करदंग में आयोजित ग्रे घोस्ट एमटीबी चैंपियनशिप में चमके सात्विक
शिमला, 16 अक्टूबर। सरस्वती पैराडाइज इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल, संजौली में नौवीं कक्षा के छात्र सात्विक बस्ता ने ग्रे घोस्ट एमटीबी साइकिल चौंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए क्रॉस-कंट्री ओलंपिक (एक्ससीओ) अंडर-19 वर्ग में रजत पदक हासिल किया। लाहौल-स्पीति के करदंग गांव में आयोजित इस प्रतियोगिता में विभिन्न राज्यों के प्रतिभागियों के साथ जर्मनी की एक महिला साइकिलिस्ट सहित कुल 22 युवाओं ने भाग लिया। कड़ाके की ठंड और चुनौतीपूर्ण पहाड़ी ट्रैक के बीच सात्विक ने अपनी प्रतिभा, तकनीकी दक्षता और धैर्य का परिचय देते हुए दूसरा स्थान हासिल किया।
सात्विक की इस उपलब्धि से उनके परिवार, विद्यालय और क्षेत्र में खुशी का माहौल है। महज 15 वर्ष की उम्र में अंडर-19 वर्ग में अपने से अधिक उम्र के खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा करते हुए रजत पदक जीतना उनकी मेहनत, नियमित अभ्यास और साइकिलिंग के प्रति समर्पण को दर्शाता है।
सात्विक के पिता डॉ. जयपाल बस्ता, जो पशुपालन विभाग में कोटी-जुन्गा में सेवारत हैं, ने बताया कि प्रतियोगिता के दौरान क्षेत्र में कड़ाके की ठंड पड़ रही थी। ऊंची पर्वत चोटियों पर ताजा बर्फबारी के कारण मौसम और भी चुनौतीपूर्ण हो गया था। ऐसे में ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी रास्तों पर साइकिल चलाना प्रतिभागियों के लिए किसी कठिन परीक्षा से कम नहीं था। इसके बावजूद सात्विक ने बेहतरीन संतुलन, गति और दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर शानदार प्रदर्शन करते हुए दूसरा स्थान प्राप्त किया।
उन्होंने बताया कि सात्विक को बचपन से ही ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर साइकिल चलाने का शौक रहा है। इसी रुचि और खेल के प्रति लगन के चलते वह विभिन्न राज्यों में आयोजित साइकिलिंग प्रतियोगिताओं में भाग लेता रहा है और अपने प्रदर्शन से विद्यालय तथा क्षेत्र का नाम रोशन कर रहा है। गौर रहे कि माउंटेन बाइकिंग की क्रॉस-कंट्री ओलंपिक स्पर्धा में खिलाड़ियों को कठिन चढ़ाइयों, तीखे ढलानों और पथरीले रास्तों पर गति के साथ संतुलन बनाए रखना पड़ता है।
सात्विक की इस उपलब्धि से उनके परिवार, विद्यालय और क्षेत्र में खुशी का माहौल है। महज 15 वर्ष की उम्र में अंडर-19 वर्ग में अपने से अधिक उम्र के खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा करते हुए रजत पदक जीतना उनकी मेहनत, नियमित अभ्यास और साइकिलिंग के प्रति समर्पण को दर्शाता है।
सात्विक के पिता डॉ. जयपाल बस्ता, जो पशुपालन विभाग में कोटी-जुन्गा में सेवारत हैं, ने बताया कि प्रतियोगिता के दौरान क्षेत्र में कड़ाके की ठंड पड़ रही थी। ऊंची पर्वत चोटियों पर ताजा बर्फबारी के कारण मौसम और भी चुनौतीपूर्ण हो गया था। ऐसे में ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी रास्तों पर साइकिल चलाना प्रतिभागियों के लिए किसी कठिन परीक्षा से कम नहीं था। इसके बावजूद सात्विक ने बेहतरीन संतुलन, गति और दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर शानदार प्रदर्शन करते हुए दूसरा स्थान प्राप्त किया।
उन्होंने बताया कि सात्विक को बचपन से ही ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर साइकिल चलाने का शौक रहा है। इसी रुचि और खेल के प्रति लगन के चलते वह विभिन्न राज्यों में आयोजित साइकिलिंग प्रतियोगिताओं में भाग लेता रहा है और अपने प्रदर्शन से विद्यालय तथा क्षेत्र का नाम रोशन कर रहा है। गौर रहे कि माउंटेन बाइकिंग की क्रॉस-कंट्री ओलंपिक स्पर्धा में खिलाड़ियों को कठिन चढ़ाइयों, तीखे ढलानों और पथरीले रास्तों पर गति के साथ संतुलन बनाए रखना पड़ता है।


