शिमला
हिमाचल प्रदेश के बागवानी क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जलवायु परिवर्तन और मौसम की अनिश्चितताओं के कारण पारंपरिक सेब की खेती पर बढ़ते संकट को देखते हुए प्रदेश सरकार अब ‘ब्लूबेरी’ को एक लाभकारी और टिकाऊ विकल्प के रूप में प्रोत्साहित कर रही है।
आय का नया जरिया और सरकारी पहल
ब्लूबेरी अपने उच्च पोषण मूल्य के लिए जानी जाती है और यह बागवानों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती है। बाजार में इसकी कीमत 800 रुपये से लेकर 2000 रुपये प्रति किलो तक पहुंच रही है, जिससे यह एक लाभकारी फसल के रूप में उभर रही है।
इसकी संभावनाओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने आगामी वित्त वर्ष के लिए 5 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है। इस योजना के तहत बागवानी विभाग उन्नत किस्म के पौधे तैयार कर रहा है।
उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए इटली सहित अन्य देशों से बेहतरीन ‘टिश्यू कल्चर’ आयात किए गए हैं, ताकि किसानों को गुणवत्तापूर्ण और अधिक उत्पादन देने वाले पौधे उपलब्ध कराए जा सकें। सरकार का मानना है कि ब्लूबेरी की खेती प्रदेश के बागवानों के लिए आय का स्थायी और बेहतर विकल्प साबित हो सकती है।






