पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, खासकर ईरान, इस्राइल और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच गहराते संकट ने खाड़ी देशों में रह रहे भारतीय प्रवासियों और उनके परिजनों की चिंता बढ़ा दी है। इसका असर हिमाचल प्रदेश के उन हजारों परिवारों पर भी पड़ा है, जिनके सदस्य रोजगार के लिए विदेश में कार्यरत हैं।
हिमाचल सरकार अलर्ट पर
जानकारी के अनुसार, हिमाचल प्रदेश के लगभग 45,000 लोग दुबई, सऊदी अरब, कतर, कुवैत, ओमान और बहरीन जैसे खाड़ी देशों में काम कर रहे हैं। प्रदेश के श्रम एवं रोजगार मंत्री हर्षवर्धन सिंह चौहान ने विभाग को पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।
सरकार ने अधिकारियों को विदेशों में रह रहे युवाओं और उनके परिजनों से लगातार संपर्क बनाए रखने को कहा है। यदि हालात बिगड़ते हैं और वापसी की आवश्यकता पड़ती है, तो राज्य सरकार केंद्र सरकार के साथ समन्वय कर विशेष उड़ानों (स्पेशल फ्लाइट्स) और अन्य आवश्यक कदमों के जरिए प्रवासियों को सुरक्षित स्वदेश लाने की तैयारी करेगी।
खाड़ी देशों से चिंताजनक संदेश
विभिन्न देशों में रह रहे हिमाचलियों ने सोशल मीडिया और फोन कॉल के माध्यम से वहां के हालात साझा किए हैं।
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बहरीन: सिरमौर के कपिल नेगी ने बताया कि उनके कार्यस्थल के पास स्थित एक अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर मिसाइल गिरने की खबर से दहशत का माहौल है।
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कतर: हमीरपुर के पंकज और उनकी पत्नी रुचि ने परिजनों को बताया कि दोहा में प्रशासन ने लोगों को घरों के अंदर रहने की सख्त हिदायत दी है।
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दुबई और ओमान: ऊना के सतीश कुमार, जो दुबई में सिविल इंजीनियर के रूप में कार्यरत हैं, ने देर रात बजते इमरजेंसी सायरन और धमाकों की आवाज से बने तनावपूर्ण माहौल का जिक्र किया।
पर्यटन और उड़ानों पर असर
युद्ध जैसे हालात का असर पर्यटन और हवाई सेवाओं पर भी पड़ा है। गगल एयरपोर्ट पर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के अनिश्चित कार्यक्रम के चलते इस्राइली नागरिकों को अपने देश लौटने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, दिल्ली और कांगड़ा के बीच घरेलू उड़ानें फिलहाल सामान्य रूप से संचालित हो रही हैं।
हिमाचल के परिवारों ने राज्य सरकार से मांग की है कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एक हेल्पलाइन नंबर जारी किया जाए, ताकि संकट की घड़ी में वे अपने परिजनों से संपर्क बनाए रख सकें और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें सुरक्षित वापस लाने की प्रक्रिया तेज की जा सके।






