, तो हर वर्ग में इतना असंतोष क्यों होता?”यह सवाल अब आम चर्चा का विषय बन चुका है।
सर्वे और दावों के बीच, हिमाचल में बढ़ता जनआक्रोश सरकार के लिए एक बड़ा संकेत है। पेंशनरों से लेकर कर्मचारियों, अधिकारियों और बेरोज़गार युवाओं तक हर वर्ग की नाराज़गी यह दिखा रही है कि जमीनी हकीकत को नजरअंदाज करना अब आगामी चुनावों में अपने प्रत्याशियों को जीत दलाना अब आसान नहीं रहेगा।



