सुक्खू जानते थे पंचायत चुनाव में कांग्रेस साफ हो जाएगी, उनका झूठ हवा हो जाएगा : जयराम ठाकुर
कोविड जैसी चुनौती में भी भाजपा सरकार ने करवाए पंचायत चुनाव, सुक्खू सरकार ने सत्ता में आते ही षड्यंत्र कर चुनाव रोकने का काम किया
जयराम ठाकुर ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह भी मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के बारे में कहते थे कि वे साजिश और षड्यंत्र करने में माहिर हैं। सत्ता में आने के बाद मुख्यमंत्री ने इस बात को सच साबित कर दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने पंचायतीराज संस्थाओं को कमजोर करने का काम किया है। पंचायत चुनाव समय पर करवाने में सरकार ने साज़िशन देरी की, जिसके कारण ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्य प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि हमारी नीयत साफ थी और संविधान एवं लोकतांत्रिक व्यवस्था में हमारी पूरी आस्था थी, इसलिए कोविड जैसी विषम परिस्थितियों में भी भाजपा सरकार ने पंचायत चुनाव करवाए। लेकिन सुक्खू सरकार ने साजिशनपंचायत चुनावों को रोकने और टालने का प्रयास किया।
जयराम ठाकुर ने नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों से आह्वान किया कि वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर अपने-अपने क्षेत्रों की जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए काम करें। अब पंचायतों में निर्वाचित प्रतिनिधि हैं और उनके माध्यम से गांवों के विकास को नई गति और मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों को यहीं रुकना नहीं है। पंचायत से लेकर विधानसभा तक कांग्रेस की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ जनता की आवाज बुलंद करनी है। आने वाले समय में कांग्रेस को हिमाचल प्रदेश से उखाड़ फेंकना है और भाजपा को प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापस लाना है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता ने कांग्रेस को उखाड़ फेंकने का मन बना चुकी है और 2027 में कांग्रेस कहीं नज़र नहीं आएगी। इस मौके पर बीजेपी के उपाध्यक्ष एवं कुल्लू प्रभारी बिहारी लाल शर्मा, बंजार विधायक सुरेंद्र शौरी, मंडी जिला सह प्रभारी भीमसेन शर्मा, ब्लॉक अध्यक्ष घनश्याम, ब्लॉक समिति की अध्यक्ष लता ठाकुर, नगर पंचायत अध्यक्ष धनवंती, जिसका परिषद सदस्य अनिल राणा, कुसुमलता समेत बाज़ार ब्लॉक समिति के सदस्य एवं अन्य जनप्रतिनिधि एवं कार्यकर्ता उपस्थि रहे।
*चंबा में इलाज में लापरवाही से हुई मृत्यु ह्रदय विदारक, जवाबदेही से भाग नहीं सकती सरकार*
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि चम्बा मेडिकल कॉलेज में इलाज के अभाव में बच्चे की मृत्यु की घटना बेहद दिल दहला देने वाली है। अस्पताल में उपचार की व्यवस्था न मिलने के कारण एक मासूम मौत होना सिस्टम की नाकामी है। सुक्खू सरकार के कार्यकाल में इलाज में लापरवाही और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली के ऐसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं, लेकिन सरकार इन घटनाओं से सबक लेकर व्यवस्था में सुधार करने के बजाय लीपापोती का रवैया अपना रही है। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू को समझना चाहिए कि उनके झूठे दावों और बड़े-बड़े भाषणों की कीमत अब प्रदेश की जनता अपनी जान और स्वास्थ्य से चुका रही है। एक ओर अस्पतालों में लोगों को समय पर इलाज नहीं मिल रहा, दूसरी ओर नेशनल हेल्थ मिशन और केंद्र सरकार द्वारा हिमाचल को भेजी गई धनराशि खर्च नहीं हो पाने के कारण वापस जा रही है। मुख्यमंत्री को भाषण देने के बजाय प्रदेश की चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था की जिम्मेदारी तय कर तत्काल सुधार के कदम उठाने चाहिए।

