चार वर्षों से भाषा विभाग से अनुदान के नाम पर नहीं मिली फूटी कौड़ी
शिमला, 10 अगस्त। जुन्गा तहसील के ठूंड गांव में स्थित देव जुन्गा देवचंद के लगभग 200 वर्ष पुराने मंदिर का जीर्णोद्धार कार्य बिना किसी सरकारी सहायता के जनसहयोग से जारी है। इस संबंध में सोमवार को ठूंड में मंदिर समिति की एक आमसभा आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता मंदिर समिति के प्रधान प्रेम ठाकुर तथा देवता के गुर नंदलाल शर्मा ने की। बैठक में मंदिर निर्माण के दौरान आ रही वित्तीय समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में मंदिर समिति के सदस्यों ने खेद व्यक्त करते हुए बताया कि मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए निदेशालय भाषा एवं संस्कृति विभाग, शिमला में भेजी गई फाइल पिछले चार वर्षों से बजट के अभाव में लंबित पड़ी है। समिति के प्रधान प्रेम ठाकुर ने कहा कि यदि सरकार प्राचीन मंदिरों के संरक्षण एवं जीर्णोद्धार के लिए सहायता प्रदान करने में सक्षम नहीं है, तो ऐसी योजनाओं की बंद किया जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि देव जुन्गा देवचंद का मंदिर अत्यंत जर्जर अवस्था में पहुंच चुका था। इसके चलते मंदिर समिति ने सभी औपचारिकताएं पूरी कर मामला भाषा एवं संस्कृति विभाग को भेजा था और अनुदान मिलने की उम्मीद थी। हालांकि, दो वर्षों तक सहायता का इंतजार करने के बावजूद कोई मदद नहीं मिली, जिसके बाद देवता के कलैणों और स्थानीय लोगों ने स्वयं मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य आरंभ कर दिया।
समिति के अनुसार अब तक श्रद्धालुओं और कलैणों के सहयोग से लगभग 50 लाख रुपये की राशि एकत्रित की जा चुकी है, जिसके माध्यम से मंदिर निर्माण का करीब 75 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। प्रेम ठाकुर और देवता के गुर नंदलाल शर्मा ने बताया कि लोगों ने अपनी सामर्थ्य से बढ़कर योगदान दिया है, लेकिन अब शेष 25 प्रतिशत कार्य पूरा करने तथा मंडी जिला से आए विशेषज्ञ कारीगरों की मजदूरी का भुगतान करना भी कठिन होता जा रहा है।
उन्होंने कहा कि मंदिर का निर्माण प्राचीन दैव शैली में किया जा रहा है, जिसमें देवी-देवताओं की आकर्षक नक्काशी उकेरी जा रही है। मंदिर समिति ने सरकार और भाषा एवं संस्कृति विभाग से आग्रह किया है कि देव जुन्गा देवचंद मंदिर, ठूंड की लंबित फाइल पर शीघ्र कार्रवाई कर अनुदान जारी किया जाए, ताकि शेष कार्य समय पर पूरा किया जा सके।
बैठक में मंदिर समिति के सदस्यों ने खेद व्यक्त करते हुए बताया कि मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए निदेशालय भाषा एवं संस्कृति विभाग, शिमला में भेजी गई फाइल पिछले चार वर्षों से बजट के अभाव में लंबित पड़ी है। समिति के प्रधान प्रेम ठाकुर ने कहा कि यदि सरकार प्राचीन मंदिरों के संरक्षण एवं जीर्णोद्धार के लिए सहायता प्रदान करने में सक्षम नहीं है, तो ऐसी योजनाओं की बंद किया जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि देव जुन्गा देवचंद का मंदिर अत्यंत जर्जर अवस्था में पहुंच चुका था। इसके चलते मंदिर समिति ने सभी औपचारिकताएं पूरी कर मामला भाषा एवं संस्कृति विभाग को भेजा था और अनुदान मिलने की उम्मीद थी। हालांकि, दो वर्षों तक सहायता का इंतजार करने के बावजूद कोई मदद नहीं मिली, जिसके बाद देवता के कलैणों और स्थानीय लोगों ने स्वयं मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य आरंभ कर दिया।
समिति के अनुसार अब तक श्रद्धालुओं और कलैणों के सहयोग से लगभग 50 लाख रुपये की राशि एकत्रित की जा चुकी है, जिसके माध्यम से मंदिर निर्माण का करीब 75 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। प्रेम ठाकुर और देवता के गुर नंदलाल शर्मा ने बताया कि लोगों ने अपनी सामर्थ्य से बढ़कर योगदान दिया है, लेकिन अब शेष 25 प्रतिशत कार्य पूरा करने तथा मंडी जिला से आए विशेषज्ञ कारीगरों की मजदूरी का भुगतान करना भी कठिन होता जा रहा है।
उन्होंने कहा कि मंदिर का निर्माण प्राचीन दैव शैली में किया जा रहा है, जिसमें देवी-देवताओं की आकर्षक नक्काशी उकेरी जा रही है। मंदिर समिति ने सरकार और भाषा एवं संस्कृति विभाग से आग्रह किया है कि देव जुन्गा देवचंद मंदिर, ठूंड की लंबित फाइल पर शीघ्र कार्रवाई कर अनुदान जारी किया जाए, ताकि शेष कार्य समय पर पूरा किया जा सके।

